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Lucknow बनेगा देश का सबसे बड़ा मेडिकल हब: SGPGI में बनेगा देश का पहला क्वार्टनरी सेंटर
Lucknow: लखनऊ में SGPGI में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला क्वार्टनरी हेल्थकेयर सेंटर बनेगा। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय में 300 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी स्थापित किया जाएगा।
SGPGI
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जल्द ही देश और दुनिया के नक्शे पर एक 'ग्लोबल मेडिकल कैपिटल' के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाने जा रही है। गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए अब मरीजों को दिल्ली या विदेश का रुख नहीं करना पड़ेगा। एक तरफ जहां संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में 5,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से देश का पहला 600 बेड वाला अत्याधुनिक 'क्वार्टनरी स्वास्थ्य-देखभाल (Quaternary Healthcare) केंद्र' आकार लेने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय परिसर में 300 बेड का नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खोलने की तैयारी अंतिम चरण में है।
एसजीपीजीआई का ₹5,000 करोड़ी सेंटर: रोबोटिक सर्जरी से लेकर एआई और अंग प्रत्यारोपण तक सब एक छत के नीचे
SGPGI में बनने वाला यह क्वार्टनरी सेंटर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का पहला और सबसे उन्नत चिकित्सा केंद्र होगा।
एक ही छत के नीचे मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट: संस्थान के निदेशक डॉ. आर.के. धीमन ने बताया कि यह देश का ऐसा पहला सेंटर होगा जहां एक ही छत के नीचे दिल, फेफड़ा, लिवर, गुर्दा (किडनी), पैंक्रियाज जैसे सभी महत्वपूर्ण अंगों का प्रत्यारोपण (Transplant) किया जा सकेगा। इसके अलावा न्यूरो और ब्लड कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के विशेषज्ञ एक ही परिसर में मौजूद रहेंगे।
अत्याधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी: सेंटर में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस (AI) आधारित डायग्नोस्टिक्स, रोबोटिक सर्जरी, हाईब्रिड ओटी (Hybrid OT), प्रोटॉन थेरेपी, सेल्यूलर/जीन-सेल थेरेपी, ईसीएमओ (ECMO) और उन्नत न्यूरो-इंटरवेंशनल व ऑन्कोलॉजी जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
तीन चरणों में 5 साल का मास्टर प्लान: इस महत्वाकांक्षी केंद्र को 5 वर्षों के भीतर चरणबद्ध (3 चरणों) तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बता दें कि इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को 23 दिसंबर 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई 103वीं शासी निकाय बैठक में मंजूरी मिली थी।
लैब से सीधे मरीज तक पहुंचेगा इलाज: ट्रांसलेशनल रिसर्च और एआई उपकरण
SGPGI के रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेई के अनुसार, इस सेंटर का मुख्य आकर्षण ट्रांसलेशनल रिसर्च (Translational Research) होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि प्रयोगशालाओं (Labs) में होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधानों और खोजों को बिना किसी देरी के सीधे मरीजों के क्लिनिकल इलाज तक पहुंचाया जाएगा। यहाँ नई दवाओं, AI आधारित मेडिकल डिवाइसेस और अत्याधुनिक उपचार तकनीकों के विकास पर गंभीर काम किया जाएगा।
अटल बिहारी चिकित्सा विश्वविद्यालय को भी मिलेगा 300 बेड का अपना सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
राजधानी के स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय परिसर में भी एक नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने की योजना है:
डीपीआर शासन को प्रेषित: विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 300 बेड के इस प्रस्तावित अस्पताल की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
राज्यपाल की पहल पर कदम: सितंबर 2025 में आयोजित विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय का अपना समर्पित अस्पताल न होने पर चिंता जताई थी। इसके बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का खाका तैयार किया।
प्रशासनिक समीक्षा जारी: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने पुष्टि की है कि शासन स्तर पर डीपीआर का गहन परीक्षण कराया जा रहा है, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
5,000 करोड़ रुपये का SGPGI क्वार्टनरी सेंटर और अटल यूनिवर्सिटी का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मिलकर लखनऊ को उन्नत चिकित्सा अनुसंधान और उच्च स्तरीय इलाज का सबसे बड़ा केंद्र बना देंगे। दुर्लभ और जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे देश भर के मरीजों के लिए यह आधुनिक स्वास्थ्य क्रांति किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी।


