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Lucknow KGMU में बड़ा फर्जीवाड़ा! कैंसर मरीजों के नाम पर करोड़ों की दवाएं गायब, मचा हड़कंप
Lucknow KGMU News: मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
Lucknow KGMU News
Lucknow KGMU News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कैंसर मरीजों के नाम पर करोड़ों रुपये की महंगी दवाओं के कथित रूप से घोटाले का मामला सामने आने से बड़ा हड़कंप मच गया है। शुरूआती जांच में लगभग 2 करोड़ रुपये की दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की बड़ी आशंका जताई गई है। यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
आखिर मामला क्या है ?
जानकारी के मुताबिक, यह मामला KGMU के यूरोलॉजी विभाग से जुड़ा हुआ है, जहां असाध्य योजना के अंतर्गत मरीजों को मुफ्त में दी जाने वाली महंगी दवाओं के रिकॉर्ड में गंभीर रूप से बड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच के दौरान अधिकारियों को कई ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें मरीजों के नाम पर कागजों में दवाओं और इंजेक्शनों की खपत दिखाई गई, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। ऐसा होना चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप नहीं माना जा रहा।
क्या कहा डॉ. केके सिंह में ?
KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच के दौरान दवा काउंटर पर तैनात संविदाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही उन्हें जांच पूरी होने तक लखनऊ छोड़ने से भी फिलहाल रोक दिया गया है। प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति को आज सोमवार तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
जांच यह भी बड़ा खुलासा
शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कैंसर मरीजों को भर्ती कर दवा देने के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। कई मरीजों के रिकॉर्ड में ताकत बढ़ाने और प्रोटीन से जुड़े महंगे इंजेक्शन एक महीने में चार से पांच बार लगाए जाने की एंट्री दर्ज मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे इंजेक्शन साधारण तौर पर 6 महीने में सिर्फ एक बार दिए जाते हैं। इन इंजेक्शनों की कीमत 8-10 हजार रुपये प्रति डोज बताई जा रही है।
अधिकारियों का शक तब गहरा गया जब विभाग में दवाओं की खपत एकाएक कई गुना बढ़ गई। अक्टूबर और नवंबर 2025 में जहां हर महीने लगभग 10 लाख रुपये की दवाएं खर्च हो रही थीं, वहीं फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 40 लाख रुपये के करीब पहुंच गया। मार्च में दवाओं का बजट 45 लाख रुपये से ज्यादा दर्ज किया गया। इसके बाद बिलों और डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन का एक ख़ास ऑडिट कराया गया, जिसमें कई संदिग्ध लेन-देन और अनियमितताएं सामने आयीं।
बता दे, KGMU प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने, धन की रिकवरी करने और सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर रूप से सवाल खड़े कर रहा है।


