HC Action on Sushma Kharkwal: पार्षद को शपथ न दिलाना सुषमा खर्कवाल को पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने फ्रीज किए प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार

HC Action on Sushma Kharkwal: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज कर दिए हैं। फैजुल्लागंज वार्ड से निर्वाचित पार्षद को 5 महीने तक शपथ न दिलाए जाने पर कोर्ट ने यह सख्त कार्रवाई की है।

Shivam
Published on: 21 May 2026 5:23 PM IST (Updated on: 21 May 2026 5:42 PM IST)
HC Action on Sushma Kharkwal: पार्षद को शपथ न दिलाना सुषमा खर्कवाल को पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने फ्रीज किए प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार
X

HC Action on Sushma Kharkwal: लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच ने गुरुवार को एक अहम आदेश जारी करते हुए लखनऊ मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है। यह फैसला एक निर्वाचित पार्षद को अब तक शपथ न दिलाए जाने के मामले में लिया गया है। मामला वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज का है। सत्र अदालत ने ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन फैसला आने के पांच महीने बाद भी उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई।

इस पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक अदालत द्वारा निर्वाचित घोषित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार स्थगित रहेंगे।

अब पूरा मामला विस्तार से समझिए…

लखनऊ निकाय चुनाव-2023 में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। मतगणना में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 वोट मिले, जबकि ललित तिवारी को 3,298 मत प्राप्त हुए। इसके आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला को विजयी घोषित कर दिया गया था।

हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद समाजवादी पार्टी प्रत्याशी ललित तिवारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन संबंधी प्रपत्रों में जरूरी जानकारियां छिपाईं और कुछ अनिवार्य सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। याचिका में कहा गया कि ये जानकारियां देना कानूनी रूप से अनिवार्य था और ऐसा न करना चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि नामांकन प्रक्रिया में हुई इस अनियमितता से चुनाव की निष्पक्षता और वैधता प्रभावित हुई है। इसी आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग की गई थी।

करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने चुनाव के दौरान दाखिल शपथ पत्र, एफिडेविट और निर्वाचन प्रपत्रों की जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया। सभी दस्तावेजों और पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि नामांकन के दौरान आवश्यक जानकारी छिपाना गंभीर अनियमितता है, जो चुनाव की वैधता को प्रभावित करती है।

इसी आधार पर अदालत ने प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन निरस्त कर दिया और वार्ड-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) से समाजवादी पार्टी प्रत्याशी ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया।

इसके बावजूद मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। ललित तिवारी का आरोप था कि अदालत से निर्वाचित घोषित किए जाने के बाद भी उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई। उन्होंने न्यायाधिकरण को बताया कि 19 दिसंबर 2025 को फैसला आने के बावजूद प्रशासन ने अब तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई, जबकि पूर्व निर्वाचित सदस्य लगातार अपने दायित्व निभाते रहे।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जिला मजिस्ट्रेट ने 23 जनवरी और 10 फरवरी 2026 को नगर आयुक्त, लखनऊ को पत्र भेजकर निर्वाचन न्यायाधिकरण के फैसले से अवगत कराया था। साथ ही धारा-85 के तहत शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए गए थे। राज्य सरकार ने भी 4 फरवरी 2026 को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के आदेश जारी किए थे।

इसके बाद 12 मई 2026 को हाईकोर्ट ने एक बार फिर आदेश देते हुए कहा कि ललित तिवारी को एक सप्ताह के भीतर शपथ दिलाई जाए। इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रदीप कुमार शुक्ला की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

इसके बावजूद जब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए लखनऊ के मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दे दिया।

Shivam

Shivam

Shivam is a multimedia journalist.

Next Story