मोबाइल की किस्त नहीं चुकाई तो युवक को बनाया बंधक, पांच दिन मजदूरी कराने और जबरन खून निकलवाने का आरोप

Lucknow News: लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की किस्त के विवाद में युवक को पांच दिन बंधक बनाने, मजदूरी कराने और कथित तौर पर जबरन खून निकलवाने का आरोप लगा है। पुलिस ने दो लोगों पर केस दर्ज किया है।

Newstrack Network
Published on: 16 Sept 2026 12:19 AM IST
Lucknow News
X

Lucknow News

Lucknow News: मोबाइल की एक किस्त नहीं चुका पाने पर युवक को कथित तौर पर घर से ले जाकर पांच दिन तक बंधक बनाने, उससे मजदूरी कराने और ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा मजरा पुरहिया गांव की है। पीड़ित नेवल के परिजनों का आरोप है कि मोबाइल की किस्त वसूलने के नाम पर शुभम सिंह और उसका एक साथी उसे अपने साथ ले गए। परिवार से पहले 2,799 रुपये ऑनलाइन मंगवाए गए और इसके बाद 12,500 रुपये की अतिरिक्त मांग की गई। रकम नहीं देने पर नेवल को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी देने का भी आरोप है। मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद सोमवार को निगोहां पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की हैं और स्थानीय पुलिस की कथित लापरवाही की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

परिजनों के मुताबिक नेवल ने सितंबर 2025 में निगोहां कस्बे की गीता मोबाइल शॉप से करीब 21,500 रुपये का मोबाइल फोन शून्य अग्रिम भुगतान पर खरीदा था। उसकी मासिक किस्त 2,799 रुपये तय होने की बात परिवार ने बताई है। एक किस्त बकाया होने के बाद दुकान से जुड़े लोग मोबाइल वापस ले गए थे। परिवार का कहना है कि इसके बाद मामला शांत हो गया था और उन्हें लगा कि मोबाइल वापस लिए जाने के बाद आगे कोई विवाद नहीं रहेगा। करीब एक साल बाद 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से उनके गांव पहुंचे। आरोप है कि दोनों ने किसी बहाने से नेवल को अपने साथ बुलाया और फिर उसे वहां से ले गए। परिवार को काफी देर तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में नेवल ने लौटने पर परिजनों को जो बताया, उसके आधार पर यह मामला सामने आया।

पीड़ित परिवार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि नेवल को पहले लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। परिवार का कहना है कि वहां उसके साथ मारपीट की गई और उससे मजदूरी भी कराई गई। नेवल ने घर लौटने के बाद बताया कि उसे पर्याप्त खाना तक नहीं दिया जाता था और प्यास लगने पर पानी भी नहीं दिया जाता था। हालांकि, खून निकालने के बाद उसे बेच दिए जाने का आरोप अभी जांच का विषय है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि युवक को वास्तव में किस ब्लड बैंक में ले जाया गया, वहां रक्त निकालने की प्रक्रिया कैसे हुई, उसकी अनुमति किस तरह ली गई और इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आरोप को फिलहाल परिजनों और पीड़ित के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

नेवल के बड़े भाई राजकुमार के मुताबिक, बंधक बनाए जाने के दौरान आरोपियों ने उन्हें फोन किया और मोबाइल की किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन भेजने को कहा। परिवार ने यह रकम भेज दी, लेकिन इसके बाद भी नेवल को नहीं छोड़ा गया। 11 सितंबर को दोबारा फोन आया और 12,500 रुपये और मांगे गए। रकम नहीं देने पर नेवल को जान से मारने तथा नदी में फेंक देने की धमकी देने का आरोप है। परिवार ने इसके बाद पुलिस से मदद मांगी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पांचवें दिन नेवल को रैपिड कैब से थाने भेजे जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कैब का किराया भी उसके भाई से ही भरवाया गया। थाने पहुंचने के समय नेवल बदहवास हालत में था।

परिवार ने स्थानीय पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। राजकुमार का कहना है कि जब वह शिकायत लेकर निगोहां थाने पहुंचे तो पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज करने के बजाय आरोपियों को फोन किया। इसके बाद कथित तौर पर नेवल को थाने भेज दिया गया। परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो उन्हें यह कहकर डराया गया कि यदि मुकदमे के चक्कर में पड़ेंगे तो नेवल को भी फंसा दिया जाएगा, क्योंकि उसकी किस्त बकाया थी। परिवार का कहना है कि इस रवैये के कारण उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सोमवार को डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के सामने मामला पहुंचने के बाद कार्रवाई शुरू हुई।

डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के निर्देश पर निगोहां पुलिस ने मामले में दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों में शुभम सिंह का नाम सामने आया है, जबकि दूसरे व्यक्ति की पहचान की जा रही है। पुलिस ने अपहरण, बंधक बनाकर रखने, मारपीट और गंभीर धमकी से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई शुरू की है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। डीसीपी ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के भी निर्देश दिए हैं। इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल युवक को कथित रूप से ले जाने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायत मिलने के बाद थाने के स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और यदि पीड़ित परिवार को वास्तव में टरकाया गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी, यह भी देखा जाएगा।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि मोबाइल की किस्त की वसूली के लिए किसी निजी एजेंट या दुकान से जुड़े व्यक्ति को आखिर कितनी कानूनी शक्ति होती है। किसी उपभोक्ता की किस्त बकाया होने पर वित्तीय संस्था या अधिकृत वसूली एजेंट नियमानुसार भुगतान की मांग कर सकता है और अनुबंध में तय प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है, लेकिन बकाया रकम वसूलने के नाम पर किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध ले जाना, बंधक बनाना, मारपीट करना, धमकी देना या जबरन कोई शारीरिक प्रक्रिया कराना वैध वसूली का हिस्सा नहीं हो सकता। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल किस्त विवाद का नहीं रहेगा, बल्कि गंभीर आपराधिक अपराधों का बन सकता है।

मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी वास्तव में किसी वित्तीय कंपनी के अधिकृत वसूली एजेंट थे या मोबाइल दुकान से जुड़े कर्मचारी अथवा निजी व्यक्ति। अलग-अलग रिपोर्टों में आरोपियों को रिकवरी एजेंट बताया गया है, लेकिन पुलिस जांच में उनकी वास्तविक भूमिका और किसी कंपनी से उनका संबंध स्पष्ट होना बाकी है। यदि वे किसी वित्तीय संस्था की ओर से अधिकृत थे तो यह भी जांच का विषय होगा कि कंपनी को इस कथित वसूली की जानकारी थी या नहीं और उसके अधिकृत वसूली तंत्र का इस्तेमाल किस तरह किया गया। यदि वे अधिकृत एजेंट नहीं थे तो किस्त वसूली के नाम पर उनका हस्तक्षेप और भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आर्थिक परेशानी में फंसे एक व्यक्ति की किस्त वसूलने के लिए कथित तौर पर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, शारीरिक सुरक्षा और गरिमा तक को निशाना बनाया गया। एक महीने की किस्त बकाया होना किसी भी व्यक्ति को अपराधी नहीं बना देता। वित्तीय देनदारी की अपनी कानूनी प्रक्रिया है और भुगतान में असमर्थ उपभोक्ता के साथ उसी प्रक्रिया के तहत व्यवहार किया जाना चाहिए। यदि जांच में युवक को बंधक बनाने, मजदूरी कराने, मारपीट करने, धमकी देने और जबरन खून निकलवाने के आरोप सही साबित होते हैं तो यह वसूली नहीं बल्कि कानून को अपने हाथ में लेने का गंभीर मामला होगा।

फिलहाल पुलिस के सामने तीन स्तर पर जांच की चुनौती है। पहला, नेवल को 8 सितंबर को घर से ले जाने से लेकर पांच दिन बाद वापस भेजे जाने तक उसके साथ वास्तव में क्या हुआ। दूसरा, ब्लड बैंक में रक्त निकालने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें शामिल लोगों की पहचान। तीसरा, परिवार से 2,799 रुपये और फिर 12,500 रुपये की कथित मांग तथा धमकी के पीछे कौन लोग थे। इसके साथ पुलिस को स्थानीय स्तर पर शिकायत मिलने के बाद हुई कार्रवाई की भी जांच करनी है। यदि इन सभी कड़ियों को प्रमाणों, फोन रिकॉर्ड, भुगतान के डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, ब्लड बैंक के दस्तावेज और पीड़ित के चिकित्सकीय परीक्षण से जोड़ा जाता है तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

एक मोबाइल की किस्त से शुरू हुआ यह विवाद अब गंभीर आपराधिक जांच में बदल चुका है। पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि पीड़ित के लगाए गए प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष और प्रमाण आधारित जांच हो। यदि आरोप झूठे हैं तो तथ्य सामने आने चाहिए और यदि सही हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। खास तौर पर रक्त निकालने के आरोप की स्वतंत्र जांच इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सामान्य वसूली विवाद से कहीं अधिक गंभीर और असामान्य आरोप है। साथ ही स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच से यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि परिवार को शुरुआती स्तर पर न्याय पाने में बाधा क्यों आई। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी तथा पूरे घटनाक्रम के साक्ष्य जुटाना पुलिस की अगली बड़ी जिम्मेदारी है।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story