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लखनऊ में 13 करोड़ की मॉर्फीन बरामद, दिल्ली-मुंबई तक सप्लाई के शक में बड़े नेटवर्क की जांच तेज
Lucknow: लखनऊ के दुबग्गा में एएनटीएफ ने करीब 13 करोड़ की मॉर्फीन बरामद की। हरियाणा, नेपाल और दिल्ली-मुंबई तक कथित सप्लाई के कनेक्शन की जांच जारी है।
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध प्रसंस्करण से जुड़े एक बड़े नेटवर्क की आशंका सामने आई है। दुबग्गा इलाके में 13 अक्टूबर को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की छापेमारी के दौरान लगभग साढ़े छह किलोग्राम मॉर्फीन और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद होने के बाद जाँच का दायरा दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, नेपाल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बढ़ने की जानकारी मिली है। बरामद मॉर्फीन का अनुमानित मूल्य करीब 13 करोड़ रुपये बताया गया है। जाँच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आशंका है कि विभिन्न स्थानों से लाए गए मादक पदार्थों का लखनऊ में अवैध प्रसंस्करण किया जाता था और तैयार सामग्री को दूसरे शहरों में पहुँचाया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर स्थानीय वितरकों के माध्यम से छोटे पैकेटों में इसकी बिक्री होती थी। हालाँकि, दिल्ली-मुंबई की रेव पार्टियों तक इस विशेष खेप की आपूर्ति होने का दावा अभी जाँच का विषय है और इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
इस मामले में बाराबंकी निवासी जुहैल और अमजद नाम के दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक विवरण के अनुसार, दुबग्गा में जिस स्थान पर छापेमारी की गई, वहाँ मादक पदार्थों के साथ अवैध निर्माण या प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाली संदिग्ध सामग्री भी मिली थी। बरामद पदार्थों की वास्तविक रासायनिक पहचान, शुद्धता और मात्रा का अंतिम निर्धारण अधिकृत फोरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट से होगा। इसी प्रकार बरामदगी के आधार पर बताए गए बाजार मूल्य को भी अनुमानित मूल्य के रूप में ही समझना चाहिए। अवैध मादक पदार्थों के मामलों में बरामद सामग्री का मूल्य उसकी शुद्धता, प्रकृति और जाँच एजेंसी द्वारा अपनाए गए आकलन के आधार पर अलग-अलग बताया जा सकता है।
एएनटीएफ की कार्रवाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह सामने आया है कि लखनऊ में पकड़ी गई सामग्री किसी स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था का हिस्सा थी या इसके पीछे कई राज्यों में फैला संगठित नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हरियाणा और नेपाल से मादक पदार्थ या उनसे संबंधित सामग्री लखनऊ पहुँचने की आशंका की जाँच की जा रही है। इसके अतिरिक्त दिल्ली और मुंबई तक आपूर्ति होने की जानकारी भी सामने आई है। लेकिन किसी पदार्थ का एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुँचना और उसे किसी विशिष्ट व्यक्ति या गिरोह द्वारा भेजा जाना अलग-अलग तथ्य हैं। जाँच एजेंसी को परिवहन संबंधी अभिलेखों, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल संपर्कों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आपूर्ति श्रृंखला की पुष्टि करनी होगी।
दुबग्गा की कार्रवाई के संबंध में प्रकाशित विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार, छापेमारी 12 अक्टूबर की रात महिपतमऊ क्षेत्र के एक रिहायशी मकान में की गई थी और इसकी जानकारी 13 अक्टूबर को सामने आई। बरामद संदिग्ध मॉर्फीन की मात्रा लगभग 6.4 किलोग्राम बताई गई है। इसके मूल्य को लेकर अलग-अलग आकलन प्रकाशित हुए हैं। एक रिपोर्ट में सरकारी दर के आधार पर करीब 13 करोड़ रुपये और कथित अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य के आधार पर लगभग 32 करोड़ रुपये का उल्लेख है। इसलिए बरामदगी के मूल्य को एक निश्चित और प्रमाणित बाजार कीमत के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
जाँच में सामने आए विवरण के अनुसार, यह कथित गतिविधि किसी बड़े औद्योगिक परिसर के बजाय रिहायशी इलाके के एक मकान से संचालित हो रही थी। यही पहलू सुरक्षा एजेंसियों के लिए विशेष चिंता का विषय है। सामान्य आवासीय परिसर में अवैध मादक पदार्थों के प्रसंस्करण की आशंका केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं रहती। ऐसे स्थानों पर संदिग्ध रसायनों का भंडारण और अनधिकृत गतिविधियाँ आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी जोखिम उत्पन्न कर सकती हैं। इसीलिए जाँच में यह जानना आवश्यक होगा कि मकान का इस्तेमाल कितने समय से हो रहा था, वहाँ किन व्यक्तियों की आवाजाही थी और स्थानीय स्तर पर किसी को गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।
इस मामले में पुलिस ने मादक पदार्थों के साथ हथियार, मोबाइल फोन, वाहन, नकदी और संदिग्ध रसायन भी बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ में कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी जाँच रही है कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले, उसका प्रसंस्करण करने वाले और आगे आपूर्ति करने वाले अलग-अलग व्यक्ति या समूह सक्रिय थे या नहीं। ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन और डिजिटल संपर्कों की पड़ताल से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि गतिविधियाँ व्यक्तिगत स्तर पर संचालित थीं या उनके पीछे कोई व्यापक संगठित तंत्र था।
जाँच से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू मुरादाबाद के एक कथित रसायन आपूर्तिकर्ता तक भी पहुँचा है। एएनटीएफ की पड़ताल में योगेश उर्फ पिंकू नाम के व्यक्ति का उल्लेख सामने आया है, जिसे पहले एक अन्य मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि क्या उसके संपर्कों के माध्यम से लखनऊ में पकड़े गए आरोपियों तक प्रतिबंधित गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पहुँचती थी। हालांकि, किसी पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तारी और वर्तमान मामले में संलिप्तता दो अलग विषय हैं। वर्तमान मामले में उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होगी।
दुबग्गा की बरामदगी से पहले चार अक्टूबर को जानकीपुरम क्षेत्र में भी मादक पदार्थों के कथित अवैध निर्माण से संबंधित कार्रवाई हुई थी। दिल्ली पुलिस ने वहाँ एक मकान से लगभग 6.275 किलोग्राम तैयार हेरोइन बरामद करने की जानकारी दी थी। उस कार्रवाई में बरामद सामग्री का अनुमानित अंतरराष्ट्रीय मूल्य करीब 50 करोड़ रुपये बताया गया था। इस प्रकार अक्टूबर के शुरुआती दिनों में लखनऊ के दो अलग-अलग रिहायशी इलाकों से बड़ी मात्रा में संदिग्ध मादक पदार्थों की बरामदगी हुई है। लेकिन दोनों मामलों के बीच किसी साझा गिरोह, आपूर्तिकर्ता या संचालक का संबंध अभी प्रमाणित नहीं हुआ है। जाँच एजेंसियाँ इन संभावित कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं।
दिल्ली और मुंबई की पार्टियों तक कथित आपूर्ति का पहलू भी इसी व्यापक जाँच का हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार, छोटे वितरकों के माध्यम से मादक पदार्थों को क्लबों और निजी पार्टियों तक पहुँचाने की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से वर्ष के अंत में होने वाले आयोजनों के लिए अवैध आपूर्ति बढ़ने की संभावना की बात कही जा रही है। लेकिन अभी उपलब्ध आधिकारिक और प्रकाशित विवरण से यह प्रमाणित नहीं होता कि दुबग्गा में बरामद विशिष्ट खेप दिल्ली या मुंबई के किसी निश्चित क्लब, पार्टी या आयोजक तक पहुँचने वाली थी। इसी तरह स्थानीय पेडलरों के पास दिसंबर तक बिक्री के लिए मादक पदार्थों का भंडार होने का दावा भी स्वतंत्र पुष्टि के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
इस प्रकरण का सबसे गंभीर सामाजिक पक्ष यह है कि अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति केवल तस्करी और आपराधिक कमाई का मामला नहीं है। हेरोइन और मॉर्फीन जैसे ओपिऑइड पदार्थों का गैर-चिकित्सकीय सेवन गंभीर निर्भरता, ओवरडोज और मृत्यु का जोखिम पैदा कर सकता है। मॉर्फीन का नियंत्रित चिकित्सकीय उपयोग दर्द निवारण के लिए किया जाता है, लेकिन अवैध आपूर्ति और बिना चिकित्सकीय निगरानी के सेवन से जुड़े जोखिम अलग और गंभीर होते हैं। इसलिए मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई के साथ नशे की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
लखनऊ में लगातार सामने आई इन कार्रवाइयों से यह प्रश्न उठता है कि क्या राजधानी का इस्तेमाल मादक पदार्थों के अवैध प्रसंस्करण और वितरण के केंद्र के रूप में किया जा रहा था। दो अलग-अलग ठिकानों पर बरामदगी इस आशंका की गंभीर जाँच का आधार अवश्य प्रदान करती है, लेकिन इससे पूरे शहर को किसी स्थापित अंतरराज्यीय ड्रग उत्पादन केंद्र के रूप में घोषित करना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब जाँच एजेंसियाँ कच्चे माल के स्रोत, वित्तीय नेटवर्क, परिवहन मार्ग, संभावित वितरकों और गिरफ्तार आरोपियों के बीच संबंधों को प्रमाणित कर सकेंगी।
दुबग्गा और जानकीपुरम की कार्रवाइयों ने लखनऊ में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की संभावित गहराई को सामने रखा है। अब जाँच की असली चुनौती केवल बरामद सामग्री और गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों तक पहुँचना है जो कथित तौर पर इस कारोबार के लिए धन, सामग्री और वितरण नेटवर्क उपलब्ध कराते थे। दिल्ली-मुंबई की पार्टियों तक आपूर्ति के दावों की भी इसी कसौटी पर पुष्टि होनी चाहिए। यदि इन कड़ियों को प्रमाणित साक्ष्यों के साथ जोड़ा जा सका, तभी पूरे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसका विस्तार सामने आएगा।


