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Lucknow News: मोहर्रम की तैयारियां तेज, 350 साल पुरानी परंपरा को संवार रहे कारीगर
Lucknow News: लखनऊ में मोहर्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। ऐतिहासिक इमामबाड़ों में साफ-सफाई और सजावट का कार्य जारी है, जबकि 350 वर्ष पुरानी ताजिया जुलूस की तैयारियां जोरों पर हैं।
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Lucknow News: लखनऊ में मोहर्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। ऐतिहासिक इमामबाड़ों और अजाखानों में साफ-सफाई, सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। मोहर्रम के पहले दिन निकलने वाले पारंपरिक जुलूस की तैयारियों में भी लोगों और कारीगरों की व्यस्तता बढ़ गई है।
लखनऊ में मोहर्रम के पहले दिन छोटा इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा तक ताजिया जुलूस निकालने की परंपरा है। यह परंपरा लगभग 350 वर्ष पुरानी मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार वर्ष 1675 में उन्मतुज्जोहरा बानो उर्फ बहू बेगम, जो नवाब शुजा-उद-दौला की पत्नी थीं, ने लखनऊ में ताजिया रखने की परंपरा की शुरुआत की थी। तब से यह सिलसिला लगातार जारी है और हर वर्ष बड़ी श्रद्धा व आस्था के साथ मोहर्रम मनाया जाता है।
मोहर्रम के दौरान निकलने वाले ताजिया जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होते हैं। जुलूस में लोग अपने हाथों में अलम लेकर चलते हैं, जिसे हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में सम्मान का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु अलम को श्रद्धा और सम्मान के साथ चूमते तथा स्पर्श करते हैं।
इस बीच शहर के कारीगर भी मोहर्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अलम के ऊपर लगाए जाने वाले विशेष पट्टों को आकर्षक बनाने के लिए आरी-जरदोजी की बारीक कढ़ाई की जा रही है। कारीगर दिन-रात मेहनत कर पारंपरिक डिजाइनों और नक्काशीदार कढ़ाई से इन पट्टों को तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मोहर्रम के अवसर पर इनकी विशेष मांग रहती है। मोहर्रम नजदीक आते ही लखनऊ के पुराने इलाकों में धार्मिक माहौल बनने लगा है और इमामबाड़ों में अकीदतमंदों की आवाजाही भी बढ़ने लगी है।


