Lucknow News: मोहर्रम की तैयारियां तेज, 350 साल पुरानी परंपरा को संवार रहे कारीगर

Lucknow News: लखनऊ में मोहर्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। ऐतिहासिक इमामबाड़ों में साफ-सफाई और सजावट का कार्य जारी है, जबकि 350 वर्ष पुरानी ताजिया जुलूस की तैयारियां जोरों पर हैं।

Ashutosh Tripathi
Published on: 16 Jun 2026 5:04 PM IST
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Lucknow News: लखनऊ में मोहर्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। ऐतिहासिक इमामबाड़ों और अजाखानों में साफ-सफाई, सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। मोहर्रम के पहले दिन निकलने वाले पारंपरिक जुलूस की तैयारियों में भी लोगों और कारीगरों की व्यस्तता बढ़ गई है।

लखनऊ में मोहर्रम के पहले दिन छोटा इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा तक ताजिया जुलूस निकालने की परंपरा है। यह परंपरा लगभग 350 वर्ष पुरानी मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार वर्ष 1675 में उन्मतुज्जोहरा बानो उर्फ बहू बेगम, जो नवाब शुजा-उद-दौला की पत्नी थीं, ने लखनऊ में ताजिया रखने की परंपरा की शुरुआत की थी। तब से यह सिलसिला लगातार जारी है और हर वर्ष बड़ी श्रद्धा व आस्था के साथ मोहर्रम मनाया जाता है।


मोहर्रम के दौरान निकलने वाले ताजिया जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होते हैं। जुलूस में लोग अपने हाथों में अलम लेकर चलते हैं, जिसे हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में सम्मान का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु अलम को श्रद्धा और सम्मान के साथ चूमते तथा स्पर्श करते हैं।

इस बीच शहर के कारीगर भी मोहर्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अलम के ऊपर लगाए जाने वाले विशेष पट्टों को आकर्षक बनाने के लिए आरी-जरदोजी की बारीक कढ़ाई की जा रही है। कारीगर दिन-रात मेहनत कर पारंपरिक डिजाइनों और नक्काशीदार कढ़ाई से इन पट्टों को तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मोहर्रम के अवसर पर इनकी विशेष मांग रहती है। मोहर्रम नजदीक आते ही लखनऊ के पुराने इलाकों में धार्मिक माहौल बनने लगा है और इमामबाड़ों में अकीदतमंदों की आवाजाही भी बढ़ने लगी है।

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आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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