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रेस्टोरेंट की आड़ में हुक्का बार, आठ महीने में 30 से ज्यादा ठिकानों पर छापे, 50 से अधिक गिरफ्तार
Lucknow News: लखनऊ में हुक्का बार के खिलाफ आठ महीने में 30 से अधिक ठिकानों पर छापे पड़े और 50 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए। हाई कोर्ट के फैसले से कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट हुआ।
Lucknow News (Image Credit-Social Media)
लखनऊ। राजधानी में कैफे और रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहे हुक्का बार के खिलाफ पिछले आठ महीने में लगातार कार्रवाई के बावजूद इनका संचालन नहीं थमा है। पुलिस ने इस अवधि में 30 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे और 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। कई जगह हुक्के, चिलम, पाइप, चारकोल और फ्लेवर्ड तंबाकू बरामद हुआ। फरवरी में अलीगंज के द पैंटा हाउस में छापे के दौरान सात लोगों को गिरफ्तार कर 11 हुक्के और अन्य सामग्री बरामद की गई थी, जबकि सितंबर में नाका और ठाकुरगंज के दो कैफे में हुई संयुक्त कार्रवाई में 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के ताजा फैसले के बाद ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी आधार और स्पष्ट हो गया है।
हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 29 सितंबर को हुक्का बार से जुड़े 70 से अधिक कैफे और रेस्टोरेंट संचालकों की याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर बनाया गया निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र हुक्का परोसने की अनुमति नहीं देता। अदालत के सामने लखनऊ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। पीठ ने माना कि सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध से जुड़े नियमों के तहत धूम्रपान क्षेत्र एक सीमित अपवाद है, उसे हुक्का बार में नहीं बदला जा सकता। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के दिशा-निर्देश भी कहते हैं कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भोजन, तंबाकू उत्पाद या हुक्का जैसे धूम्रपान उपकरण की सेवा नहीं दी जा सकती।
लखनऊ में इस साल की पुलिस कार्रवाइयां बताती हैं कि हुक्का परोसने का कारोबार किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहा। अलीगंज, पारा, कैसरबाग, बाजारखाला, विभूतिखंड, ठाकुरगंज, महानगर और नाका सहित कई क्षेत्रों में कैफे और रेस्टोरेंट पर छापे पड़े हैं। फरवरी में पारा क्षेत्र के एक हुक्का कैफे में पुलिस को दो नाबालिग भी मिले थे। मार्च में कैसरबाग स्थित एसके कैफे पर कार्रवाई में मैनेजर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर आठ हुक्के और फ्लेवर्ड तंबाकू बरामद किया गया था। सितंबर में नाका और ठाकुरगंज पुलिस ने दो कैफे पर छापा मारकर 19 लोगों को गिरफ्तार किया।
हुक्का बारों में अलग-अलग नाम से फ्लेवर्ड तंबाकू परोसे जाने की जानकारी भी पुलिस कार्रवाइयों में सामने आती रही है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मिंट, फलों, स्ट्रॉबेरी, वैनिला, चॉकलेट, पान और दूसरे स्वादों के नाम इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन किसी उत्पाद को ‘फ्लेवर्ड’ या ‘हर्बल’ बताना अपने आप उसे सुरक्षित नहीं बनाता। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तंबाकू नियंत्रण संबंधी दिशा-निर्देशों के मुताबिक तंबाकू रहित हुक्के का धुआं भी कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक पदार्थों के संपर्क में ला सकता है। हुक्का तंबाकू स्वयं COTPA के दायरे में आने वाले तंबाकू उत्पादों में शामिल है।
सबसे गंभीर पहलू नाबालिगों की मौजूदगी है। मूल रिपोर्ट में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और नाबालिगों के हुक्का बार पहुंचने का दावा किया गया है, लेकिन इसकी शहरव्यापी संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इतना जरूर है कि पुलिस की कुछ कार्रवाइयों में नाबालिग मिले हैं। कानून भी इस मामले में स्पष्ट है। COTPA के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है और शिक्षण संस्थानों के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री भी प्रतिबंधित है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 के तहत किसी बच्चे को तंबाकू उत्पाद देने पर अधिक कठोर दंड का प्रावधान है।
इसलिए इसे ‘लड़कियों में हुक्के का शौक’ जैसी धारणा के आधार पर प्रस्तुत करने के बजाय नाबालिगों की पहुंच, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून के पालन के प्रश्न के रूप में देखना अधिक तथ्यपरक है। उपलब्ध पुलिस कार्रवाई किसी विशेष लिंग में हुक्का सेवन अधिक होने की पुष्टि नहीं करती। इसी तरह 500 से दो हजार रुपये तक शुल्क लिए जाने की जानकारी अलग-अलग प्रतिष्ठानों से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इसे पूरे शहर की तय दर नहीं माना जा सकता।
ताजा हाई कोर्ट फैसले के बाद स्थिति अब पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट है। कैफे या रेस्टोरेंट संचालक केवल यह कहकर हुक्का सेवा को वैध नहीं ठहरा सकते कि उनके यहां अलग धूम्रपान क्षेत्र बना हुआ है। अदालत ने इसी दलील को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में पिछले आठ महीने में 30 से अधिक ठिकानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अगला सवाल प्रवर्तन की निरंतरता का है—छापे के बाद वही प्रतिष्ठान दोबारा हुक्का परोसना शुरू न करें और नाबालिगों तक तंबाकू की पहुंच रोकने के नियम वास्तव में लागू हों।


