TRENDING TAGS :
लखनऊ के छात्रों में बढ़ा AI का इस्तेमाल, अब सवालों के जवाब के लिए अगली क्लास का इंतजार नहीं
Lucknow: लखनऊ के छात्र ChatGPT, Gemini और Claude जैसे AI टूल्स से नोट्स, रिसर्च और परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों ने कॉपी-पेस्ट की आदत पर चिंता जताई।
AI generated image
Lucknow: एक समय था जब किसी कठिन सवाल का जवाब न मिलने पर विद्यार्थी अपनी किताब के पन्ने पलटते थे, दोस्तों से पूछते थे या अगले दिन कक्षा में शिक्षक से समाधान मिलने का इंतजार करते थे। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। मोबाइल या कंप्यूटर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित चैटबॉट खोलकर विद्यार्थी न केवल अपने सवालों के जवाब प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि कठिन अध्यायों को आसान भाषा में समझ रहे हैं, गणित के सवालों को चरणबद्ध तरीके से हल करना सीख रहे हैं और विज्ञान तथा दूसरे विषयों के प्रोजेक्ट के लिए नए विचार भी तलाश रहे हैं। राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर लखनऊ के विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुभव शिक्षा जगत में आ रहे इसी बदलाव की तस्वीर सामने लाते हैं। पढ़ाई का नया साथी अब केवल किताब, कॉपी और शिक्षक नहीं, बल्कि एआई भी बनता जा रहा है।
राजधानी के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी चैटजीपीटी, जेमिनी, क्लॉड, परप्लेक्सिटी, नोटबुकएलएम और अन्य डिजिटल साधनों का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई में कर रहे हैं। कोई पाठ्यपुस्तक में दी गई सीमित जानकारी को विस्तार से समझना चाहता है, तो कोई परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं का सारांश बनाता है। कुछ विद्यार्थी कठिन गणितीय सवालों के हल की प्रक्रिया समझते हैं, जबकि अन्य विज्ञान, इतिहास, भाषा और रचनात्मक परियोजनाओं के लिए एआई की सहायता लेते हैं। इससे अध्ययन सामग्री तक पहुँच आसान हुई है। लेकिन साथ ही एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने आया है कि विद्यार्थी इन साधनों से वास्तव में कितना सीख रहे हैं और कितना काम बिना समझे पूरा कर रहे हैं।
सवाल पूछने का तरीका बदला, अब हर समय उपलब्ध है डिजिटल सहायक
परंपरागत शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के सामने जानकारी प्राप्त करने के अनेक साधन रहे हैं। पाठ्यपुस्तकें, पुस्तकालय, शिक्षक, सहपाठी और संदर्भ पुस्तकें अध्ययन के प्रमुख माध्यम रहे हैं। इंटरनेट के प्रसार के बाद विद्यार्थियों को वेबसाइटों, शैक्षणिक वीडियो और डिजिटल पुस्तकालयों से जानकारी मिलने लगी। अब जनरेटिव एआई ने इस प्रक्रिया में एक नया बदलाव जोड़ा है।
सामान्य इंटरनेट खोज में विद्यार्थी को अलग-अलग वेबसाइटों पर जाकर जानकारी पढ़नी और समझनी पड़ती है। इसके विपरीत एआई चैटबॉट से वह बातचीत की शैली में प्रश्न पूछ सकता है। यदि पहला जवाब समझ में नहीं आता, तो वह उसी विषय को सरल भाषा में समझाने, उदाहरण देने या किसी विशेष कक्षा के स्तर के अनुसार प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है। यही सुविधा विद्यार्थियों को आकर्षित कर रही है। वे किसी कठिन विषय को समझने के लिए एक ही प्रश्न कई तरीकों से पूछ सकते हैं। किसी परिभाषा को उदाहरण सहित समझ सकते हैं और आवश्यकता होने पर उसी विषय पर अभ्यास प्रश्न भी तैयार करवा सकते हैं। हालाँकि, एआई से मिलने वाला प्रत्येक उत्तर सही हो, यह आवश्यक नहीं है। इसलिए अध्ययन में उसका उपयोग करते समय पाठ्यपुस्तक, शिक्षक और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी का मिलान करना महत्वपूर्ण है।
किताबों में जानकारी कम मिले तो क्लॉड और परप्लेक्सिटी से करते हैं रिसर्च
सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल, कानपुर रोड के कक्षा 11 के छात्र शौर्य प्रताप सिंह बताते हैं कि कई बार पाठ्यपुस्तकों में किसी विषय की जानकारी सीमित होती है। विद्यार्थी उस विषय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त अध्ययन सामग्री तलाशने में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में शौर्य क्लॉड और परप्लेक्सिटी जैसे एआई टूल्स का उपयोग करते हैं। उनके अनुसार, ये साधन किसी विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करने और शोध के लिए उपयोगी सामग्री खोजने में सहायता करते हैं।
शौर्य चित्र तैयार करने के लिए चैटजीपीटी और जेमिनी का भी उपयोग करते हैं। उनके अनुभव में एआई की एक विशेषता यह है कि वह केवल पूछे गए सवाल का जवाब देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसी विषय को समझने के दूसरे तरीके और वैकल्पिक विचार भी सुझा सकता है। इससे विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र जलवायु परिवर्तन के बारे में पढ़ रहा है, तो वह केवल उसकी परिभाषा जानने के बजाय उसके वैज्ञानिक कारण, आर्थिक प्रभाव और संभावित समाधान भी अलग-अलग प्रश्नों के माध्यम से समझ सकता है।
लेकिन शोध के लिए एआई का उपयोग करते समय एक सावधानी आवश्यक है। किसी चैटबॉट द्वारा प्रस्तुत तथ्य, आँकड़े या संदर्भ हमेशा विश्वसनीय नहीं होते। कभी-कभी एआई ऐसे स्रोतों का उल्लेख भी कर सकता है जो वास्तविक न हों या पूछे गए विषय का समर्थन न करते हों। इसलिए विद्यार्थियों को मूल स्रोत तक पहुँचकर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
कठिन अध्याय आसान भाषा में, परीक्षा की तैयारी के लिए बन रहे नोट्स
पायनियर मॉन्टेसरी स्कूल की छात्रा आयुषी के अनुसार, चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई साधन कठिन विषयों को आसान भाषा में समझने में मदद करते हैं।
किसी अध्याय में जटिल शब्दावली हो या कोई अवधारणा समझने में कठिनाई हो, तो विद्यार्थी एआई से उसे सरल उदाहरणों के साथ समझाने के लिए कह सकते हैं। इससे विषय की शुरुआती समझ विकसित करने में सहायता मिल सकती है।आयुषी बताती हैं कि एआई की मदद से नोट्स तैयार करना और परीक्षा की तैयारी करना भी आसान हो रहा है। विद्यार्थी किसी लंबे अध्याय के प्रमुख बिंदु निकाल सकते हैं, महत्वपूर्ण प्रश्न तैयार कर सकते हैं और अभ्यास के लिए छोटे परीक्षण भी बना सकते हैं।
नोटबुकएलएम जैसे साधनों की सहायता से अपनी अध्ययन सामग्री का सारांश तैयार किया जा सकता है। वहीं फोटोमैथ जैसे उपकरण गणित के सवालों को चरणबद्ध तरीके से समझने में उपयोगी हो सकते हैं। हालाँकि, गणित के किसी प्रश्न का हल देखकर उसे समझ लेना और उसी प्रकार का नया प्रश्न स्वयं हल कर पाना अलग-अलग क्षमताएँ हैं। वास्तविक सीखने के लिए विद्यार्थी को हल की प्रक्रिया समझने के बाद स्वतंत्र रूप से अभ्यास करना आवश्यक है।
गणित में उत्तर से ज्यादा महत्वपूर्ण है हल तक पहुँचने की प्रक्रिया
गणित उन विषयों में शामिल है जिनमें एआई आधारित अध्ययन साधनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। विद्यार्थी किसी प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के साथ यह भी जान सकते हैं कि समाधान तक पहुँचने के लिए कौन-कौन से चरण अपनाए गए।इस सुविधा का लाभ तब अधिक होता है जब विद्यार्थी केवल अंतिम उत्तर न देखकर प्रत्येक चरण का तर्क समझने का प्रयास करे।
उदाहरण के लिए, बीजगणित के किसी प्रश्न में यदि एआई समाधान प्रस्तुत करता है, तो विद्यार्थी उससे पूछ सकता है कि किसी विशेष समीकरण को उस तरीके से क्यों बदला गया। वह वैकल्पिक विधि भी समझ सकता है और उसी अवधारणा पर आधारित नए अभ्यास प्रश्न प्राप्त कर सकता है। लेकिन यदि विद्यार्थी बिना समझे समाधान अपनी कॉपी में उतार देता है, तो उसका गृहकार्य पूरा हो सकता है, पर समस्या हल करने की क्षमता विकसित नहीं होती।एआई आधारित गणितीय साधनों से कभी-कभी गणना या तर्क संबंधी त्रुटियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर का सत्यापन और नियमित अभ्यास आवश्यक है।
किताबें पुरानी नहीं हुईं, पढ़ने और सीखने का तरीका बदल रहा
अवध कॉलेजिएट की छात्रा नैसी का मानना है कि एआई ने पढ़ाई को आसान बनाने में सहायता की है, लेकिन इससे किताबों और शिक्षकों का महत्व कम नहीं हुआ है।
उनकी यह बात शिक्षा में तकनीक की वास्तविक भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। एआई जानकारी प्राप्त करने और किसी विषय को समझने का अतिरिक्त माध्यम हो सकता है, लेकिन पाठ्यपुस्तकें व्यवस्थित पाठ्यक्रम और आधारभूत ज्ञान उपलब्ध कराती हैं।
शिक्षक केवल तथ्य नहीं बताते। वे विद्यार्थियों की समझ का आकलन करते हैं, गलतियों को पहचानते हैं, अनुशासन विकसित करते हैं और विषय को जीवन तथा समाज के अनुभवों से जोड़ते हैं।कक्षा में होने वाली चर्चा, सहपाठियों के प्रश्न और शिक्षक के साथ संवाद से विद्यार्थियों को अलग-अलग दृष्टिकोण समझने का अवसर मिलता है। एआई इस प्रक्रिया में सहायता कर सकता है, लेकिन उसका पूरा विकल्प नहीं है।इसलिए शिक्षा में उभरता परिवर्तन किताबों के समाप्त होने का नहीं, बल्कि किताबों के साथ अध्ययन के नए साधन जुड़ने का है।
एआई और यूट्यूब की मदद से बेहतर प्रोजेक्ट बना रहे विद्यार्थी
ब्राइटलैंड स्कूल के जॉइंट डायरेक्टर रचित मानस के अनुसार, विद्यार्थी एआई और यूट्यूब पर उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री की सहायता से अच्छे प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि विद्यार्थियों के नए विचार और रचनात्मकता प्रभावित करती है। डिजिटल साधनों से बच्चों को ऐसे विषयों पर काम करने के अवसर मिल रहे हैं जिनके लिए पहले अतिरिक्त सामग्री जुटाना कठिन होता था।किसी विज्ञान परियोजना में विद्यार्थी मॉडल की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। इतिहास या भूगोल के विषय पर प्रस्तुति बनाने के लिए जानकारी को व्यवस्थित कर सकते हैं। भाषा संबंधी परियोजनाओं में लेखन के नए तरीके सीख सकते हैं।
एआई की सहायता से चित्र, पोस्टर और प्रस्तुतियाँ तैयार करना भी आसान हुआ है। इससे कुछ विद्यार्थियों को अपने विचार अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता मिल सकती है।लेकिन किसी प्रोजेक्ट की गुणवत्ता केवल उसकी आकर्षक प्रस्तुति से तय नहीं होनी चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि विद्यार्थी उसके विषय को कितना समझता है, उसमें उसका अपना योगदान कितना है और वह अपने निष्कर्षों को किस प्रकार स्पष्ट कर सकता है।
तैयार असाइनमेंट कॉपी करने की आदत से शिक्षकों की चिंता
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ शिक्षकों के सामने एक नई चुनौती भी आई है। कुछ विद्यार्थी इन साधनों का उपयोग सीखने के बजाय तैयार सामग्री प्राप्त करने के लिए करने लगे हैं।किसी विषय पर निबंध लिखना हो, प्रश्नों के उत्तर तैयार करने हों या प्रोजेक्ट बनाना हो, एआई कुछ ही क्षणों में सामग्री प्रस्तुत कर सकता है। इससे समय की बचत होती है, लेकिन यदि विद्यार्थी बिना समझे सामग्री कॉपी कर देता है, तो सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
शिक्षकों की चिंता इसी बात को लेकर है कि विद्यार्थी अपनी सोच, विश्लेषण और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने के बजाय तैयार उत्तरों पर निर्भर न होने लगें।
इस चुनौती का समाधान केवल एआई पर प्रतिबंध लगाना नहीं है। विद्यालयों को ऐसी अध्ययन और मूल्यांकन पद्धतियों पर भी विचार करना होगा जिनमें विद्यार्थी अपने काम की प्रक्रिया स्पष्ट करें।उदाहरण के लिए, किसी परियोजना को जमा करने के साथ विद्यार्थी से यह पूछा जा सकता है कि उसने जानकारी कहाँ से प्राप्त की, कौन-से तथ्य जाँचे और अंतिम निष्कर्ष तक कैसे पहुँचा।इससे एआई को सीखने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने और उसके माध्यम से बिना प्रयास किए कार्य पूरा करने के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सकता है।
विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय हो रहे दस डिजिटल साधन
लखनऊ के विद्यार्थियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे या अध्ययन में उपयोगी बताए गए प्रमुख एआई और डिजिटल साधनों की भूमिका अलग-अलग है।
चैटजीपीटी (ChatGPT): कठिन विषयों को समझने, नोट्स बनाने, अभ्यास प्रश्न तैयार करने, लेखन में सुधार और नए विचार विकसित करने में सहायता कर सकता है।
जेमिनी (Gemini): विभिन्न विषयों पर सवालों के जवाब देने, अध्ययन सामग्री समझने और उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार चित्र या अन्य सामग्री तैयार करने में उपयोगी है।
क्लॉड (Claude): लंबे पाठ को समझने, लेखन का विश्लेषण करने, जटिल जानकारी को व्यवस्थित करने और विषयों की व्याख्या में सहायता कर सकता है।
परप्लेक्सिटी (Perplexity): इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी और संबंधित स्रोत खोजने में उपयोगी है। हालाँकि, प्रस्तुत स्रोतों की विश्वसनीयता अलग से जाँचना आवश्यक है।
नोटबुकएलएम (NotebookLM): विद्यार्थियों द्वारा उपलब्ध कराई गई अध्ययन सामग्री के आधार पर सारांश, प्रश्नोत्तर और अध्ययन संबंधी अन्य सामग्री तैयार करने में सहायता करता है।
फोटोमैथ (Photomath): गणित के प्रश्नों के समाधान और उनके चरणों को समझने के लिए विकसित किया गया उपकरण है।
क्विजलेट (Quizlet): फ्लैशकार्ड, अभ्यास प्रश्न और पुनरावृत्ति के माध्यम से परीक्षा की तैयारी में सहायता करता है। इसकी सभी सुविधाएँ अनिवार्य रूप से जनरेटिव एआई आधारित नहीं हैं।
खानमिगो (Khanmigo): खान अकादमी का एआई आधारित शिक्षण सहायक है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सवाल-जवाब और मार्गदर्शन के माध्यम से विषय समझने में सहायता देना है। इसकी उपलब्धता और उपयोग की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।
ग्रामरली (Grammarly): अंग्रेजी लेखन में व्याकरण, वर्तनी, स्पष्टता और शैली संबंधी सुधार सुझाने वाला साधन है।
कैनवा एआई (Canva AI): शैक्षणिक प्रोजेक्ट, पोस्टर, चित्र और प्रस्तुतियाँ तैयार करने में सहायता करने वाली सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
इन उपकरणों की सभी सुविधाएँ निःशुल्क हों, यह आवश्यक नहीं है। कुछ सेवाओं में आयु, सदस्यता और उपयोग संबंधी प्रतिबंध भी लागू हो सकते हैं।
एआई से पढ़ाई करते समय गलत जानकारी का जोखिम
एआई के उपयोग में सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में से एक उसकी तथ्यात्मक विश्वसनीयता है।कई बार चैटबॉट आत्मविश्वास के साथ ऐसा उत्तर प्रस्तुत कर सकता है जो आंशिक रूप से गलत हो। विज्ञान, इतिहास, साहित्य और सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्नों में भी ऐसी त्रुटियाँ संभव हैं। कभी-कभी एआई किसी लेखक की पुस्तक का गलत नाम बता सकता है, किसी ऐतिहासिक घटना की तारीख में गलती कर सकता है या किसी वैज्ञानिक अवधारणा को अधूरा समझा सकता है।
यदि विद्यार्थी ऐसे उत्तरों को बिना जाँचे याद कर ले, तो परीक्षा की तैयारी और विषय की समझ दोनों प्रभावित हो सकती हैं।इसलिए पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए अधिकृत पाठ्यपुस्तकों, शिक्षकों और विश्वसनीय शैक्षणिक स्रोतों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।एआई से मिली सामग्री को अंतिम सत्य मानने के बजाय उसे विषय समझने और आगे प्रश्न पूछने के शुरुआती साधन के रूप में इस्तेमाल करना अधिक उपयोगी हो सकता है।
बच्चों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी जरूरी
विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए एआई के इस्तेमाल का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल सुरक्षा भी है।कई विद्यार्थी अपनी कॉपी, परीक्षा संबंधी दस्तावेज, स्कूल प्रोजेक्ट या व्यक्तिगत जानकारी एआई उपकरणों पर अपलोड कर सकते हैं। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि कौन-सी जानकारी साझा करना उचित है और कौन-सी नहीं।
विद्यार्थियों को अपना पता, निजी फोन नंबर, पासवर्ड, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य संवेदनशील जानकारी बिना आवश्यकता किसी डिजिटल सेवा पर साझा नहीं करनी चाहिए।विद्यालयों और अभिभावकों को भी यह देखना चाहिए कि बच्चे जिस एआई सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह उनकी आयु के लिए उपयुक्त है या नहीं और उसकी गोपनीयता संबंधी शर्तें क्या हैं।तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी अब डिजिटल शिक्षा का आवश्यक हिस्सा बनती जा रही है।
क्या एआई भविष्य में निजी शिक्षक की भूमिका निभा सकेगा?
एआई आधारित शिक्षण साधनों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वे विद्यार्थियों के प्रश्नों के अनुसार अपनी व्याख्या बदल सकते हैं।यदि कोई विद्यार्थी किसी अवधारणा को पहली बार में नहीं समझ पाता, तो वह उसे दूसरे उदाहरण से समझाने के लिए कह सकता है। इसी तरह एक ही विषय को शुरुआती, मध्यम या उन्नत स्तर पर समझने का प्रयास किया जा सकता है।
इससे व्यक्तिगत अध्ययन में सहायता मिलने की संभावना है, विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए जिन्हें किसी विषय पर अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता होती है।
लेकिन शिक्षक की भूमिका केवल प्रश्नों के उत्तर देने तक सीमित नहीं होती। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी की रुचि, उसकी कठिनाइयों, आत्मविश्वास, सामाजिक परिस्थितियों और सीखने की गति को भी समझने का प्रयास करता है।शिक्षक विद्यार्थियों के बीच संवाद, सहयोग और अनुशासन की संस्कृति विकसित करते हैं। इसलिए एआई को शिक्षकों के विकल्प के बजाय उनकी सहायता करने वाले साधन के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है।भविष्य में विद्यालयों के सामने चुनौती यह होगी कि वे तकनीक की सुविधाओं का लाभ उठाते हुए मानवीय शिक्षण संबंधों को कैसे मजबूत बनाए रखें।
राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर शिक्षा के बदलते स्वरूप का संदेश
राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर लखनऊ के विद्यार्थियों के अनुभव बताते हैं कि शिक्षा की दुनिया में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहा है। अब जानकारी प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों के पास पहले से कहीं अधिक साधन हैं।लेकिन अधिक जानकारी उपलब्ध होना और बेहतर शिक्षा प्राप्त करना एक ही बात नहीं है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तथ्यों को याद करना भर नहीं, बल्कि उन्हें समझना, उनका विश्लेषण करना, सवाल उठाना और स्वतंत्र निष्कर्ष तक पहुँचना भी है।
एआई विद्यार्थियों को कठिन विषयों तक पहुँचने में सहायता कर सकता है। वह अध्ययन सामग्री व्यवस्थित कर सकता है, नए प्रश्न सुझा सकता है और अभ्यास के अवसर बढ़ा सकता है। लेकिन किसी विद्यार्थी की मौलिक जिज्ञासा, परिश्रम और विवेक का स्थान नहीं ले सकता।लखनऊ के विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुभवों से यही संदेश निकलता है कि किताबें अप्रासंगिक नहीं हुई हैं और शिक्षक भी कम महत्वपूर्ण नहीं हुए हैं। केवल पढ़ने, समझने और ज्ञान प्राप्त करने के साधनों का विस्तार हुआ है।
पहले विद्यार्थी सवाल लेकर शिक्षक या पुस्तकालय तक पहुँचता था। अब वही सवाल उसके मोबाइल पर मौजूद चैटबॉट तक भी पहुँच रहा है। इस परिवर्तन की सफलता इस बात से तय होगी कि एआई विद्यार्थियों को तैयार उत्तरों पर निर्भर बनाता है या उन्हें अधिक जिज्ञासु, आत्मनिर्भर और विचारशील बनने में सहायता करता है।


