“बिटिया, अब नहीं डांटेंगे...” 24 घंटे बाद मिलीं 3 बेटियां, लखनऊ पुलिस ने परिवार से मिलाया

Lucknow: लखनऊ में तीन सगी बहनें घर से लापता होने के बाद चारबाग रेलवे स्टेशन पर मिलीं। पुलिस ने उन्हें सकुशल बरामद कर परिवार से मिलाया।

Ashutosh Tripathi
Published on: 9 Oct 2026 10:16 PM IST
“बिटिया, अब नहीं डांटेंगे...” 24 घंटे बाद मिलीं 3 बेटियां, लखनऊ पुलिस ने परिवार से मिलाया
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(इमेज क्रेडिट-आशुतोष त्रिपाठी)

Lucknow: “बिटिया, अब घर लौट आओ... अब कभी नहीं डांटेंगे।” तीन बेटियों के अचानक लापता होने के बाद एक पिता के दिल पर क्या बीती होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। हर गुजरते पल के साथ बढ़ती चिंता, अनहोनी का डर और बेटियों की तलाश में भटकते माता-पिता की बेचैनी। फिर आया वह पल, जब हजरतगंज थाने में तीनों बेटियां सामने खड़ी थीं। उन्हें सुरक्षित देखकर मां सुनीता और पिता विनोद खुद को संभाल नहीं सके। आंखों से आंसू छलक पड़े और माता-पिता ने अपनी लाडलियों को गले लगा लिया। करीब 24 घंटे से चल रही यह बेचैनी आखिरकार राहत और भावुक मिलन में बदल गई। इस पूरे घटनाक्रम में लखनऊ पुलिस की तत्परता और संवेदनशील कार्यशैली ने अहम भूमिका निभाई।

घर से निकलीं तीनों बहनें, परिवार की सांसें अटकीं

हजरतगंज थाना क्षेत्र से एक ही परिवार की तीन सगी बहनों के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। मामला तीन बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने तलाश में कोई ढिलाई नहीं बरती। प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में टीमें गठित की गईं और संभावित ठिकानों पर खोजबीन शुरू कर दी गई। पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ तीनों को ढूंढना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित बरामद कर परिवार तक पहुंचाना भी था।

बस अड्डों से रेलवे स्टेशन तक तलाश, चारबाग में मिलीं बहनें

लापता बहनों की तलाश में पुलिस ने हजरतगंज के प्रमुख बाजारों से लेकर आलमबाग बस स्टैंड, अवध बस स्टैंड, चारबाग बस अड्डे और रेलवे स्टेशन तक सघन चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर निगरानी बढ़ाई और लगातार तलाश जारी रखी। इसी मुस्तैदी का नतीजा रहा कि तीनों बहनों को चारबाग रेलवे स्टेशन पर सकुशल खोज लिया गया।

डांट से आहत होकर वाराणसी पहुंचीं, फिर लौट आईं लखनऊ

पुलिस के मुताबिक, बरामदगी के बाद तीनों बहनों को सुरक्षित थाने लाया गया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें भोजन कराया और विश्वास में लेकर बातचीत की। पूछताछ में बड़ी बहन रूपाली ने बताया कि पढ़ाई को लेकर पिता की डांट और मार से आहत होकर तीनों घर छोड़कर चली गई थीं। वे ट्रेन से वाराणसी पहुंचीं, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हुआ और वे वापसी की ट्रेन से लखनऊ लौट आईं।

इस अभियान में निरीक्षक संतोष पटेल, उपनिरीक्षक अमित सिंह, सुधा दीक्षित, निशा सिंह, हेमंत वर्मा, स्वतंत्र पटेल और मुख्य आरक्षी रोशन की उल्लेखनीय भूमिका रही।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

Chief Photojournalist Mail ID - tripathiashutosh88@gmail.comtripathiashutosh88@gmail.com

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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