Lucknow News: लखनऊ में अनोखा महिला दंगल ‘हापा’, बेटियों-बहुओं ने अखाड़े में दिखाया दमखम; पुरुषों की एंट्री बैन

Lucknow News: लखनऊ के अहमामऊ गांव में नागपंचमी के बाद पारंपरिक महिला दंगल ‘हापा’ आयोजित हुआ। महिलाओं ने कुश्ती में दमखम दिखाया, जबकि आयोजन में पुरुषों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रही।

Ashutosh Tripathi
Published on: 18 Aug 2026 10:42 PM IST (Updated on: 18 Aug 2026 10:43 PM IST)
Lucknow Women Wrestling
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Lucknow Women Wrestling (Image Credit-Newstrack)

लखनऊ। राजधानी के अहमामऊ गांव में नागपंचमी के बाद आयोजित होने वाला पारंपरिक महिला आयोजन ‘हापा’ इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहा। इस अनोखे आयोजन में गांव की बेटियों और बहुओं ने अखाड़े में उतरकर कुश्ती के मुकाबलों में अपना दमखम दिखाया। खास बात यह रही कि पूरे आयोजन के दौरान पुरुषों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रही।

घर की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाली महिलाओं का अखाड़े में अलग अंदाज देखने को मिला। एक-दूसरे को मुकाबले के लिए ललकारती महिलाओं ने मैदान में उतरकर दांव-पेंच आजमाए। मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।

देवी पूजन के साथ हुई आयोजन की शुरुआत



अहमामऊ में लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा की शुरुआत देवी पूजन से हुई। महिलाओं ने टोकरी में फल, बताशे, खिलौने और श्रृंगार का सामान रखकर पूजा की। रीछ देवी, गूंगे देवी और दुर्गा की पूजा के साथ भुईया देवी की जयकार की गई।

पूजा के बाद महिलाओं ने ढोलक की थाप पर पारंपरिक गीत गाए। इसके बाद आयोजन का मुख्य आकर्षण महिला कुश्ती यानी ‘हापा’ शुरू हुआ।

अखाड़े में महिलाओं ने दी एक-दूसरे को चुनौती



हापा के दौरान एक महिला दूसरी महिला को कुश्ती के लिए चुनौती देती है। चुनौती स्वीकार होते ही दोनों अखाड़े में उतरकर मुकाबला करती हैं।

विनय कुमारी और शांति के बीच हुए मुकाबले में विनय कुमारी ने दमदार दांव लगाते हुए शांति को पटखनी दी। इसके बाद राधा और बबली, बबली और सन्नो तथा राधा और राजकुमारी के बीच मुकाबले हुए। इन मुकाबलों में राधा, बबली समेत अन्य महिला पहलवानों ने जीत हासिल की।

आयोजन के अंत में विजेता महिलाओं को पारंपरिक तरीके से सम्मानित किया गया। बबली को 500 रुपये का पुरस्कार दिया गया, जबकि अन्य विजेताओं को साड़ी देकर सम्मानित किया गया।

पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह रोक



हापा की सबसे खास विशेषता यह है कि यह आयोजन केवल महिलाओं के लिए होता है। आयोजन स्थल पर पुरुषों के प्रवेश पर सख्त रोक रहती है। यहां तक कि आसपास की छतों से पुरुषों के आयोजन देखने की कोशिश करने पर भी उन्हें वहां से हटने के लिए कहा जाता है।

महिलाओं के साथ छोटे बच्चों को मैदान तक आने की अनुमति रहती है। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई।

नवाबी दौर से जुड़ी है हापा की परंपरा

गांव की बुजुर्ग रामकली के मुताबिक, हापा की परंपरा नवाबी दौर से जुड़ी मानी जाती है। बुजुर्गों के बीच ऐसी मान्यता है कि करीब सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र में बेगमों के आने और आराम करने का सिलसिला था। उस दौर में महिलाएं गीत-संगीत, नाच-गाने और आपसी मनोरंजन के जरिए समय बिताती थीं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इसी पुराने महिला आयोजन को ‘हापा’ कहा जाता था। हालांकि पिछले करीब आठ-नौ वर्षों से इसमें महिला कुश्ती को भी शामिल किया गया है, जिसके बाद यह आयोजन और अधिक खास बन गया है।

महिलाओं के हाथों में आयोजन की पूरी कमान



हापा की तैयारियों से लेकर देवी पूजन, गीत-संगीत और कुश्ती के आयोजन तक की जिम्मेदारी महिलाएं खुद संभालती हैं। पुरुषों की गैरमौजूदगी में होने वाला यह आयोजन महिलाओं के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी ताकत, आत्मविश्वास और प्रतिभा दिखाने का मंच भी बन चुका है।

अहमामऊ का यह अनोखा आयोजन आज भी स्थानीय परंपरा और महिला सहभागिता की एक अलग पहचान के रूप में जारी है।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

Chief Photojournalist Mail ID - tripathiashutosh88@gmail.comtripathiashutosh88@gmail.com

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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