नजर और नजरिए का खेल है फोटोग्राफी, कैमरे से पहले देखना सीखें: अतुल हुंडू

Lucknow: द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन की फोटो प्रदर्शनी के समापन पर लखनऊ में फोटोग्राफी वर्कशॉप आयोजित हुई। विशेषज्ञ अतुल हुंडू ने प्रतिभागियों को लाइट, एंगल, टेक्सचर और विजुअल ऑब्जर्वेशन की बारीकियां सिखाईं।

Ashutosh Tripathi
Published on: 21 Aug 2026 7:39 PM IST
The Youth Photojournalists Association
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The Youth Photojournalists Association

Youth Photojournalists Association: द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित सामूहिक फोटो प्रदर्शनी के समापन समारोह के अवसर पर शुक्रवार को फोटोग्राफी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। अलीगंज स्थित कलाश्रोत आर्ट गैलरी में आयोजित इस कार्यशाला में कॉलेज ऑफ आर्ट्स के लेक्चरर एवं फोटोग्राफी विशेषज्ञ अतुल हुंडू ने शहर के विभिन्न फोटोग्राफर्स और फोटो प्रेमियों को फोटोग्राफी की बारीकियों से रूबरू कराया।

वर्कशॉप के दौरान अतुल हुंडू ने कहा कि “फोटोग्राफी सिर्फ कैमरे से तस्वीर खींचने का नाम नहीं है, यह नजर और नजरिए का खेल है।” उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि एक बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए सबसे पहले चीजों को देखने और उन्हें समझने की कला विकसित करनी जरूरी है। कैमरे की तकनीकी जानकारी कुछ समय में सीखी जा सकती है, लेकिन किसी दृश्य को देखने का अपना नजरिया और एस्थेटिक्स विकसित करने में लंबा समय लगता है।


उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी को ‘आर्ट ऑफ ऑब्जर्वेशन’ भी कहा जाता है। आज लगभग हर व्यक्ति के पास तस्वीरें खींचने वाला उपकरण मौजूद है, लेकिन हर खींची गई तस्वीर एक अच्छी फोटोग्राफ नहीं बन जाती। एक तस्वीर को प्रभावशाली बनाने के लिए फोटोग्राफर की सोच, कल्पना, तकनीकी समझ और दृश्य को देखने का तरीका महत्वपूर्ण होता है।


उन्होंने प्रतिभागियों को लाइट, फॉर्म, लाइन्स, टेक्सचर, बैकग्राउंड और कैमरा एंगल के महत्व को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि केवल सब्जेक्ट को देखना पर्याप्त नहीं है। एक अनुभवी फोटोग्राफर सब्जेक्ट के साथ यह भी देखता है कि उस पर रोशनी किस तरह पड़ रही है, बैकग्राउंड कैसा है और अलग-अलग एंगल से तस्वीर लेने पर दृश्य का प्रभाव किस तरह बदल सकता है।

उन्होंने कहा कि कैमरे की पोजीशन और एंगल बदलने से बैकग्राउंड बदल जाता है और कई बार पूरी तस्वीर का अर्थ भी बदल जाता है। इसलिए फोटोग्राफर को तस्वीर लेने से पहले कुछ पल रुककर दृश्य को समझना चाहिए।

वर्कशॉप को संवादात्मक रखते हुए प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए गए। उन्होंने युवा फोटोग्राफर्स से कहा कि तकनीकी ज्ञान तेजी से हासिल किया जा सकता है, लेकिन विजुअल सेंस और अपना स्टाइल विकसित करने के लिए “स्लो डाउन एंड लर्न हाउ टू सी” के सिद्धांत पर काम करना चाहिए।

इस दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में फोटोग्राफर्स मौजूद रहे। प्रदर्शनी में शामिल तस्वीरों और फोटोग्राफी की विभिन्न शैलियों पर भी चर्चा की गई।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

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आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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