2007 में सबके अनुमान हुए थे फेल, अब चुनावी सर्वे पर मायावती ने क्या कहा?

Mayawati Election Survey: चुनावी सर्वे को लेकर मायावती ने विरोधियों पर निशाना साधा और 2007 के यूपी चुनाव की याद दिलाई। जानिए बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से क्या अपील की।

Ashutosh Tripathi
Published on: 17 Oct 2026 12:07 PM IST
BSP Election Strategy
X

Mayawati Election Survey

Mayawati Election Survey: उत्तर प्रदेश समेत आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी सर्वेक्षणों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे सर्वेक्षणों को खारिज करते हुए विरोधी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित जातिवादी मीडिया और विरोधी दल धनबल के सहारे फर्जी और भ्रामक सर्वे प्रसारित करवा रहे हैं, ताकि जनता का ध्यान भटकाया जा सके और बसपा के जनाधार को कमजोर दिखाया जा सके।

मायावती ने 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जब-जब बसपा को चुनावी दौड़ से बाहर माना गया, तब-तब पार्टी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर अनुमानों को गलत साबित किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित सर्वेक्षणों और कथित प्रचार के प्रभाव में न आएं। साथ ही उन्होंने पांचवीं बार उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनाने के लक्ष्य को दोहराया।

चुनावी सर्वे को लेकर विरोधियों पर लगाए आरोप

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बसपा संगठन को मजबूत करने और जिताऊ व बेदाग उम्मीदवारों के चयन पर गंभीरता से काम कर रही है। उनके मुताबिक, ऐसे समय में पार्टी को निशाना बनाकर भ्रामक सर्वेक्षणों का प्रचार करना दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि जनता के बीच अपना आधार खो चुके राजनीतिक दल धनबल के सहारे सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर मनगढ़ंत नैरेटिव तैयार करवा रहे हैं। उन्होंने इसे चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश बताया। हालांकि, सर्वेक्षणों को लेकर लगाए गए इन आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट प्रमाण यहां प्रस्तुत नहीं किया गया है।

2007 का उदाहरण देकर मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कई सर्वेक्षणों में बसपा की स्थिति कमजोर बताई गई थी। इसके बावजूद चुनाव परिणामों में पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और उसने सरकार बनाई।

उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के दौरान प्रदेश में सख्त कानून-व्यवस्था कायम करने और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति को बिना भेदभाव लागू करने पर जोर दिया गया था। मायावती ने इसी चुनावी इतिहास का हवाला देकर कहा कि मौजूदा सर्वेक्षणों के आधार पर बसपा की राजनीतिक स्थिति का आकलन करना सही नहीं होगा।

सपा और भाजपा पर भी साधा निशाना

बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता दोनों दलों की नीतियों और कार्यशैली से परेशान है। उनके मुताबिक, बहुजन समाज और शोषित वर्ग के लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

मायावती ने आरोप लगाया कि इसी स्थिति के कारण विरोधी दल दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से कहा कि वे किसी भी डिजिटल भ्रमजाल या प्रायोजित सर्वेक्षण के बहकावे में न आएं।

बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की अपील

मायावती ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों और विचारधारा को पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बसपा का लक्ष्य उनके नेतृत्व में पांचवीं बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाना है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहकर विरोधियों के कथित प्रोपेगैंडा का जवाब देना होगा।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मायावती का यह बयान चुनावी सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता, बसपा के जनाधार और प्रदेश में राजनीतिक मुकाबले को लेकर पार्टी के रुख को सामने रखता है। हालांकि, चुनावी सर्वेक्षणों के दावों और बसपा की वास्तविक चुनावी स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे के नमूने, पद्धति और अन्य उपलब्ध आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।

Ashutosh Tripathi
ABOUT THE AUTHOR

Ashutosh Tripathi

Chief Photojournalist Mail ID - tripathiashutosh88@gmail.comtripathiashutosh88@gmail.com

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

Next Story