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Ram Mandir के CEO जितेंद्र मिश्रा के नाम से 'फर्जी' वीडियो वायरल, अभिजीत दीपके के शेयर करने पर क्यों उठे सवाल?
Ram Mandir CEO viral video: विवाद उस समय और बढ़ गया, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस वीडियो को अपने एक्स अकाउंट पर शेयर कर दिया।
Ram Mandir CEO viral video
Ram Mandir CEO viral video: राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक डांस वीडियो को लेकर अब सियासी और सोशल मीडिया विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक व्यक्ति फिल्मी गाने ‘जमाल कुडू’ पर डांस करता नजर आ रहा है। दावा किया गया कि वीडियो में राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा हैं। हालांकि, फैक्ट-चेक में यह दावा गलत पाया गया। वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है।
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस वीडियो को अपने एक्स अकाउंट पर शेयर कर दिया। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट को लेकर सवाल उठने लगे।
राम मंदिर CEO के नाम से क्या वीडियो हुआ वायरल?
सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में एक व्यक्ति ‘जमाल कुडू’ गाने पर डांस करता दिखाई देता है। उसके सिर पर बोतल या गिलास जैसी वस्तु भी नजर आती है। वीडियो को इस दावे के साथ शेयर किया गया कि इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा मौजूद हैं।
हालांकि, जांच के बाद सामने आया कि वीडियो में दिख रहा शख्स जितेंद्र मिश्रा नहीं है। वीडियो में मौजूद व्यक्ति और जितेंद्र मिश्रा की उपलब्ध तस्वीरों की तुलना करने पर चेहरे और शारीरिक बनावट में अंतर दिखाई देता है। यानी वीडियो वास्तविक हो सकता है, लेकिन उसे जितेंद्र मिश्रा से जोड़कर पेश किया जाना गलत है।
एक अहम तथ्य यह भी है कि वायरल वीडियो नवंबर 2025 का बताया जा रहा है, जबकि जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO 2 सितंबर 2026 को नियुक्त किया गया था। ऐसे में वीडियो को उनके नाम से जोड़ने का दावा और भी सवालों के घेरे में आ गया।
अभिजीत दीपके ने कब शेयर किया वीडियो?
मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने 6 सितंबर को दोपहर करीब 2:31 बजे यही वीडियो अपने एक्स अकाउंट से शेयर किया। बताया गया कि इससे पहले भी वीडियो कुछ अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर किया जा चुका था।
दीपके ने वीडियो शेयर करते हुए निजी जिंदगी और व्यक्तिगत पसंद को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति राम मंदिर ट्रस्ट का CEO होता तो धर्म के ‘ठेकेदार’ किस तरह प्रतिक्रिया देते।
लेकिन जब यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है, तो दीपके की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि वीडियो शेयर करने से पहले उसकी पहचान और सत्यता की पुष्टि क्यों नहीं की गई।
PAK कनेक्शन से क्यों बढ़ा विवाद?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो सबसे पहले 3 सितंबर को पाकिस्तान स्थित फेसबुक पेज ‘Defence Watch’ पर अपलोड किया गया था। इसके बाद यह क्लिप भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पहुंची और अलग-अलग दावों के साथ शेयर होने लगी।
यही पहलू विवाद को और संवेदनशील बना रहा है। हालांकि, किसी वीडियो का पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी। इस संबंध में किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए वीडियो के मूल स्रोत और उसके प्रसार की पूरी कड़ी की जांच जरूरी है।
दीपके की सफाई में क्या कहा गया?
वीडियो की पहचान पर सवाल उठने के बाद अभिजीत दीपके ने अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें बाद में जानकारी मिली कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है।
दीपके ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका मुद्दा किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी या व्यक्तिगत पसंद नहीं था। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य कथित ‘हिपोक्रेसी’ यानी दोहरे रवैये को सामने लाना था।
हालांकि, उनकी सफाई के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस खत्म नहीं हुई। कई यूजर्स ने सवाल किया कि अगर पोस्ट का आधार ही गलत पहचान वाला वीडियो था, तो उसे शेयर करने से पहले तथ्य की पुष्टि क्यों नहीं की गई।
CJP और अभिजीत दीपके पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस विवाद ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया रणनीति को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर राजनीतिक मुद्दों को तेजी से उठाने के दौरान किसी व्यक्ति के बारे में गलत जानकारी या फर्जी पहचान वाला वीडियो साझा करना गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
राम मंदिर से जुड़ा कोई भी मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में मंदिर ट्रस्ट के CEO जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति के नाम से कोई विवादित वीडियो वायरल होने पर उसका असर सामान्य सोशल मीडिया पोस्ट की तुलना में कहीं अधिक हो सकता है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वीडियो शेयर करने के पीछे कोई सुनियोजित राजनीतिक रणनीति या एजेंडा था। लेकिन यह जरूर सवाल है कि क्या सोशल मीडिया पर राजनीतिक संदेश को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश में तथ्य-जांच को नजरअंदाज किया गया।
आगे क्या होगा?
वीडियो की गलत पहचान सामने आने के बाद अब इस पूरे मामले का केंद्र सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार और उसकी जिम्मेदारी बन गया है। सवाल यह भी है कि फर्जी दावे के साथ वायरल हुए वीडियो को किसने सबसे पहले जितेंद्र मिश्रा से जोड़ा और उसके बाद यह भारतीय सोशल मीडिया पर किस तरह फैला।
जितेंद्र मिश्रा की राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद सामने आए इस विवाद ने एक बार फिर दिखाया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी सामग्री को बिना सत्यापन के साझा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल, वीडियो में दिख रहा व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है, यह तथ्य विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं, अभिजीत दीपके की ओर से वीडियो शेयर किए जाने और बाद में सफाई दिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उठे सवालों के जवाब आने बाकी हैं। इस मामले में किसी भी राजनीतिक साजिश या सुनियोजित अभियान का दावा करने से पहले ठोस सबूत और पूरी जांच का इंतजार करना जरूरी होगा।


