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लखनऊ पहुंचकर फिर फरार हुई श्रद्धा दुबे, डीसीपी हटाए गए; तीनों आरोपियों पर 50-50 हजार का इनाम
Lucknow: शिवा शर्मा हत्याकांड में दस दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। श्रद्धा दुबे समेत तीन आरोपियों पर 50-50 हजार का इनाम, डीसीपी हटाए गए और इंस्पेक्टर लाइन हाजिर।
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Lucknow: राजधानी के चर्चित कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में लखनऊ पुलिस की जाँच और फरार आरोपियों की तलाश को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्य आरोपित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे के नेपाल से भारत लौटने, लखनऊ पहुँचने और फिर आगरा की ओर निकल जाने की सूचनाओं के बीच पुलिस उपायुक्त मध्य विक्रांत वीर को पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को भी लाइन हाजिर किया गया है। इसके साथ ही श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश उर्फ तनवीर की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम की राशि 25-25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी गई है। नौ अक्टूबर को शिवा शर्मा की मौत के बाद से फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन दस दिन बीतने के बावजूद मुख्य आरोपियों का पुलिस की पकड़ से बाहर रहना अब विभागीय जवाबदेही का भी विषय बन गया है।
नेपाल से लखनऊ पहुंचने के बाद आगरा जाने का दावा
सबसे चौंकाने वाली जानकारी श्रद्धा दुबे के कथित रूप से लखनऊ लौटने और पुलिस की निगरानी के बावजूद दोबारा निकल जाने को लेकर सामने आई है। जाँच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और चालक दानिश के साथ नेपाल से सोनौली सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुई। इसके बाद गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या और रायबरेली की ओर से होते हुए लखनऊ पहुँचने की बात कही जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रास्ते में रायबरेली के किसी होटल में रुकने के बाद वह लखनऊ आई और यहाँ न्यायालय परिसर के आसपास एक अधिवक्ता से मिली। दावा है कि अधिवक्ता ने उससे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। इसके बाद श्रद्धा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा चली गई। कुछ सूचनाओं में आगरा में एक अधिवक्ता के घर पहुँचने और पुलिस की दबिश से पहले वहाँ से भी निकल जाने का उल्लेख है। देर रात उसके सहारनपुर पहुँचने की आशंका भी व्यक्त की गई।
इस घटनाक्रम ने पुलिस के सामने एक असहज प्रश्न खड़ा कर दिया है। यदि श्रद्धा नेपाल से भारत में प्रवेश करके कई जिलों से गुजरती हुई लखनऊ पहुँची और फिर आगरा तक चली गई, तो उसकी तलाश में लगाई गई पुलिस टीमों को समय रहते उसकी सटीक जानकारी क्यों नहीं मिल सकी? खासतौर पर इसलिए कि पुलिस पहले से नेपाल सीमा, सीमावर्ती जिलों, संभावित न्यायालय परिसरों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निगरानी करने की बात कह रही थी।
वीडियो इंटरव्यू में श्रद्धा ने खुद को बताया निर्दोष
रविवार शाम सामने आए श्रद्धा दुबे के लगभग तीन मिनट 56 सेकंड के वीडियो इंटरव्यू ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। पुलिस जहाँ उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश देने का दावा कर रही थी, वहीं फरार आरोपित का एक समाचार एजेंसी को दिया गया बयान सार्वजनिक हो गया। वीडियो में श्रद्धा ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए शिवा शर्मा की मौत को आत्महत्या बताया। उसका दावा है कि उसने अपनी आँखों से शिवा को अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से छलांग लगाते देखा था। उसने यह भी कहा कि केवल हत्या का आरोप लगा देने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं मान लिया जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। श्रद्धा के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, शिवा के परिजन उसकी मौत को हत्या बताते हुए श्रद्धा और अन्य आरोपियों की भूमिका की जाँच तथा गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।
वीडियो में श्रद्धा ने घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को लेकर भी सवाल उठाया। उसने कहा कि पुलिस नेपाल सीमा तक के कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, लेकिन जिस अपार्टमेंट में शिवा की मौत हुई, वहाँ के सीसीटीवी कैमरों की जाँच के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। श्रद्धा का दावा है कि फुटेज सामने आने पर उसकी बेगुनाही साबित हो जाएगी।
शिवा से संबंध, कर्ज और आभूषणों को लेकर किए दावे
श्रद्धा ने अपने वीडियो बयान में शिवा शर्मा के साथ संबंधों को लेकर भी कई बातें कहीं। उसके अनुसार, वह शिवा को लगभग चार महीने से जानती थी। शुरुआती ढाई महीने दोनों के बीच मित्रता थी और बाद में शिवा का उसके घर आना-जाना शुरू हुआ। श्रद्धा ने दावा किया कि शिवा पर लगभग 16 से 17 लाख रुपये का कर्ज था और कर्ज देने वाले लोग उन्हें फोन करते थे। उसने यह भी कहा कि शिवा ने उससे आर्थिक सहायता माँगी थी। इसके अतिरिक्त उसने अपने घर से पाँच से छह लाख रुपये मूल्य के आभूषण ले जाए जाने की बात कही, लेकिन इसे आपसी निजी मामला बताया। इन सभी बातों की पुष्टि के लिए वित्तीय अभिलेख, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य साक्ष्य आवश्यक होंगे। फिलहाल ये श्रद्धा की ओर से प्रस्तुत दावे हैं, न कि पुलिस जाँच में स्थापित निष्कर्ष।
श्रद्धा ने शिवा की माँ रंजना शर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों का भी खंडन किया है। उसका कहना है कि शिवा की माँ उसे पसंद नहीं करती थीं और उनके बीच संबंधों को लेकर असहमति थी। उसने यह भी दावा किया कि घटना के बाद वह मानसिक सदमे और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में थी। उसके अनुसार, सांस लेने में कठिनाई तथा अपने विरुद्ध हत्या का आरोप लगाए जाने के कारण वह घबरा गई और शहर छोड़कर चली गई। श्रद्धा ने अपनी बहन रश्मि को भी अनावश्यक रूप से मामले में घसीटे जाने का आरोप लगाया। लेकिन फरार होने के कारणों के बारे में उसका स्पष्टीकरण और उसकी वास्तविक गतिविधियाँ दो अलग विषय हैं। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाना होगा कि घटना के बाद वह कहाँ-कहाँ गई, किन लोगों के संपर्क में रही और किन परिस्थितियों में उसने शहर छोड़ा।
लगातार सामने आए वीडियो से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
इस मामले में पुलिस की जवाबदेही पर सवाल इसलिए भी बढ़े हैं क्योंकि श्रद्धा के एक के बाद एक वीडियो सामने आ रहे हैं। प्रकाशित विवरण के अनुसार, 14 अक्टूबर की रात उसके दो वीडियो सामने आए थे। पहला लगभग एक मिनट 15 सेकंड और दूसरा 36 सेकंड का था। इसके बाद 15 अक्टूबर को लगभग पाँच मिनट 28 सेकंड का एक और वीडियो सामने आया। रविवार को चौथा वीडियो इंटरव्यू सार्वजनिक हुआ। इन वीडियो की रिकॉर्डिंग कब और कहाँ हुई, किस माध्यम से उन्हें प्रसारित किया गया तथा क्या उनसे आरोपियों की वास्तविक लोकेशन का कोई विश्वसनीय संकेत मिलता है, यह जाँच का विषय है। किसी वीडियो के इंटरनेट पर प्रसारित होने का समय और उसकी रिकॉर्डिंग का समय एक ही हो, यह आवश्यक नहीं है। इसी कारण केवल वीडियो सामने आने के आधार पर श्रद्धा की तत्कालीन लोकेशन निश्चित नहीं की जा सकती।
लखनऊ पुलिस आयुक्त तरुण गाबा के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, श्रद्धा ने समाचार एजेंसी को अपना बयान उत्तर प्रदेश के ही किसी जिले से दिया था। हालाँकि, उस जिले का नाम स्पष्ट नहीं किया गया। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि जिस स्थान से बयान दिया गया, वहाँ पुलिस टीम पहुँची थी, लेकिन आरोपित पहले ही निकल चुकी थी। दूसरी ओर, सूत्रों का दावा है कि श्रद्धा लखनऊ में एक अधिवक्ता से मिलकर आगरा की ओर चली गई थी। इन दोनों विवरणों के बीच अंतर है और घटनाक्रम की सटीक समयरेखा अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो रिकॉर्ड करने वाली टीम से पुलिस ने संपर्क किया या नहीं और रिकॉर्डिंग के स्थान तथा समय की पुष्टि के लिए क्या प्रयास किए गए।
डीसीपी मध्य हटाए गए, इंस्पेक्टर लाइन हाजिर
इस बीच पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को उनके पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को भी पुलिस लाइन भेजा गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब आरोपियों की गिरफ्तारी न होने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। हालाँकि, उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं है कि इन तबादलों और लाइन हाजिर किए जाने के आदेशों में किन विशिष्ट प्रशासनिक या जाँच संबंधी कमियों को औपचारिक आधार बनाया गया है।
पुलिस ने श्रद्धा, रश्मि और दानिश उर्फ तनवीर पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी है। तीनों की गिरफ्तारी के लिए नेपाल सीमा, उससे सटे जिलों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभावित ठिकानों पर दबिश जारी होने की जानकारी है। रविवार को दानिश के गढ़ी कनौरा स्थित घर पर भी पुलिस पहुँची और उसके परिजनों से पूछताछ की गई। उन्हें सुलतानगंज पुलिस चौकी लाकर संभावित संपर्कों, रिश्तेदारों और ठिकानों के संबंध में जानकारी जुटाने की बात सामने आई है। दानिश की ओर से अदालत में आत्मसमर्पण के लिए आवेदन किए जाने की सूचना भी मिली है। पुलिस यह जाँच कर रही है कि संबंधित दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर कब और कहाँ किए गए।
नेपाल सीमा से संभावित मददगारों तक जांच का दायरा
नेपाल से भारत लौटने के संभावित रास्तों की जाँच भी जारी है। महराजगंज के भगवानपुर और सोनौली क्षेत्र में पुलिस पहले ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जुटा चुकी है। कुछ रिपोर्टों में बुर्का पहने दो महिलाओं के सीमा पार करने की जानकारी सामने आई है और पुलिस उनके बारे में पड़ताल कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में आरोपियों की सहायता करने वाले संभावित व्यक्तियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में है। सूत्रों के अनुसार, नेपाल पहुँचने और वहाँ ठहरने के दौरान कुछ लोगों ने श्रद्धा तथा उसके साथियों को मदद उपलब्ध कराई थी। कुछ रिपोर्टों में एक होटल कारोबारी और अन्य संपर्कों का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त एक लग्जरी वाहन पर कथित सचिवालय पास लगे होने तथा आरोपियों की यात्रा के दौरान उस वाहन की मौजूदगी की भी चर्चा है। लेकिन संबंधित वाहन, उसके मालिक और उसकी वास्तविक भूमिका के बारे में प्रमाणित विवरण सामने नहीं आया है।
पूर्व चालक ने भी लगाए गंभीर आरोप
मामले में एक अन्य व्यक्ति के बयान ने भी चर्चा बढ़ाई है। श्रद्धा दुबे की एसयूवी कुछ दिनों तक चलाने का दावा करने वाले एक पूर्व चालक ने उसके व्यवहार और अन्य लोगों से संबंधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। चालक के अनुसार, उसने लगभग पाँच महीने पहले श्रद्धा के यहाँ काम शुरू किया था, लेकिन सात दिन में नौकरी छोड़ दी। उसका आरोप है कि बकाया मेहनताने के 1,800 रुपये माँगने पर उसे धमकी दी गई। उसने श्रद्धा पर रसूखदार व्यक्तियों के नाम का इस्तेमाल करने, लोगों को ब्लैकमेल करने और भुगतान संबंधी विवादों में धमकाने जैसे आरोप भी लगाए हैं।
इसी दौरान सहारनपुर के वर्ष 2024 के साइबर ठगी मामले से जुड़ा एक न्यायिक नोटिस भी श्रद्धा के बालू अड्डा स्थित फ्लैट पर चस्पा किया गया है। सहारनपुर की अदालत ने एक जब्त कार को छुड़ाने से संबंधित आवेदन पर श्रद्धा को 31 अक्टूबर तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। यह मामला लगभग 90.59 लाख रुपये की साइबर ठगी की जाँच से जुड़ा है, जिसमें लखनऊ निवासी अंकित जायसवाल सहित तीन व्यक्तियों की गिरफ्तारी की जानकारी पहले सामने आ चुकी है। पुलिस की जाँच में एक स्कोडा कार बरामद हुई थी, जिसका पंजीकरण श्रद्धा दुबे के नाम बताया गया है। कार को लेकर अदालत में आवेदन दिया गया था। यह न्यायिक प्रक्रिया शिवा शर्मा की मौत से संबंधित हत्या के मुकदमे से अलग है।
नौ अक्टूबर को हुई थी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत
शिवा शर्मा की मौत नौ अक्टूबर की शाम बालू अड्डा चौराहे के पास स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरने के कारण हुई थी। अलीगंज के कपूरथला क्षेत्र में रहने वाले शिवा कैफे और अन्य कारोबार से जुड़े थे। घटना के बाद उनकी माँ रंजना शर्मा ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। परिवार ने शिवा को धमकाने, प्रताड़ित करने और झूठे मुकदमों में फँसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, श्रद्धा लगातार कह रही है कि शिवा ने आत्महत्या की थी। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था और क्या किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका के साक्ष्य मौजूद हैं।
शिवा की बहन आस्था शर्मा ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की माँग की है। परिवार पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच, डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों के संरक्षण और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का अनुरोध कर चुका है। परिवार की चिंता है कि जाँच में देरी होने से महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में घटनास्थल की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन, कॉल विवरण, संभावित डिजिटल संवाद, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक निष्कर्षों का संरक्षण तथा निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है।
हत्या या आत्महत्या? जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
इस मामले में पुलिस के सामने दो अलग लेकिन समान रूप से महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। पहली चुनौती फरार आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के समक्ष प्रस्तुत करना है। दूसरी चुनौती शिवा शर्मा की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का साक्ष्यों के आधार पर निर्धारण करना है। किसी आरोपी की गिरफ्तारी न होना जाँच की प्रगति पर प्रश्न उठा सकता है।
शिवा शर्मा प्रकरण अब केवल एक संदिग्ध मौत की जाँच तक सीमित नहीं रह गया है। फरार आरोपियों के संभावित अंतरराज्यीय आवागमन, लगातार सामने आते वीडियो बयानों, अदालत में आत्मसमर्पण की कोशिशों और दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई ने लखनऊ पुलिस की कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। यदि श्रद्धा वास्तव में नेपाल से लौटकर लखनऊ और आगरा तक पहुँची, तो उसकी आवाजाही के दौरान पुलिस को मिली सूचनाओं और उन पर की गई कार्रवाई की समयबद्ध समीक्षा आवश्यक है। लेकिन इस पूरे विवाद का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी वही है कि शिवा शर्मा की मौत हत्या थी, आत्महत्या थी या किसी अन्य परिस्थिति का परिणाम। इसका उत्तर आरोपों, वीडियो बयानों और अटकलों से नहीं, बल्कि प्रमाणित साक्ष्यों और निष्पक्ष जाँच से ही सामने आएगा।


