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लिपस्टिक के निशान से पुराने मोबाइल तक, श्रद्धा से पुलिस ने पूछे 120 सवाल...बहन और ड्राइवर के बयानों की भी होगी जांच
Shiva Sharma Death Case: लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश से 120 सवाल पूछे गए। मोबाइल, डिलीट चैट और 11 दिन की फरारी की भी जांच जारी है।
(फोटो- आशुतोष त्रिपाठी)
Shiva Sharma Death Case: लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों और कथित फरारी के दौरान मददगारों की तलाश के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। नागपुर से गिरफ्तार मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को लखनऊ लाकर पुलिस ने करीब 6 घंटे 35 मिनट तक पूछताछ की। इस दौरान तीनों से कुल 120 सवाल पूछे गए। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि 9 अक्टूबर को शिवा की मौत से पहले फ्लैट में क्या हुआ था, घटना के बाद आरोपियों ने क्या कदम उठाए और गिरफ्तारी से बचने के दौरान उन्हें किसने मदद पहुंचाई।
लिपस्टिक के निशान पर क्या बोली श्रद्धा?
पूछताछ के दौरान शिवा के चेहरे पर लिपस्टिक के निशान को लेकर भी सवाल किए गए। श्रद्धा ने इस सवाल के जवाब में कहा कि शिवा उसका बॉयफ्रेंड था। उसने बताया कि वह चेहरे पर दाने निकलने से वह गुस्से में थी। हालांकि, इन बातों से घटना के दिन वास्तव में क्या हुआ था, यह अपने आप साबित नहीं होता। पुलिस को घटनाक्रम की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से करनी होगी।
(फोटो- आशुतोष त्रिपाठी)
पुराने मोबाइल और डिलीट चैट से खुल सकती हैं अहम कड़ियां
इस मामले में पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू मोबाइल फोन और व्हाट्सऐप चैट हैं। श्रद्धा के पास से एक आईफोन समेत दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। इन फोन में सिम कार्ड नहीं मिले। पुलिस को 9 अक्टूबर के बाद की कुछ व्हाट्सऐप चैट डिलीट किए जाने की जानकारी भी मिली है। श्रद्धा और उसकी बहन के पुराने मोबाइल नेपाल में कहीं गायब होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस ने बरामद दोनों मोबाइल फोन को सील कर फोरेंसिक लैब भेजा है, ताकि उनमें मौजूद डेटा को रिकवर किया जा सके। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि घटना के बाद किन लोगों से बातचीत हुई और फरारी के दौरान किसने मदद की।
(फोटो- आशुतोष त्रिपाठी)
नागपुर से गिरफ्तारी, 11 दिन की फरारी पर भी सवाल
श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को यूपी एसटीएफ ने नागपुर से गिरफ्तार किया था। तीनों को लखनऊ लाकर अलग-अलग पूछताछ की गई। पुलिस ने फरारी के दौरान उनके ठिकानों, आर्थिक मदद और संपर्क में रहे लोगों के बारे में सवाल पूछे। नागपुर में फ्लैट किसने उपलब्ध कराया और लखनऊ से निकलने के बाद वे कहां-कहां गए, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को बरामद मोबाइल से कुछ संदिग्ध नंबर मिलने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। इन नंबरों की जांच के जरिए मामले से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
(फोटो- आशुतोष त्रिपाठी)
कोर्ट ने खारिज की रिमांड का विरोध करने वाली अर्जी
करीब साढ़े छह घंटे की पूछताछ और मेडिकल परीक्षण के बाद तीनों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 31 अक्टूबर तक, यानी 10 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। आरोपियों के पक्ष की ओर से न्यायिक रिमांड मंजूर न करने की अर्जी भी दाखिल की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि 9 अक्टूबर को फ्लैट में क्या हुआ था, शिवा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के बाद जुटाए गए डिजिटल व अन्य साक्ष्य श्रद्धा, उसकी बहन और ड्राइवर के बयानों से मेल खाते हैं या नहीं। पुलिस की आगे की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट से मामले की कई अहम कड़ियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।


