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शिवा शर्मा मौत मामला: श्रद्धा दुबे समेत तीन आरोपियों पर 25-25 हजार का इनाम, नेपाल तक पहुँची पुलिस
Lucknow: लखनऊ के अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर हुई थी 28 वर्षीय शिवा की मौत, माँ ने दर्ज कराया हत्या का मुकदमा; दो वीडियो और एक धमकी भरा ऑडियो सामने आने से जाँच में नया मोड़, फ्लैट से मिले कई फिंगरप्रिंट
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Lucknow: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर 28 वर्षीय शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से लगे जिलों में सक्रिय हैं। पुलिस को श्रद्धा और रश्मि के नेपाल जाने की जानकारी मिलने के बाद एक टीम नेपाल भी भेजी गई है। इस बीच शिवा और श्रद्धा के संबंधों में तनाव, कथित आर्थिक विवाद और धमकी से जुड़े कुछ वीडियो तथा एक ऑडियो सामने आने से मामले की जाँच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की सत्यता, उनके समय और घटनाक्रम से उनके संबंध की पड़ताल कर रही है।
शिवा की मौत नौ अक्टूबर की शाम लगभग 6 बजकर 45 मिनट पर हुई थी। वह अलीगंज निवासी रंजना शर्मा का बेटा था और वालू अड्डे के पास स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में श्रद्धा दुबे के साथ लिव-इन संबंध में रह रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिवा श्रद्धा के फ्लैट से नीचे गिरा था। उसकी मौत के बाद माँ रंजना शर्मा ने घटना को हत्या बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर हजरतगंज पुलिस ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे, आदिल, चालक और अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। अब पुलिस ने श्रद्धा, रश्मि और तनवीर अली उर्फ दानिश पर इनाम घोषित किया है। हालाँकि, प्रारंभिक शिकायत में उल्लिखित आदिल और बाद की पुलिस कार्रवाई में सामने आए तनवीर अली उर्फ दानिश की पहचान तथा भूमिका का स्पष्ट विवरण उपलब्ध समाचार में नहीं है।
नेपाल सीमा पर मिली लोकेशन, गिरफ्तारी के लिए कई टीमें सक्रिय
पुलिस उपायुक्त मध्य विक्रांत वीर के अनुसार, श्रद्धा दुबे समेत तीन आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस को जाँच के दौरान जानकारी मिली है कि फरार आरोपियों ने भागने के दौरान अपने कई परिचितों से संपर्क किया था। इन व्यक्तियों से पूछताछ में कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएँ मिलने की बात कही गई है।
पुलिस के अनुसार, श्रद्धा और उसकी बहन रश्मि की लोकेशन भारत-नेपाल सीमा के आसपास मिली थी। इसके बाद पुलिस टीमों को सीमावर्ती जिलों में लगाया गया। जाँच में दोनों के नेपाल जाने की जानकारी मिलने पर एक टीम को नेपाल भेजा गया है।
हालाँकि, किसी आरोपी की लोकेशन सीमा क्षेत्र में मिलने या नेपाल जाने की सूचना प्राप्त होने का अर्थ उसकी वर्तमान मौजूदगी की पुष्टि नहीं है। पुलिस को इन सूचनाओं का सत्यापन करना होगा। इसी तरह नेपाल में किसी आरोपी की गिरफ्तारी या उसे भारत लाने की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और दोनों देशों के अधिकारियों के समन्वय के अधीन होगी।
फिलहाल उपलब्ध विवरण में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।
नौ अक्टूबर को क्या हुआ था अवध ग्रीन अपार्टमेंट में?
शिवा शर्मा की मौत की जाँच का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि नौ अक्टूबर की शाम वह चौथी मंजिल से किन परिस्थितियों में नीचे गिरा। क्या यह दुर्घटना थी, किसी विवाद के दौरान हुई घटना थी या उसे जानबूझकर नीचे गिराया गया? पुलिस को इन संभावनाओं की जाँच भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर करनी होगी।
माँ की शिकायत के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है, लेकिन मुकदमा दर्ज होना किसी आरोपी का अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मौत की वास्तविक परिस्थितियों का निर्धारण घटनास्थल की जाँच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन के रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगा।
यह भी महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय फ्लैट में कौन-कौन मौजूद था, शिवा के गिरने से ठीक पहले क्या हुआ और घटना की सूचना पुलिस या अन्य लोगों को किसने तथा कब दी। उपलब्ध समाचार में इन प्रश्नों के सभी उत्तर नहीं हैं।
शिवा और श्रद्धा के बीच विवाद के संकेत, पुलिस को मिले चैट
पुलिस को शिवा और श्रद्धा के बीच हुई कुछ बातचीत के रिकॉर्ड मिलने की जानकारी सामने आई है। इन चैट से दोनों के बीच तनाव और विवाद होने के संकेत मिलने की बात कही गई है।
किसी संबंध में विवाद या आर्थिक मतभेद होना अपने आप में हत्या का प्रमाण नहीं होता। लेकिन यदि मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो, तो उससे पहले के संबंधों, विवादों और संपर्कों की जाँच महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि दोनों के बीच विवाद किन विषयों को लेकर था, उसकी गंभीरता कितनी थी और क्या उसका नौ अक्टूबर की घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध था।
इसके लिए केवल अलग-अलग संदेशों को पढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। बातचीत का पूरा क्रम, संदेशों की तारीख, संबंधित व्यक्तियों की पहचान और डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता भी महत्वपूर्ण होगी।
गहनों की कथित चोरी को लेकर 58 सेकंड का वीडियो
मामले में सामने आए एक वीडियो की अवधि लगभग 58 सेकंड बताई गई है। इसमें शिवा एक कुर्सी पर बैठा दिखाई देता है और श्रद्धा उससे गहनों की कथित चोरी के संबंध में सवाल करती सुनाई देती है।
वीडियो के विवरण के अनुसार, श्रद्धा पूछती है कि चोरी सितंबर में हुई थी या अक्टूबर में। बातचीत के दौरान शिवा कथित तौर पर कहता है कि जब श्रद्धा वॉशरूम में थी, तब उसने गहने लिए थे। गहने कहाँ बेचे गए, इस प्रश्न पर वह चौक क्षेत्र के एक जौहरी का उल्लेख करता है, लेकिन उसका नाम नहीं बताता।
श्रद्धा वीडियो में तीन चेन और एक ब्रेसलेट चोरी होने की बात कहती है। वह इन गहनों की कीमत लगभग छह लाख रुपये बताती है और शिवा से रकम लौटाने के संबंध में सवाल करती है। बातचीत में वह यह भी पूछती है कि क्या शिवा की माँ को इस मामले की जानकारी है। शिवा कथित तौर पर जवाब देता है कि उसकी माँ को इसके बारे में पता नहीं है।
वीडियो में शिवा के सहमे हुए दिखाई देने की बात कही जा रही है। हालाँकि, किसी व्यक्ति के हावभाव से उसके बयान की स्वेच्छा या सत्यता का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
यहाँ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वीडियो में कथित चोरी स्वीकार करने जैसी बातचीत सामने आने से चोरी का आरोप अपने आप सिद्ध नहीं हो जाता। पुलिस को यह जाँचना होगा कि वीडियो कब बनाया गया, किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड हुआ और क्या उसमें किसी प्रकार का दबाव था।
कथित गहनों की खरीद, स्वामित्व, बिक्री और धन के लेनदेन से जुड़े स्वतंत्र साक्ष्य भी आवश्यक होंगे। वीडियो में जिस जौहरी का उल्लेख बताया गया है, उसकी पहचान और कथित लेनदेन की पुष्टि भी जाँच का विषय हो सकती है।
दूसरे वीडियो में गहनों के बदले कार रखने की बात
लगभग 23 सेकंड के दूसरे वीडियो में श्रद्धा कथित तौर पर शिवा से पूछती है कि वह पैसे कब लौटाएगा। बातचीत में वह कहती है कि यदि उसके पास रकम नहीं है, तो वह अपनी कार उसके पास रख दे और पैसे मिलने पर वापस ले ले।
इस वीडियो को लेकर भी कई प्रश्न उठते हैं। सबसे पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि वीडियो किस तारीख का है और उसमें जिस रकम की चर्चा हो रही है, उसका संबंध पहले वीडियो में बताए गए गहनों से है या किसी अन्य लेनदेन से।
दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि कार वास्तव में किसी के पास रखी गई थी या बातचीत केवल प्रस्ताव तक सीमित रही। उपलब्ध समाचार में कार सौंपे जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
यदि पुलिस को इस बातचीत में किसी प्रकार की जबरन वसूली, धमकी या दबाव की आशंका दिखाई देती है, तो उसके लिए स्वतंत्र साक्ष्य जुटाने होंगे। केवल वीडियो में पैसों की माँग या कार रखने की बात सुनाई देने से अपराध का कानूनी निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
एक मिनट 29 सेकंड के ऑडियो में कथित धमकी
शिवा शर्मा से जुड़ा लगभग एक मिनट 29 सेकंड का एक ऑडियो भी सामने आया है। इसमें पहले एक युवक शिवा से बातचीत करता है। इसके बाद ऋषभ नाम से संबोधित एक व्यक्ति फोन लेकर उससे बात करता सुनाई देता है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, बातचीत के दौरान शिवा को धमकाने वाले शब्द कहे गए हैं। फोन पर बोलने वाला व्यक्ति कथित तौर पर कहता है कि शिवा उसे पहचान नहीं रहा है और सामने आने पर पहचान जाएगा। बातचीत में उसके बाल कटवाने जैसी धमकी का भी उल्लेख है।
इस ऑडियो ने मामले में एक और प्रश्न जोड़ दिया है कि शिवा को धमकी देने वाला व्यक्ति कौन था और उसका शिवा तथा श्रद्धा से क्या संबंध था।
लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऑडियो कब रिकॉर्ड किया गया, उसमें मौजूद व्यक्तियों की वास्तविक पहचान क्या है और कथित धमकी किस विवाद से संबंधित थी। यह भी प्रमाणित नहीं है कि ऑडियो में सुनाई देने वाली बातचीत का नौ अक्टूबर को हुई मौत से कोई प्रत्यक्ष संबंध है।
ऑडियो की फोरेंसिक जाँच, मूल रिकॉर्डिंग, कॉल विवरण और संबंधित व्यक्तियों के बयान इस संबंध में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
माफिया और हिस्ट्रीशीटरों से संबंध के दावों की भी जाँच जरूरी
श्रद्धा दुबे को लेकर यह आरोप भी सामने आया है कि वह कथित तौर पर कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों से परिचय होने का दावा करके लोगों पर दबाव बनाती थी।
सोशल मीडिया पर श्रद्धा का एक ऐसे व्यक्ति के साथ वीडियो प्रसारित होने की बात कही गई है जो गैंगस्टर संबंधी मामले में आरोपी बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मड़ियांव थाने के एक हिस्ट्रीशीटर के साथ उसकी तस्वीर होने की भी जानकारी सामने आई है।
हालाँकि, किसी व्यक्ति के साथ फोटो या वीडियो में दिखाई देना अपने आप में आपराधिक संबंध या अपराध में सहभागिता का प्रमाण नहीं है। यह जानना आवश्यक होगा कि तस्वीरें और वीडियो कब के हैं, संबंधित व्यक्तियों के बीच वास्तविक संबंध क्या था और क्या किसी कथित धमकी या अवैध वसूली से उनका कोई संबंध स्थापित होता है।
श्रद्धा द्वारा लोगों को ब्लैकमेल किए जाने का आरोप भी स्वतंत्र जाँच और साक्ष्यों के आधार पर ही प्रमाणित किया जा सकता है। उपलब्ध समाचार में ऐसे कथित मामलों के पीड़ितों, दर्ज शिकायतों या संबंधित मुकदमों का विस्तृत विवरण नहीं है।
इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप और जाँच के विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फ्लैट में मिले कई फिंगरप्रिंट, पहचान का प्रयास
अवध ग्रीन अपार्टमेंट स्थित श्रद्धा के फ्लैट से फोरेंसिक टीम को कई व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस इन निशानों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
फिंगरप्रिंट किसी व्यक्ति के घटनास्थल पर मौजूद होने या किसी वस्तु के संपर्क में आने से संबंधित जानकारी दे सकते हैं। लेकिन किसी फ्लैट में फिंगरप्रिंट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति घटना के समय वहाँ मौजूद था।
फ्लैट में पहले आने वाले परिचितों, कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों के निशान भी हो सकते हैं। इसलिए यह पता लगाना आवश्यक होगा कि फिंगरप्रिंट किन स्थानों और वस्तुओं से मिले तथा उनका घटना से क्या संबंध हो सकता है।
जाँच में फिंगरप्रिंट के साथ अन्य साक्ष्यों का मिलान करना महत्वपूर्ण होगा। यदि किसी व्यक्ति की उपस्थिति का समय स्थापित करना हो, तो केवल फिंगरप्रिंट के आधार पर ऐसा करना सामान्यतः संभव नहीं होता।
वीडियो और ऑडियो की प्रामाणिकता साबित करना बड़ी चुनौती
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और ऑडियो किसी आपराधिक मामले की जाँच में महत्वपूर्ण सुराग दे सकते हैं, लेकिन उन्हें अंतिम प्रमाण मानने से पहले उनकी तकनीकी जाँच आवश्यक होती है।
डिजिटल रिकॉर्डिंग के मामले में यह देखना होता है कि मूल फाइल कहाँ से प्राप्त हुई, उसमें कोई काट-छाँट या बदलाव हुआ है या नहीं और उसकी रिकॉर्डिंग की तारीख तथा परिस्थितियाँ क्या थीं।
विशेष रूप से तब सावधानी जरूरी हो जाती है, जब किसी बातचीत का केवल छोटा हिस्सा सामने आया हो। अधूरी रिकॉर्डिंग से बातचीत का संदर्भ बदल सकता है।
शिवा के मामले में सामने आए दोनों वीडियो और ऑडियो के संबंध में भी यही प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि रिकॉर्डिंग किसने की, किस उद्देश्य से की और वह घटना से कितने समय पहले की है।
यदि इनमें दबाव, धमकी या किसी आर्थिक विवाद से संबंधित जानकारी मिलती है, तो उसका संबंध अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों से स्थापित करना होगा।
क्या शिवा की मौत से पहले उस पर दबाव बनाया जा रहा था?
इस मामले में सामने आए वीडियो, ऑडियो और चैट के आधार पर यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या शिवा किसी आर्थिक या व्यक्तिगत विवाद के कारण दबाव में था। हालाँकि, इसका उत्तर अभी उपलब्ध जानकारी से निश्चित रूप से नहीं दिया जा सकता।
वीडियो में गहनों और पैसों की चर्चा, दूसरे वीडियो में कार रखने का प्रस्ताव तथा ऑडियो में कथित धमकी, तीनों अलग-अलग परिस्थितियों में रिकॉर्ड हुए हो सकते हैं। इनका आपस में संबंध था या नहीं, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
पुलिस को जाँच में यह देखना होगा कि क्या शिवा को किसी व्यक्ति ने धमकाया था, क्या उससे किसी प्रकार की अवैध माँग की जा रही थी और क्या ऐसी किसी परिस्थिति का उसकी मौत से संबंध था।
साथ ही, घटना के समय की वास्तविक परिस्थितियों की जाँच सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी। केवल पुराने विवादों या कथित धमकियों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शिवा चौथी मंजिल से कैसे गिरा।
पोस्टमार्टम, घटनास्थल और डिजिटल रिकॉर्ड से खुलेगी मौत की गुत्थी
शिवा शर्मा की मौत की जाँच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विशेष महत्व होगा। इससे चोटों की प्रकृति, मौत के चिकित्सकीय कारण और कुछ अन्य परिस्थितियों के संबंध में जानकारी मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त जिस स्थान से शिवा के गिरने की बात कही गई है, वहाँ की भौतिक परिस्थितियों की जाँच भी आवश्यक है। फ्लैट की बालकनी या खिड़की की बनावट, ऊँचाई, आसपास की वस्तुओं की स्थिति और गिरने के स्थान का वैज्ञानिक परीक्षण घटनाक्रम समझने में सहायता कर सकता है।
पुलिस के लिए घटना से पहले और बाद के समय का क्रम स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होगा। इसमें संबंधित व्यक्तियों की आवाजाही, फोन कॉल, संदेश और उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्ड उपयोगी हो सकते हैं।
हालाँकि, उपलब्ध समाचार में पोस्टमार्टम के विस्तृत निष्कर्ष, सीसीटीवी फुटेज या घटनास्थल की वैज्ञानिक जाँच के परिणामों की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए मौत के तरीके के संबंध में किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना अभी जल्दबाजी होगी।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी से मिल सकती हैं महत्वपूर्ण जानकारियाँ
श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश पर इनाम घोषित किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य आरोपियों का पता लगाना और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत जाँच में शामिल करना है।
आरोपियों के बयान और उनसे प्राप्त संभावित सूचनाएँ घटनाक्रम समझने में मदद कर सकती हैं। लेकिन केवल किसी व्यक्ति के फरार होने या गिरफ्तारी से बचने को उसके अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मामले में पुलिस को शिकायतकर्ता के आरोपों, डिजिटल रिकॉर्ड, फोरेंसिक निष्कर्षों और अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों का परीक्षण करना होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस आरोपी की क्या भूमिका थी और किन आरोपों का समर्थन उपलब्ध प्रमाण करते हैं।
शिवा की मौत के पाँच दिन बाद भी कई सवाल अनुत्तरित
नौ अक्टूबर को हुई शिवा शर्मा की मौत के पाँच दिन बाद मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं। हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद तीन आरोपियों पर इनाम घोषित किया गया है। उनकी तलाश नेपाल सीमा तक पहुँच गई है। इस बीच गहनों की कथित चोरी, रकम लौटाने के दबाव और धमकी से संबंधित रिकॉर्डिंग ने मामले को और जटिल बना दिया है।
फिर भी सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अभी अनुत्तरित है कि शिवा चौथी मंजिल से किन परिस्थितियों में गिरा। क्या घटना के समय फ्लैट में कोई विवाद हुआ था? वहाँ कौन-कौन मौजूद था? वीडियो और ऑडियो में सामने आए विवादों का उसकी मौत से कोई संबंध था या नहीं? इन प्रश्नों के उत्तर पुलिस की जाँच और वैज्ञानिक साक्ष्यों से ही मिल सकते हैं।
इस मामले में माँ रंजना शर्मा की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों की तलाश और नए डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल जारी है। ऐसे में आवश्यक है कि जाँच किसी एक वीडियो, कथित संबंध या आरोप तक सीमित न रहे, बल्कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष और प्रमाण-आधारित जाँच की जाए।


