TRENDING TAGS :
'चचा हैं तो सपा है'... लखनऊ में लगे पोस्टरों में शिवपाल का जलवा, अखिलेश यादव को क्यों किया गया OUT?
Shivpal Yadav Poster: लखनऊ में लगे 'चचा हैं तो सपा है' पोस्टरों में शिवपाल सिंह यादव को सपा का आधार बताया गया है। पोस्टर से अखिलेश यादव की तस्वीर गायब होने पर पार्टी में नई चर्चा शुरू हो गई है।
SP Poster Controversy
Shivpal Yadav Poster: विधान परिषद चुनाव (Legislative Council Election) के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। लखनऊ (Lucknow) की सड़कों पर लगे नए पोस्टरों ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और वर्चस्व को लेकर बहस छेड़ दी है। शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए विशाल होर्डिंग्स (Hoardings) में 'चचा हैं तो सपा है' का नारा दिया गया है। इन पोस्टरों में शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) को पार्टी का मुख्य आधार बताया गया है। वहीं, सबसे खास बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की तस्वीर पोस्टरों से गायब है।
पोस्टर से अखिलेश यादव गायब, मुलायम-लोहिया और आजम को जगह
गोमती नगर स्थित सीएमएस तिराहे समेत लखनऊ के कई व्यस्त चौराहों पर ये पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें समाजवादी आंदोलन (Socialist Movement) से जुड़े प्रमुख नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ चेहरों को जगह दी गई है। पोस्टरों में डॉ. राम मनोहर लोहिया, पार्टी के संस्थापक और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव, छोटे लोहिया के नाम से पहचाने जाने वाले जनेश्वर मिश्र, पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा और वरिष्ठ नेता आजम खान की तस्वीरें लगाई गई हैं।
हालांकि, मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इन पोस्टरों में जगह नहीं दी गई है। उनकी तस्वीर गायब होने से पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। ये पोस्टर फर्रुखाबाद के सपा नेता राम मूर्ति यादव की ओर से लगवाए गए हैं।
(वीडियो क्रेडिट- आशुतोष त्रिपाठी)
जीत का श्रेय शिवपाल यादव को, 2027 से पहले शक्ति प्रदर्शन?
पोस्टरों में दावा किया गया है कि शिवपाल यादव के राजनीतिक कौशल (Political Skills) और संगठन पर पकड़ की वजह से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मजबूत किले में सेंध लगाई जा सकी। पोस्टर के जरिए शिवपाल यादव को पार्टी की मजबूती का अहम चेहरा बताया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Election 2027) से पहले इस तरह की पोस्टरबाजी शिवपाल खेमे की ओर से संगठन में अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाने और दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है।
(वीडियो क्रेडिट- आशुतोष त्रिपाठी)
पहले कांग्रेस की पोस्टरबाजी, अब सपा में चर्चा
लखनऊ में हाल ही में कांग्रेस नेताओं की ओर से भी पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 200 सीटों पर दावेदारी की बात कही गई थी। गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर चल रही खींचतान के बीच अब समाजवादी पार्टी के भीतर लगे इन पोस्टरों ने नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।
पोस्टरों में अखिलेश यादव को नजरअंदाज कर शिवपाल यादव को पार्टी की धुरी बताने से सपा के अंदर नेतृत्व और संगठन में प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस पोस्टरबाजी को पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन (Power Balance) से जोड़कर देखा जा रहा है।


