Lucknow News: वॉश पेंटिंग के पुरोधा प्रो. सुखवीर सिंघल की ‘अडिग लक्ष्मण’ पेंटिंग 6.73 लाख में बिकी

1939 में बनी प्रो. सुखवीर सिंघल की दुर्लभ कृति ‘अडिग लक्ष्मण’ की नीलामी में छह बोलीदाताओं के बीच मुकाबला हुआ और पेंटिंग अनुमान से 224% अधिक कीमत में बिकी।

Newstrack Network
Published on: 25 Aug 2026 5:24 PM IST
The pioneer of wash painting, Prof. Sukhvir Singhals Adig Laxman painting sold for Rs 6.73 lakh
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वॉश पेंटिंग के पुरोधा प्रो. सुखवीर सिंघल की ‘अडिग लक्ष्मण’ पेंटिंग 6.73 लाख में बिकी (Photo- Social Media)

Lucknow News: भारतीय कला जगत में 'वॉश पेंटिंग शैली' (Bengal & Lucknow Wash Painting Tradition) के प्रमुख आधार स्तंभ माने जाने वाले मूर्धन्य चित्रकार प्रो. सुखवीर सिंघल द्वारा वर्ष 1939 में बनाई गई ऐतिहासिक कलाकृति 'अडिग लक्ष्मण' ने नीलामी बाजार में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रतिष्ठित 'मॉडर्न एंड कंटेम्परेरी आर्ट ऑक्शन' में इस दुर्लभ पेंटिंग को 6.73 लाख रुपये की अंतिम बोली में खरीदा गया।

यह प्रो. सुखवीर सिंघल की किसी कृति की कला बाजार में पहली आधिकारिक नीलामी थी। नीलामी में इस पेंटिंग का अधिकतम अनुमानित मूल्य (Upper Estimate) तीन लाख रुपये आंका गया था, लेकिन संग्रहकर्ताओं और कला प्रेमियों की भारी मांग के चलते यह अनुमान से 224 प्रतिशत से अधिक ऊंची कीमत पर बिकी।

रामायण के 'पंचवटी प्रसंग' और लक्ष्मण की मर्यादा का चित्रण

'सुखवीर सिंघल आर्ट फाउंडेशन' की निदेशक और प्रो. सिंघल की नातिन प्रियम चंद्रा (जिन्होंने हाल ही में लखनऊ में 'सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव' की स्थापना की है) के अनुसार:

कथानक: 'अडिग लक्ष्मण' प्रो. सिंघल की सुप्रसिद्ध 'रामचरित मानस शृंखला' (Ramcharitmanas Series) की एक महत्वपूर्ण कृति है।

भाव पक्ष: इसमें रामायण के पंचवटी प्रसंग को चित्रित किया गया है, जहाँ शूर्पणखा अपने मायावी रूप में लक्ष्मण को आकर्षित करने का प्रयास करती है, किंतु लक्ष्मण अपनी मर्यादा, धर्म और निर्णय पर अडिग रहते हैं।

तकनीकी विनिर्देश: कागज पर जलरंग वॉश तकनीक (Water Color Wash on Paper) से तैयार इस पेंटिंग का आकार 18.8 × 12.8 इंच (47.8 × 32.5 सेंटीमीटर) है। वर्ष 1939 में निर्मित यह लगभग 87 वर्ष पुरानी कृति भारतीय पौराणिक आख्यानों को वॉश तकनीक के माध्यम से जीवंत करने के प्रो. सिंघल के आरंभिक काल का दुर्लभ नमूना है।

नीलामी में 6 बोलीदाताओं के बीच रही कड़ी प्रतिस्पर्धा

22 और 23 अगस्त को आयोजित 'मॉडर्न एंड कंटेम्परेरी आर्ट ऑक्शन' में इस कृति को लेकर देश-विदेश के संग्राहकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखी गई। कुल छह प्रमुख बोलीदाताओं ने इस पेंटिंग को हासिल करने के लिए लगातार बोलियां लगाईं, जिसके चलते कीमत तेजी से बढ़ते हुए अनुमानित आंकड़े से कई गुना ऊपर 6.73 लाख रुपये पर जाकर बंद हुई।

प्रो. सुखवीर सिंघल और लखनऊ आर्ट कॉलेज की विरासत

वॉश शैली के प्रवर्तक: प्रो. सुखवीर सिंघल को अवध और उत्तर भारत में बंगाल शैली की वॉश पेंटिंग को एक नई पहचान और स्थानीय रंग देने के लिए जाना जाता है।

लखनऊ कला महाविद्यालय का योगदान: उन्होंने लखनऊ कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स में लंबे समय तक अध्यापन किया और कलाकारों की एक पूरी पीढ़ी को वॉटरकलर वॉश विधा में प्रशिक्षित किया।

कला बाजार में महत्व: कला समीक्षकों के अनुसार, इस नीलामी ने यह साबित कर दिया है कि 20वीं सदी के पूर्वार्ध की भारतीय क्लासिकल और पारंपरिक वॉश पेंटिंग्स की वैश्विक व राष्ट्रीय कला बाजार में मांग और ऐतिहासिक मूल्य लगातार बढ़ रहा है।

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