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यूपी भाजपा किसान मोर्चा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, 6 क्षेत्रों के 77 जिलाध्यक्ष घोषित
Lucknow: सुल्तानपुर में कालीसहाय पाठक, लखनऊ महानगर में जितेन्द्र सिंह और अयोध्या में रॉकी द्विवेदी को मिली जिम्मेदारी, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अनुमति से जारी हुई सूची
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भाजपा किसान मोर्चा ने प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में 77 जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अनुमति से किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह चौधरी ने नई नियुक्तियों की सूची जारी की। इन नियुक्तियों को किसानों के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाने और जिला स्तर पर नेतृत्व को नई जिम्मेदारी सौंपने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
घोषित नामों में काशी, अवध और गोरखपुर क्षेत्र के कई प्रमुख जिलों के अध्यक्ष शामिल हैं। सुल्तानपुर में कालीसहाय पाठक, लखनऊ महानगर में जितेन्द्र सिंह और अयोध्या में रॉकी द्विवेदी को किसान मोर्चा की कमान सौंपी गई है। वहीं जौनपुर में भूपेश सिंह, गाजीपुर में धनंजय चौबे और आजमगढ़ में तारकेश्वर सिंह को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
इन नेताओं को मिली जिले की जिम्मेदारी
किसान मोर्चा की ओर से जारी नियुक्तियों में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
सुल्तानपुर: कालीसहाय पाठक
जौनपुर: भूपेश सिंह
गाजीपुर: धनंजय चौबे
लखनऊ महानगर: जितेन्द्र सिंह
अयोध्या: रॉकी द्विवेदी
आजमगढ़: तारकेश्वर सिंह
इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने संबंधित जिलों में किसान मोर्चा के संगठनात्मक नेतृत्व की जिम्मेदारी नए पदाधिकारियों को सौंपी है। अब इन जिलों में संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने और किसानों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की होगी।
मिशन-2027 से पहले संगठन को धार देने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और मोर्चों की सक्रियता को राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसान मोर्चा ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की पहुंच मजबूत करने और किसानों के बीच संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है।
किसानों से जुड़े मुद्दे, कृषि योजनाओं का लाभ, सिंचाई, खाद-बीज की उपलब्धता, फसलों का उचित मूल्य और स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याएं ऐसे विषय हैं, जिन पर किसान मोर्चा की सक्रियता का असर संगठन की जमीनी पकड़ पर पड़ सकता है।
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब नए पदाधिकारियों के सामने अपने-अपने जिलों में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और किसानों के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, इन नियुक्तियों के पीछे पार्टी ने अलग से कोई चुनावी कारण घोषित नहीं किया है।
फिलहाल, भाजपा किसान मोर्चा की ओर से छह क्षेत्रों के 77 जिलाध्यक्षों की घोषणा के साथ जिला स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियों का नया खाका सामने आया है। सूची में शामिल अन्य जिलों के नामों का विवरण उपलब्ध होने पर क्षेत्रवार नियुक्तियों की पूरी जानकारी भी सामने आ सकेगी।


