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UP Cabinet Portfolio Allocation: शपथ हो गई, दफ्तर मिल गए...अब विभागों की बारी! PWD-राजस्व विभाग पर सबकी नजर, कब होगा बंटवारा?
UP Cabinet Portfolio Allocation: यूपी कैबिनेट विस्तार के बाद अब विभागों के बंटवारे पर सस्पेंस! PWD और राजस्व जैसे मलाईदार विभाग किसे मिलेंगे? भूपेंद्र चौधरी, केशव मौर्य और मनोज पांडेय के नाम चर्चा में, जानिए योगी सरकार की अंदरूनी रणनीति।
UP Cabinet Portfolio Allocation: उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले कुछ दिनों से जारी हलचल आखिरकार एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीम का विस्तार करते हुए छह नए चेहरों को जगह दी और दो पुराने साथियों का कद बढ़ाते हुए उन्हें प्रमोशन दिया। शपथ ग्रहण की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सोमवार को सभी आठ मंत्रियों को उनके दफ्तर भी आवंटित कर दिए गए, लेकिन असली सस्पेंस अभी भी बरकरार है। लखनऊ के गलियारों में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है किसे मिलेगा मलाईदार विभाग और किसका कद होगा और भी ऊंचा?
मुख्य भवन बनाम बापू भवन: दफ्तरों ने दिए बड़े संकेत
मंत्रियों को दफ्तरों के आवंटन ने इस बात के साफ संकेत दे दिए हैं कि योगी सरकार की नई टीम में 'पावर सेंटर' कहां रहने वाला है। दोबारा कैबिनेट मंत्री बने कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को मुख्य सचिवालय के प्रथम तल पर दफ्तर दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्य भवन में ही मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम के दफ्तर हैं, जिससे साफ जाहिर है कि भूपेंद्र चौधरी को कोई बहुत महत्वपूर्ण और भारी-भरकम जिम्मेदारी मिलने वाली है। दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय और बाकी राज्य मंत्रियों को बापू भवन में कार्यालय आवंटित किए गए हैं। सामान्यतः कम महत्वपूर्ण माने जाने वाले विभागों के मंत्रियों के दफ्तर बापू भवन में होते हैं, ऐसे में यह आवंटन भविष्य की तस्वीर धुंधली ही सही, पर दिखा जरूर रहा है।
PWD और राजस्व विभाग पर सबकी नजर
योगी कैबिनेट के इस विस्तार का मुख्य मकसद क्षेत्रीय संतुलन और चुनावी समीकरणों को साधना है। चर्चा है कि पुराने मंत्रियों की छुट्टी तो नहीं होगी, लेकिन उनके विभागों में बड़ी अदला-बदली संभव है। इस समय सबसे ज्यादा चर्चा लोक निर्माण विभाग (PWD) को लेकर है। 2024 में जितिन प्रसाद के केंद्र में जाने के बाद से यह महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री योगी के पास ही है। अब सवाल यह है कि क्या सीएम योगी यह जिम्मेदारी भूपेंद्र चौधरी को सौंपेंगे या फिर केशव प्रसाद मौर्य को यह विभाग दोबारा मिलेगा? PWD की कुर्सी के लिए लखनऊ से दिल्ली तक जबरदस्त लॉबिंग चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला अभी भी मुख्यमंत्री की फाइल में बंद है।
बंगलों की तैयारी और जश्न का माहौल
नए मंत्रियों के घरों पर ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों का दौर जारी है। भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान और सोमेंद्र तोमर समेत सभी आठ मंत्रियों के समर्थक जीत का जश्न मना रहे हैं। फिलहाल इन मंत्रियों के पास विधायक स्तर के आवास हैं, लेकिन राज्य संपत्ति विभाग ने मंत्रियों के लिए नए आलीशान बंगलों की फाइल वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को भेज दी है। मंगलवार तक इन मंत्रियों को बड़े बंगले आवंटित होने की उम्मीद है। अभी केवल भूपेंद्र चौधरी, सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल के पास ही मंत्री स्तर के आवास उपलब्ध हैं, बाकी पांच मंत्रियों को जल्द ही नए पते मिलने वाले हैं।
मनोज पांडेय और राज्य मंत्रियों की नई भूमिका
समाजवादी पार्टी छोड़कर आए मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने बड़ा संदेश दिया है। चूंकि वह पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं, इसलिए माना जा रहा है कि उन्हें कोई अनुभवी विभाग सौंपा जाएगा। वहीं, प्रमोशन पाने वाले सोमेंद्र तोमर पहले ऊर्जा राज्यमंत्री थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें स्वतंत्र प्रभार के साथ ऊर्जा विभाग ही दिया जा सकता है, जो वर्तमान में अरविंद शर्मा के पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में है। इसी तरह अजीत पाल को भी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है।
विभागों के बंटवारे में देरी की असली वजह
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों की घोषणा में हो रही देरी का एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री का व्यस्त कार्यक्रम भी है। सीएम योगी आदित्यनाथ सोमवार को वाराणसी और दिल्ली के दौरे पर थे और मंगलवार को उन्हें असम में हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना है। माना जा रहा है कि असम से लौटने के बाद ही विभागों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। पहली बार मंत्री बने हंसराज विश्वकर्मा, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश सिंह राजपूत को फिलहाल किसी कैबिनेट मंत्री के साथ संबद्ध कर अनुभव लेने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। फिलहाल, यूपी की राजनीति के 'शतरंज' पर मोहरे सज चुके हैं, बस चाल चलने का इंतजार है।


