यूपी में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट बनेगा साइबर सुरक्षा का कवच

लखनऊ स्थित फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट में तैयार हो रहे 500 साइबर वारियर, एआई फिशिंग, डीपफेक और हैकिंग जैसे खतरों से निपटने में मिलेगा बड़ा सहारा

Newstrack Network
Published on: 1 April 2026 7:51 PM IST (Updated on: 1 April 2026 8:21 PM IST)
यूपी में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट बनेगा साइबर सुरक्षा का कवच
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Lucknow: बदलते साइबर अपराध के तौर-तरीकों पर लगाम कसने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में 500 से ज्यादा साइबर फॉरेंसिक वारियर तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य में सीमापार हैकिंग, एआई जनित फिशिंग, डीपफेक और उभरते डिजिटल खतरों से मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोजित मीट माई मेन्टोर कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में साइबर अपराध का स्वरूप और अधिक जटिल होगा, लेकिन यूपी की यह पहल इसे रोकने में निर्णायक साबित होगी।

अब वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक की समस्या से निपटना होगा आसान

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, भारत सरकार के सदस्य डॉ. अजय सिंह ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान विश्वस्तरीय बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और नए साइबर खतरों से निपटने में अत्यंत कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आज साइबर खतरे केवल ईमेल या एसएमएस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो और फर्जी वीडियो कॉल के जरिए भी बड़े पैमाने पर अपराध किए जा रहे हैं। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के जरिए इन खतरों से निपटना आसान हो जाएगा।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण

डॉ. अजय सिंह ने चेताया कि अब ऐसे मालवेयर सामने आ रहे हैं जो खुद सीख सकते हैं और अपने आप विकसित होकर सुरक्षा तंत्र को भी चकमा दे सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग की सीमाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डेटा पर हमला कई संगठनों को प्रभावित करता है। ऐसे में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें

संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं और यही समय है जब युवाओं को इसके लिए तैयार किया जाए। उन्होंने छात्रों को कानूनी, फॉरेंसिक और तकनीकी ज्ञान को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों का भी समाधान मिलेगा। आज की तैयारी ही भविष्य के नेतृत्व को तय करेगी।

वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार

डॉ. गोस्वामी ने यह भी कहा कि जटिल विषयों को समझने का तरीका ही उन्हें सरल बनाता है और यही संस्थान का उद्देश्य है। हम अपने छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहे हैं। इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, फेकल्टी डॉ. सपना शर्मा, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. प्रीती, डॉ. कमलेश दुबे, डॉ. नेहा, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्नेहा, डॉ. स्नेहिल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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