Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रपंचायत, फीस वृद्धि और भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन

Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, भ्रष्टाचार, छात्र हितों की उपेक्षा, निष्कासित छात्रों की बहाली और परिसर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों ने छात्रपंचायत आयोजित कर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

Ashutosh Tripathi
Published on: 19 Jun 2026 2:31 PM IST (Updated on: 19 Jun 2026 2:31 PM IST)
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Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, भ्रष्टाचार, छात्र हितों की उपेक्षा, मनमाने निष्कासन और परिसर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों ने छात्रपंचायत का आयोजन कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। छात्र नेताओं और विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई 42 प्रतिशत फीस वृद्धि विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। उनका आरोप है कि बढ़ती फीस के बावजूद छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। छात्रपंचायत में वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।


प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने छात्र हितों की रक्षा करने, निष्कासित छात्रों की वापसी तथा ड्रेस कोड के नाम पर किए जा रहे कथित उत्पीड़न को बंद करने की मांग की। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कुछ मामलों में मनमाने ढंग से कार्रवाई की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों में असंतोष बढ़ रहा है।

छात्रपंचायत में मौजूद छात्रों ने परिसर की बदहाल व्यवस्थाओं, शैक्षणिक संसाधनों की कमी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्राथमिक दायित्व छात्रों को बेहतर शिक्षा और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने की भी बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

छात्रों ने प्रशासन से मांग की कि 42 प्रतिशत फीस वृद्धि तत्काल वापस ली जाए, भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, छात्र हितों की रक्षा की जाए, निष्कासित छात्रों को बहाल किया जाए तथा ड्रेस कोड के नाम पर होने वाले उत्पीड़न को बंद किया जाए।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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