UP Me Aag: योगी सरकार का सेफ्टी ऑडिट, फिर भी क्यों बने हैं स्कूल-अस्पताल चिंता का विषय?

UP Me Aag: आग को लेकर योगी के निर्देश पर सेफ्टी आडिट जारी है, लेकिन जरूरी है आडिट के बाद मजबूत क्रियान्वयन, ताकि दिल्ली हादसा न दोहराया जाए।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 6 Jun 2026 2:42 PM IST
UP Fire
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UP Fire Incidents (Social Media)

UP Me Aag: उत्तर प्रदेश आग लगने की घटनाओं के मामले बहुत अधिक संवेदनशील है। हालांकि यहां झांसी मेडिकल कालेज की आग लगने की बड़ी घटना के अलावा कोई बड़ी घटना नहीं हुई है लेकिन आग की घटनाओं ने स्कूलों, अस्पतालों, होटलों को अपनी जद में लिया है। कई बहुमंजिली इमारतों में आग लगने की छिटपुट घटनाएं भी सामने आई हैं जिसके बाद अग्निशमन विभाग को मजबूत करने के लिए 350 करोड़ के फंड की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों से भी हमारे संवाददाताओं ने इस संबंध में सूचना एकत्र कर भेजी है जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होटलों और बहुमंजिली इमारतों में सेफ्टी आडिट के आदेश दिये हैं।

350 करोड़ की योजना मंजूर

महत्वपूर्ण यह है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 शहरों में हाई-राइज फायर फाइटिंग व्यवस्था मजबूत करने के लिए 350 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है। इसका कारण बहुमंजिला इमारतों में आग की बढ़ती घटनाओं और जोखिम को बताया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह कदम दिल्ली के बड़े होटल में अग्निकांड के बाद उठाया है इसी के तहत पूरे प्रदेश के होटलों और बहुमंजिला इमारतों का विशेष फायर ऑडिट कराने का आदेश दिया है।

अलार्मिंग संकेत

अगर थोड़ा गहराई में जाकर देखें तो हाल के महीनों में नोएडा की ऊंची आवासीय इमारतों और पीजी भवनों में आग की कई घटनाएं सामने आईं हैं। मई 2026 में प्रयागराज के एक होटल में भी आग लगने की भीषण घटना हुई थी। जो कि हालात बहुत अधिक बिगड़ जाने से पहले सचेत हो जाने का संकेत है।

अग्निशमन की मजबूती सबसे जरूरी

लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश फायर सर्विस वर्तमान में 140 से अधिक फायर स्टेशन, 5,500 से अधिक कर्मचारी और 1,000 से अधिक अग्निशमन वाहन हैं जो कि सूबे कि 21 करोड़ आबादी के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के अनुपात में देखें तो औसत एक जिले में लगभग दो फायर स्टेशन का है। एक जिले में सौ से भी कम कर्मचारियों और लगभग 13 वाहनों का है। जबकि अग्निशमन विभाग को आबादी के अनुपात में बहुत मजबूत किये जाने की जरूरत है।

सरकार कर रही मजबूत उपाय

2024 में लागू हुई उत्तर प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज नियमावली में होटलों, बहुमंजिला इमारतों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य संस्थानों के लिए फायर सेफ्टी प्रावधानों को और मजबूत किया गया है। योगी सरकार ने विभाग के आधुनिकीकरण के लिए 1020 नए पदों के सृजन, हाईराइज फायर यूनिट और एक्सप्रेस-वे फायर चौकियों की स्थापना की घोषणा की है, जिससे संकेत मिलता है कि शहरी और बहुमंजिला भवनों में आग की घटनाओं को गंभीर जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले महाकुंभ 2025 के दौरान विभाग ने 45 दिनों में 185 आग की घटनाओं से निपटने की जानकारी दी थी, जिनमें 24 बड़ी घटनाएं थीं।


अस्पतालों के सेफ्टी आडिट की भी जरूरत

वास्तविकता यह है कि 2024 में झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के भीषण अग्निकांड और लखनऊ के केजीएमयू और सरकारी व निजी अस्पतालों में आग लगने की छिटपुट घटनाओं के बाद अस्पतालों की सुरक्षा का सवाल सबसे अहम हो गया है।

लखनऊ में 2025-26 के दौरान कम से कम तीन से चार होटलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार का राज्य के होटलों का विशेष फायर ऑडिट कराने का निर्देश अहम हो जाता है। वर्तमान में होटलों की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी थी।


स्कूल और बच्चों पर भी ध्यान जरूरी

हाईराइज बिल्डिंग्स में हाल के दिनों की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आयी है लेकिन जो छोटी मोटी घटनाएं हुई है वह सुरक्षा के ढांचे पर सवाल जरूर खड़ी करती हैं। स्कूलों में भी आग लगने की छिटपुट घटनाएं हुई हैं, शॉर्ट सर्किट से स्कूल के स्टोर रूम, या मिड-डे मील रसोई से जुड़ी रही हैं। लेकिन निजी स्कूलों को एनओसी देते समय यह ध्यान देने की जरूरत है बच्चों के निकलने का मार्ग बहुत संकरा नहीं होना चाहिए। स्कूलों की दूसरी या तीसरी मंजिल में क्लास रूम में यह ध्यान दिये जाने की विशेष जरूरत है। देखने में आ रहा है कि गली कूचों में तमाम स्कूल चल रहे हैं जहां अग्निशमन के लिए कोई रास्ता ही नहीं है।

अब जागने की बारी

अब जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सभी बहुमंजिला इमारतों, कार्यालयों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का अनिवार्य फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है तो उसमें अस्पतालों और स्कूलों की सुरक्षा को शामिल करना आवश्यक है।योगी आदित्यनाथ की चेतावनी भी है कि आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है इसके बाद नोटिस जारी करने की कार्रवाई होगी। इसके बाद फाइल बंद। लेकिन आग लगती रहेगी। इसलिए अब प्रशासन को जाग जाना चाहिए।

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Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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