UP Politics: 2027 से पहले BJP को झटका! पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी समेत सपा में शामिल, बसपा के

UP Politics: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी कीर्ति कश्यप समेत सपा में शामिल हो गए। बसपा के आबिद अली ने भी अखिलेश यादव का साथ थामा।

Alakha Singh
Published on: 27 Oct 2026 4:45 PM IST (Updated on: 27 Oct 2026 5:10 PM IST)
UP Politics: 2027 से पहले BJP को झटका! पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी समेत सपा में शामिल, बसपा के
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UP Politics 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बिसात बिछने लगी है। अखिलेश यादव ने बीजेपी और बसपा के नेताओं को समाजवादी पार्टी में शामिल कराकर चुनावी मुकाबले का संदेश दे दिया है। बरेली की आंवला लोकसभा सीट से बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी बेटी कीर्ति कश्यप और समर्थकों के साथ सपा का दामन थाम लिया है। वहीं, बसपा के आबिद अली भी अब साइकिल पर सवार हो गए हैं। अखिलेश यादव ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाई। लगातार हो रहे इन दलबदल से यूपी की सियासत में हलचल तेज हो गई है और 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी तथा बसपा के सामने अपने राजनीतिक समीकरण बचाए रखने की चुनौती बढ़ती दिख रही है।

BJP छोड़ सपा में लौटे धर्मेंद्र कश्यप, बेटी कीर्ति की भी एंट्री

बरेली की आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप का सपा में आना इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनका राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। बसपा से राजनीति शुरू करने वाले धर्मेंद्र कश्यप सपा में रहे और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी के टिकट पर उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के नीरज मौर्य ने उन्हें शिकस्त दे दी। इस चुनाव में धर्मेंद्र कश्यप को 15,969 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। अब विधानसभा चुनाव से पहले उनकी सपा में वापसी को बरेली और आसपास के इलाकों में पार्टी के जातीय एवं स्थानीय राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

धर्मेंद्र कश्यप के साथ उनकी बेटी कीर्ति कश्यप ने भी सपा की सदस्यता ली है। कीर्ति के 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो सकती हैं, हालांकि उनकी उम्मीदवारी को लेकर अभी किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी नहीं है।

विधायक से सांसद तक का सफर, फिर सपा में वापसी

धर्मेंद्र कश्यप ने वर्ष 2002 में बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 2007 में सपा के टिकट पर दोबारा विधायक बने। मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री भी बनाया गया।

वर्ष 2009 में उन्होंने सपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन मेनका गांधी के हाथों हार गए। इसके बाद 2013 में बीजेपी में शामिल हुए और 2014 में आंवला से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 2019 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब उन्होंने एक बार फिर सपा का रुख कर लिया है। उनके राजनीतिक सफर में बसपा, सपा और बीजेपी की अदला-बदली यूपी की बदलती चुनावी राजनीति की एक और तस्वीर पेश करती है।

बसपा के आबिद अली भी सपा में शामिल

धर्मेंद्र कश्यप के साथ बसपा नेता आबिद अली का सपा में शामिल होना भी इस राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा है। अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के नेताओं को साथ लाने की सपा की कोशिश को इसी व्यापक रणनीति के तहत देखा जा रहा है।

सपा के लिए ऐसे नेताओं की एंट्री स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूती देने और नए सामाजिक समीकरण तैयार करने का अवसर है। वहीं, बीजेपी और बसपा के लिए चुनौती यह होगी कि नेताओं के पाला बदलने का असर उनके कार्यकर्ताओं और चुनावी समर्थन पर कितना पड़ता है।

एक दिन पहले पूर्व IAS राम बहादुर पासी समेत कई नेता सपा में आए

सपा में नेताओं के शामिल होने का सिलसिला धर्मेंद्र कश्यप और आबिद अली तक सीमित नहीं है। इससे एक दिन पहले, सोमवार को भी अखिलेश यादव ने कई नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। इनमें बसपा छोड़कर आए पूर्व आईएएस राम बहादुर पासी, मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति, बदायूं की बिसौली सीट के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और दातागंज के पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य शामिल थे।

इसके अलावा बदायूं के ब्लॉक प्रमुख कालीचरण उर्फ केसी शाक्य, देवेश कुमार, प्रयागराज के पूर्व विधायक अजय कुमार, सीतापुर की सेवता सीट से बसपा के पूर्व प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्र, शाहजहांपुर के बीजेपी नेता और एफसीआई निदेशक प्रदीप पांडेय, तिलहर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख सौरभ सिंह गांधी तथा अन्य नेताओं ने भी सपा की सदस्यता ली।

अखिलेश यादव ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए दावा किया कि उनके पार्टी में आने से पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक राजनीतिक असर पड़ेगा और समाजवादी पार्टी पहले से ज्यादा सीटें जीतेगी। राम बहादुर पासी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नाम में 'राम' जुड़ने से काम बनेंगे।

2027 से पहले अखिलेश की रणनीति, बीजेपी के लिए क्या संकेत?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं का दल बदलना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक फैसलों तक सीमित नहीं रहता। इसके पीछे स्थानीय प्रभाव, जातीय समीकरण, संगठनात्मक ताकत और टिकट की संभावनाएं जैसे कारक भी अहम होते हैं। लगातार कई नेताओं को सपा में शामिल कराकर अखिलेश यादव पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने और चुनाव से पहले अपना कुनबा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

धर्मेंद्र कश्यप जैसे पूर्व सांसद की वापसी सपा के लिए स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संदेश जरूर है, लेकिन इसका सीधा चुनावी फायदा कितना होगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। इसी तरह कीर्ति कश्यप की संभावित राजनीतिक भूमिका पर भी तस्वीर स्पष्ट होने का इंतजार है।

फिलहाल, 2027 की लड़ाई से पहले यूपी में दलबदल का दौर तेज हो गया है। अब सवाल यह है कि सपा में नेताओं की यह लगातार एंट्री चुनावी वोटों में कितनी तब्दील होती है और बीजेपी-बसपा अपने सियासी आधार को बचाने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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