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Lucknow News: 60 घंटे की बारिश से यूपी में तबाही, 56 मौतें और 1,021 मकान क्षतिग्रस्त, लखनऊ में सितंबर का रिकॉर्ड टूटा
Lucknow News: यूपी में 60 घंटे की बारिश से 56 लोगों की मौत और 1,021 मकान क्षतिग्रस्त हुए। लखनऊ में सितंबर की भारी बारिश से जलभराव और जनजीवन प्रभावित हुआ।
Lucknow News (Image Credit-Social Media)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में करीब 60 घंटे तक चले असाधारण बारिश के दौर ने जनजीवन अस्त-व्यस्त करने के साथ बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। रविवार तक उपलब्ध राज्य सरकार की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार बारिश और उससे जुड़े हादसों में 56 लोगों की मौत हो चुकी है, 46 लोग घायल हुए हैं, 107 पशुओं की जान गई है और 1,021 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस लिहाज से पहले सामने आए 15, 32 अथवा 49 मौतों के आंकड़े अब पुराने हो चुके हैं। राहत आयुक्त कार्यालय की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में 25 और 26 सितंबर के दौरान 56 मौतों की पुष्टि की गई है। प्रदेश में इस अवधि में औसतन 66.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 7.6 मिलीमीटर मानी गई है, यानी सामान्य से करीब 775 प्रतिशत अधिक। इससे एक दिन पहले 24 घंटे के आधार पर राहत आयुक्त कार्यालय ने बारिश को सामान्य से करीब 19 गुना बताया था। इसलिए ‘उत्तर प्रदेश में सामान्य से 19 गुना बारिश’ वाला आंकड़ा पूरे सितंबर या पूरे वर्ष की बारिश का नहीं बल्कि उस समय की 24 घंटे की सामान्य बारिश की तुलना का आंकड़ा है।
ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिले ‘लार्ज एक्सेस’ यानी सामान्य से अत्यधिक अधिक वर्षा की श्रेणी में रहे। जिलावार तुलना में फर्रुखाबाद में बारिश सामान्य से 7,385 प्रतिशत अधिक, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। इससे पहले 24 घंटे की स्थिति के आधार पर फर्रुखाबाद में सामान्य से करीब 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना तथा कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में करीब 130 गुना बारिश होने की जानकारी दी गई थी। यहां भी यह समझना जरूरी है कि ‘200 गुना’ का अर्थ जिले की सामान्य मासिक बारिश से 200 गुना पानी बरसना नहीं है, बल्कि संबंधित 24 घंटे की अवधि में उस तारीख के लिए निर्धारित सामान्य बारिश की तुलना में असाधारण विचलन है। राहत आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद के कार्यालय की शुरुआती रिपोर्ट में 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई थी।
सीतापुर में सर्वाधिक सात मौतें, लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच
बारिश से मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग अखबारों में बड़ा अंतर दिखाई देने की मुख्य वजह रिपोर्टिंग की अलग-अलग समय-सीमा रही। शनिवार को उपलब्ध सरकारी सूचना में पिछले 48 घंटों में 15 मौतें, पांच घायल और 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी थी, जबकि विभिन्न जिलों से स्थानीय संवाददाताओं के आधार पर तैयार खबरों में उसी दौरान 32 से 49 तक मौतों का उल्लेख किया गया। रविवार को राहत आयुक्त कार्यालय की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर बदल गई। इसके मुताबिक 25 और 26 सितंबर की बारिश से संबंधित घटनाओं में कुल 56 मौतें दर्ज की गईं। सीतापुर में सर्वाधिक सात लोगों की जान गई, लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच तथा अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार लोगों की मौत दर्ज की गई। घायलों में हरदोई में सर्वाधिक सात, मैनपुरी और श्रावस्ती में पांच-पांच, बाराबंकी में चार तथा सीतापुर और लखीमपुर खीरी में तीन-तीन लोग शामिल हैं। इस तरह रविवार को उपलब्ध सरकारी आंकड़ा पहले प्रकाशित सभी अंतरिम आंकड़ों से अधिक और फिलहाल सबसे अद्यतन संख्या है।
मौतों की बड़ी वजह सीधे बाढ़ का पानी ही नहीं बल्कि लगातार बारिश से कमजोर हुए कच्चे मकान और दीवारें, पेड़ों का गिरना तथा अन्य वर्षाजनित दुर्घटनाएं बनीं। लखनऊ के बीकेटी क्षेत्र के भौली गांव में शनिवार दोपहर पुराने मकान की छत गिरने से 65 वर्षीय बजरंगी यादव की मौत हो गई। रहीमाबाद के चैना गांव में मकान की दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन लोग मलबे में दब गए, जिन्हें पुलिस और स्थानीय लोगों ने निकालकर अस्पताल पहुंचाया। राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में पेड़ गिरने, मकानों को नुकसान पहुंचने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं भी हुईं। गोरखपुर, अवध, बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में भी मकान, दीवार और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। तेज हवा ने नुकसान और बढ़ाया तथा खेतों में तैयार हो रही फसलों के गिरने से कृषि नुकसान का आकलन भी शुरू करना पड़ा।
1,021 मकान क्षतिग्रस्त, अकेले हरदोई में 272 घरों को नुकसान
बारिश से संपत्ति के नुकसान का आंकड़ा भी शुरुआती रिपोर्ट की तुलना में तेजी से बढ़ा है। शनिवार को राहत आयुक्त कार्यालय ने 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी थी, लेकिन विस्तृत स्थिति रिपोर्ट में यह संख्या बढ़कर 1,021 मकान हो गई। इनमें अकेले हरदोई में 272 मकान क्षतिग्रस्त हुए, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकानों को नुकसान पहुंचा। बारिश के कारण 107 पशुओं की भी मृत्यु दर्ज की गई। पशुहानि में हरदोई सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 28 पशुओं की मौत हुई, इसके बाद सीतापुर में 16, कन्नौज में 14, बहराइच और कानपुर देहात में सात-सात तथा उन्नाव में छह पशुओं की मृत्यु दर्ज की गई। खेतों में खड़ी फसलों, खासकर पकने की ओर बढ़ रहे धान और अन्य खरीफ फसलों को हुए नुकसान का आकलन अभी चल रहा है, इसलिए कृषि नुकसान की अंतिम तस्वीर आने में समय लगेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। जनहानि, मकान क्षति और पशुहानि के मामलों में नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने तथा फसल नुकसान का सर्वे कर पात्र किसानों को राहत देने को कहा गया है। राहत आयुक्त कार्यालय ने भी जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों से संपर्क करने, घायलों के उपचार की व्यवस्था करने और नुकसान का आकलन तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता के अनुसार अग्निशमन सेवा, पीएसी, नागरिक सुरक्षा, होमगार्ड और आपदा राहत से जुड़े कर्मियों को लगाने को कहा गया है।
लखनऊ में बारिश का असाधारण दौर, हनुमान सेतु पर करीब 201 मिलीमीटर पानी
राजधानी लखनऊ में इस दौर की बारिश ने अलग रिकॉर्ड बनाया। शनिवार सुबह तक अमौसी मौसम केंद्र पर 24 घंटे में 135.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि हनुमान सेतु स्थित केंद्र पर करीब 201 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। अलग-अलग रिपोर्टों में हनुमान सेतु का आंकड़ा 200.8 और 201.2 मिलीमीटर बताया गया है, इसलिए इसे लगभग 201 मिलीमीटर कहना अधिक सुरक्षित है। मौसम विभाग से जुड़े आंकड़ों के आधार पर इसे सितंबर में लखनऊ में दर्ज सबसे भारी बारिश के दौर में माना गया है। लगातार बारिश का असर तापमान पर भी पड़ा और अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया। लंबे समय तक बादल, बारिश और तेज हवा के कारण सितंबर के अंतिम सप्ताह में राजधानी में मौसम सामान्य से कहीं अधिक ठंडा महसूस हुआ।
लगातार बारिश ने लखनऊ के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या को गंभीर बनाया। गोमती के बढ़ते जलस्तर और स्थानीय जलनिकासी पर अत्यधिक दबाव के कारण कई आवासीय क्षेत्रों में पानी भर गया। सड़कें जलमग्न होने, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने से यातायात और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। सुशांत गोल्फ सिटी और अर्जुनगंज की ओर भी कई इलाकों में पानी पहुंचा और कुछ घरों से लोगों को सुरक्षित निकालने की जरूरत पड़ी। राजधानी में बारिश का यह दौर केवल सामान्य शहरी जलभराव तक सीमित नहीं रहा, पुराने और कमजोर मकानों तथा पेड़ों के गिरने ने सीधे जान का खतरा पैदा किया।
बंगाल की खाड़ी के गहरे दबाव ने बदला मौसम, पश्चिमी विक्षोभ ने भी बढ़ाया असर
इस असाधारण बारिश के पीछे प्रमुख मौसमी कारण बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव रहा, जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में नमी का जबरदस्त प्रवाह हुआ। इसके साथ अन्य सक्रिय मौसमी प्रणालियों ने परिस्थितियों को और अनुकूल बनाया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों के लिए अत्यधिक भारी वर्षा तथा गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी जारी की थी। 27 सितंबर के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी वर्षा की चेतावनी थी, जबकि 28 सितंबर से चेतावनी का स्तर तेजी से कम होने का अनुमान था। लखनऊ के लिए मौसम विभाग के 26 सितंबर के स्थानीय पूर्वानुमान में भी भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की झोंकेदार हवा की चेतावनी दी गई थी। 27 सितंबर को एक-दो दौर की बारिश के बाद 28 सितंबर से मौसम में उल्लेखनीय सुधार का अनुमान है।
नदियों पर बढ़ा दबाव, नेपाल, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की बारिश भी महत्वपूर्ण
उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति केवल राज्य के भीतर हुई बारिश से नहीं जुड़ी है। प्रदेश की कई बड़ी नदी प्रणालियों के जलग्रहण क्षेत्र नेपाल, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश तक फैले हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर उसका पानी उत्तर प्रदेश में नदी स्तर बढ़ा सकता है। नेपाल से आने वाली घाघरा, राप्ती और अन्य नदियों का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश में पड़ता है, उत्तराखंड की वर्षा गंगा और उसकी सहायक नदियों के प्रवाह को प्रभावित करती है, जबकि मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र की बारिश केन, बेतवा जैसी नदी प्रणालियों पर दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि किसी नदी के ‘खतरे के निशान से ऊपर’ होने का दावा स्टेशन और समय विशेष का होता है, इसलिए इसे पूरे जिले या पूरी नदी पर लागू नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश सरकार की राप्ती बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली भी अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर चेतावनी और खतरे का स्तर अलग-अलग दर्ज करती है। लगातार बारिश के बाद इसलिए राज्य सरकार के सामने स्थानीय जलभराव के साथ नदी आधारित बाढ़ की निगरानी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
‘19 गुना बारिश’ को समझना जरूरी, 48 घंटे का नया आंकड़ा सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक
बारिश की इस घटना में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा ‘सामान्य से 19 गुना’ रहा, लेकिन इसका सही संदर्भ जरूरी है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार शुरुआती 24 घंटे की अवधि में प्रदेश की औसत बारिश उस दिन की सामान्य बारिश की तुलना में करीब 19 गुना रही थी। बाद में तैयार विस्तृत स्थिति रिपोर्ट में 48 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश में औसतन 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि की सामान्य बारिश 7.6 मिलीमीटर थी। यह सामान्य से लगभग 775 प्रतिशत अधिक बैठती है। इसलिए अलग-अलग समय पर जारी दोनों आंकड़े परस्पर विरोधी नहीं हैं, बल्कि अलग समय-अवधियों की तुलना बताते हैं। इसी कारण जिलों में ‘200 गुना’ अथवा ‘160 गुना’ जैसे आंकड़ों को मासिक सामान्य बारिश से जोड़ना गलत होगा।
सितंबर के अंतिम सप्ताह की इस बारिश ने उत्तर प्रदेश के लिए एक साथ तीन चुनौतियां खड़ी की हैं, पहली जान-माल की तत्काल सुरक्षा और राहत, दूसरी नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक सतत निगरानी और तीसरी खेतों में खड़ी खरीफ फसल को हुए नुकसान का सही आकलन। रविवार तक मौतों का आधिकारिक आंकड़ा 56 और क्षतिग्रस्त मकानों की संख्या 1,021 तक पहुंच जाना बताता है कि यह केवल कुछ जिलों में हुई भारी बारिश की घटना नहीं रह गई है, बल्कि प्रदेश के बड़े हिस्से को प्रभावित करने वाली गंभीर मौसमी आपदा बन चुकी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 28 सितंबर से परिस्थितियां सुधरने के संकेत जरूर हैं, लेकिन बारिश का पानी उतरने, कमजोर मकानों और पेड़ों से पैदा खतरे तथा नदियों में ऊपर से आने वाले पानी के कारण वास्तविक राहत मौसम साफ होने के बाद भी कुछ समय लगाकर ही दिखाई देगी।


