TRENDING TAGS :
Mayawati को BJP ने दी सीट तो अखिलेश के PDA के 'D' पर पड़ेगा असर? UP 2027 चुनाव से पहले बड़ा सियासी दांव!
UP Rajya Sabha Elections 2026: अब चर्चा इस बात की शुरू हो गयी है कि क्या BJP अपने कोटे की किसी राज्यसभा सीट के जरिए बहुजन समाज पार्टी और मायावती को राजनीतिक सहायता दे सकती है।
UP Rajya Sabha Elections 2026
UP Rajya Sabha Elections 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर एक नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो चुकी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव निरंतर PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
ऐसे में अब चर्चा इस बात की शुरू हो गयी है कि क्या BJP अपने कोटे की किसी राज्यसभा सीट के जरिए बहुजन समाज पार्टी और मायावती को राजनीतिक सहायता दे सकती है।
राजनीतिक तौर पर इस संभावित रूप से कदम को अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले के दलित हिस्से यानी D पर प्रभाव सालने का पूरा प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इसे एक संभावित रणनीति और राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के माध्यम से करते हैं।
अक्टूबर में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की चर्चा
दिए गए विवरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश कोटे की 10 राज्यसभा सीटों के सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है। इन सीटों पर अक्टूबर में चुनाव होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के हिसाब से BJP के खाते में 8 और समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें जाने की बात कही जा रही है।
यही संख्या बल BJP के सामने एक राजनीतिक विकल्प भी खड़ा करता है। यदि BJP अपने संभावित 8 सीटों के कोटे में से एक सीट पर BSP के उम्मीदवार को समर्थन देती है, तो मायावती की पार्टी को राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बनाए रखने का अवसर मिल सकता है।
यह स्थिति इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि BSP के पास उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल कोई विधायक नहीं है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में अपने दम पर उम्मीदवार उतारना उसके लिए संभव नहीं होगा। दिए गए विवरण के अनुसार, BSP को चुनावी मैदान में उतरने के लिए BJP जैसे बड़े दल के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।
BSP के पास विधानसभा में नहीं है कोई विधायक
देखा जाये तो... मौजूदा वक़्त बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह की असामायिक मौत के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में BSP की संख्या शून्य हो गई है। इसी कारण से राज्यसभा चुनाव में बीएसपी की स्थिति कमजोर हो गई है।
मायावती की पार्टी यदि राज्यसभा में अपना उम्मीदवार भेजना चाहती है तो उसे दूसरे दल के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में BJP की तरफ से समर्थन मिलने की स्थिति BSP के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
यहीं से 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति भी जुड़ती है। यदि BJP BSP के किसी नेता को अपने कोटे की सीट से राज्यसभा भेजने में सहायता करती है, तो इससे दलित राजनीति में एक राजनीतिक संदेश जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
साल 2020 में भी BJP ने BSP की सहायता की थी
इस पूरी चर्चा में साल 2020 का राज्यसभा चुनाव भी याद किया जा रहा है। उस समय भी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें खाली हुई थीं और BSP के पास अपने उम्मीदवार को आसानी से जिताने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं थे।
दिए गए विवरण के अनुसार, BJP ने उस वक़्त 8 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे और सभी जीत गए थे। BJP के पास नौवां उम्मीदवार उतारने की स्थिति होने के बावजूद उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद बीएसपी के रामजीलाल गौतम राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे थे।
इसी पुराने घटनाक्रम के कारण अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या 2026 में भी BJP उसी तरह की रणनीति अपना सकती है। हालांकि, इस बार परिस्थितियां अलग हैं और अभी किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
Akhilesh Yadav के PDA में D यानी दलित की महत्वपूर्ण भूमिका
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव PDA फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं। PDA का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। इस सामाजिक समीकरण में दलित वोट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटें जीती थीं। BJP को 33 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2024 के चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति को लेकर भी काफी चर्चा हुई। चुनावी अध्ययनों में दलित वोट के एक हिस्से के INDIA गठबंधन की तरफ जाने की बात सामने आई थी। एक अध्ययन में साल 2024 के उत्तर प्रदेश चुनाव में 56% गैर-जाटव दलित वोट INDIA गठबंधन और 29% NDA के पक्ष में जाने का अनुमान दिया गया था। वहीं जाटव वोट में BSP का हिस्सा 44% बताया गया था।
मायावती के कमजोर होने के बाद दलित वोट पर निगाह
उत्तर प्रदेश में मायावती और BSP लंबे वक़्त से दलित राजनीति का बड़ा चेहरा रही हैं। लेकिन साल 2024 के लोकसभा चुनाव में BSP उत्तर प्रदेश में एक भी सीट नहीं जीत सकी। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, BSP को 9% से थोड़ा ज्यादा वोट मिले थे।
ऐसे में सपा-कांग्रेस का प्रयास दलित वोट के उस हिस्से को अपने साथ बनाए रखने की रही है जो कि साल 2024 में उनके पक्ष में गया। वहीं BJP के सामने भी 2027 से पहले दलित मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती और प्रयास का मुद्दा है।
यही कारण है कि यदि BJP BSP को राज्यसभा में जगह बनाए रखने में सहायता करती है तो इसे केवल एक राज्यसभा सीट का मामला नहीं माना जाएगा। इसके माध्यम से दलित मतदाताओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने के प्रयास के तौर पर इसे देखा जा सकता है।
क्या मायावती को राज्यसभा सीट देना होगा बड़ा राजनीतिक संदेश?
यदि BJP अपने संभावित कोटे में से एक सीट BSP के उम्मीदवार के लिए छोड़ती है, तो इसका सबसे बड़ा राजनीतिक प्रभाव संदेश के स्तर पर हो सकता है। BJP यह बताने का प्रयास कर सकती है कि मुश्किल राजनीतिक दौर में भी उसने BSP को राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सहायता की।
दूसरी ओर, BSP के लिए यह कदम राज्यसभा में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने का रास्ता खोल सकता है। अभी उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा में BSP की स्थिति कमजोर है। ऐसे में राज्यसभा में पार्टी की मौजूदगी उसके लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम हो सकती है।
2027 से पहले बढ़ेगी दलित वोट की लड़ाई
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन उससे पहले ही सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बेहद तेज हैं। अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटर्स को एक साथ जोड़ने की रणनीति पर आधारित है। वहीं, मायावती की BSP का मुख्य राजनीतिक आधार दलित समाज रहा है।
ऐसे में यदि राज्यसभा चुनाव के दौरान BJP BSP की सहायता करती है तो इससे उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में एक नया संदेश जाने की संभावना पर चर्चा तेज हो सकती है। इससे अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले में D यानी दलित हिस्से को लेकर राजनीतिक बहस और बढ़ सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या साल 2020 की तरह 2026 में भी BJP BSP को राज्यसभा में स्थान दिलाने के लिए अपने संभावित कोटे की एक सीट छोड़ने का निर्णय करेगी। अब इसका जवाब चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारों के ऐलान के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की ये 10 सीटें उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बन सकती हैं।


