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योगी सरकार का किसानों को तोहफा, 15 अक्टूबर से भूमि विवादों के निपटारे के लिए चलेगा विशेष अभियान
Lucknow: यूपी में योगी सरकार 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाएगी। चकबंदी, उत्तराधिकार और नामांतरण के लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण होगा।
Lucknow: उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया में तेजी लाने और किसानों को भूमि विवादों से राहत दिलाने के लिए योगी सरकार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। वर्षों से लंबित चकबंदी मामलों के निस्तारण के साथ निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण से जुड़े प्रकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए प्रदेश में 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने संबंधित अधिकारियों को लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया गया है।
8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी
प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को गति देने के प्रयासों के बीच आठ जिलों के 11 गांवों में चकबंदी का कार्य पूरा किया गया है। सरकार का जोर है कि किसानों को उनकी भूमि से जुड़े विवादों से राहत मिले और चकबंदी की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी की जा सके।
चकबंदी के दौरान भूमि के बंटवारे, अभिलेखों में दर्ज विवरण और भूखंडों से जुड़े विवादों के निस्तारण का किसानों के हितों पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पुराने मुकदमों के निस्तारण पर विशेष जोर
चकबंदी आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चकबंदी न्यायालयों में तीन साल से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। इसके साथ ही वर्षों से लंबित अन्य मामलों की समीक्षा कर उनके समाधान के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो। इसके लिए चकबंदी न्यायालयों के कामकाज और संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके।
लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी
चकबंदी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। निर्देशों के अनुसार, लंबित मामलों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। अभियान के दौरान निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों को भी प्राथमिकता से निपटाने पर जोर रहेगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी को कम करना, राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त करना और किसानों को लंबे समय से चल रहे विवादों से राहत दिलाना है।
15 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह विशेष अभियान 15 नवंबर तक चलेगा। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिला स्तर पर अधिकारी कितनी तेजी से लंबित प्रकरणों का निस्तारण करते हैं और किसानों को भूमि संबंधी समस्याओं से कितनी राहत मिलती है।


