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बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए योगी सरकार की नई पहल, 395 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंची टीमें
Sambhav 6.0 Campaign UP: यूपी में संभव 6.0 अभियान के तहत 26 जिलों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग की गई। बच्चों के पोषण, वजन और लंबाई की जांच के साथ सेवाओं की गुणवत्ता परखी गई।
yogi aditya nath
Sambhav 6.0 Campaign UP: उत्तर प्रदेश में कुपोषण की रोकथाम और बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार के लिए योगी सरकार के संभव 6.0 अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की कवायद तेज हो गई है। इसके तहत बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग और यूनिसेफ की राज्य एवं मंडलीय टीमें लगातार क्षेत्रीय अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कर रही हैं। इन टीमों के जरिए अभियान की प्रगति, पोषण सेवाओं की गुणवत्ता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। अब तक प्रदेश के 26 जनपदों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों का अनुश्रवण किया जा चुका है।
395 आंगनबाड़ी केंद्रों पर परखी गई पोषण सेवाओं की गुणवत्ता
क्षेत्रीय अनुश्रवण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के वजन और लंबाई-ऊंचाई की माप, उनकी वृद्धि की निगरानी, संभव 6.0 अभियान की गतिविधियों और माइक्रोप्लान के क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया गया। इस दौरान अधिकांश केंद्रों पर वृद्धि निगरानी के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध मिले। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मापन संबंधी व्यावहारिक दक्षता भी सामान्यतः अच्छी पाई गई।
26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर
प्रदेश के 26 जिलों में किए गए आकलन के दौरान अधिकांश जनपदों में आईसीडीएस, स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी भी सकारात्मक पाई गई। जनपद स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही नियमित समीक्षा बैठकों, प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण के माध्यम से अभियान को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
आगरा, एटा और फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा
यूनिसेफ की राज्य स्तरीय टीम के डॉ. सन्दीप सेठ ने हाल ही में आगरा, एटा और फिरोजाबाद में क्षेत्रीय अनुश्रवण किया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर संभव 6.0 अभियान की गतिविधियों और बच्चों की वृद्धि निगरानी की स्थिति देखी गई। टीम ने अधिकारियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं से संवाद भी किया। साथ ही अभियान के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जरूरी तकनीकी सुझाव दिए।
दस्तावेजीकरण और प्रशिक्षण पर दिया जाएगा जोर
बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि क्षेत्रीय अनुश्रवण के दौरान कुछ स्थानों पर गतिविधियों का संचालन बेहतर मिला, लेकिन दस्तावेजीकरण को और मजबूत करने की जरूरत सामने आई है।
उन्होंने बताया कि माइक्रोप्लान, बैठक की कार्यवाही, फील्ड विजिट और एक्शन टेकन रिपोर्ट को व्यवस्थित तरीके से रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए भी प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें वृद्धि निगरानी उपकरण (जीएमडीएस), संभव 6.0 अभियान और गंभीर कुपोषण (एसएएम) की पहचान एवं प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण शामिल हैं।


