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यूपी के 11 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं में आधे को नहीं मिलेगी कॉलर की पहचान, अधूरी रह गई नई सुविधा
Lucknow News: यूपी के 48 जिलों में CNAP सेवा पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। करीब 5.5 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं को अनजान कॉल पर नाम देखने की सुविधा नहीं मिल रही।
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Lucknow News: मोबाइल फोन पर अनजान नंबर से आने वाली कॉल की पहचान बताने के लिए केंद्र सरकार की नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश में पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। दूरसंचार विभाग ने एक नवंबर 2026 से देशभर में 'कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन' (सीएनएपी) सेवा शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके तहत किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर फोन करने वाले व्यक्ति का दूरसंचार कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखाई देना चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्वी दूरसंचार परिमंडल के 48 जिलों में यह व्यवस्था अभी अधूरी है। विभागीय आकलन के अनुसार, परिमंडल के लगभग 11 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं में करीब आधे को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है। यानी लगभग साढ़े पांच करोड़ उपभोक्ताओं के लिए अनजान नंबर से आने वाली कॉल की पहचान अब भी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, प्रभावित उपभोक्ताओं की यह संख्या प्रारंभिक विभागीय अनुमान पर आधारित है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है।
एक नवंबर से लागू हुआ नियम, लेकिन तकनीकी बाधाएं बरकरार
दूरसंचार विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में सभी अधिकृत टेलीकॉम कंपनियों को एक नवंबर से 4जी और उससे उन्नत मोबाइल नेटवर्क पर सीएनएपी सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। कंपनियों को यह सुविधा अपने स्तर पर सक्रिय करनी है। इसके लिए उपभोक्ताओं को अलग से आवेदन करने या कोई अतिरिक्त ऐप डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनेक मोबाइल नंबरों पर कॉल करने वाले का नाम दिखाई नहीं दे रहा है। इसके पीछे तकनीकी अनुकूलता, कंपनियों के बीच डेटा के आदान-प्रदान और ग्राहक पहचान रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याएं संभावित कारण हैं। विभाग की ओर से इनकी जांच कराई जा रही है। दूरसंचार विभाग के पूर्वी परिक्षेत्र के अपर महानिदेशक मनीष कुमार के अनुसार, जिन नंबरों से आने वाली कॉल पर नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है, उनका परीक्षण कराया जा रहा है। समस्या का कारण स्पष्ट होने के बाद आवश्यक सुधार किए जाएंगे। 
अब अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखाई देगा पंजीकृत नाम
सीएनएपी व्यवस्था की खासियत यह है कि इसमें कॉल करने वाले का नाम टेलीकॉम कंपनी के ग्राहक पहचान रिकॉर्ड से प्राप्त किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति का नंबर पहले से मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सुरक्षित है तो वही नाम दिखाई देगा, जिससे नंबर सुरक्षित किया गया है। लेकिन नंबर सुरक्षित नहीं होने पर सेवा उपलब्ध रहने की स्थिति में मोबाइल स्क्रीन पर संबंधित टेलीकॉम कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज नाम प्रदर्शित होगा। व्यावसायिक कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी विशेष सुविधा दी गई है। वे आवश्यक सत्यापन के बाद अपने पंजीकृत ट्रेडमार्क या जीएसटी रिकॉर्ड में दर्ज व्यापारिक नाम को प्रदर्शित करवा सकेंगे। विदेश से आने वाली कॉल पर 'इंटरनेशनल कॉल' की पहचान दिखाई जाएगी। वहीं नियमानुसार कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन (सीएलआईआर) सुविधा लेने वाले उपभोक्ताओं का नाम प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। 
2जी, 3जी और लैंडलाइन उपभोक्ताओं को अभी करना होगा इंतजार
नई व्यवस्था की एक बड़ी सीमा यह है कि इसे फिलहाल 4जी और 5जी नेटवर्क के लिए लागू किया गया है। 2जी, 3जी और पारंपरिक लैंडलाइन नेटवर्क को शुरुआती आदेश के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इनके लिए सेवा शुरू करने पर अलग से विचार किया जाएगा। इस कारण पुराने नेटवर्क पर निर्भर रहने वाले उपभोक्ताओं को अभी नाम पहचानने की नई सुविधा नहीं मिलेगी। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि प्रत्येक पुराने मोबाइल फोन को इस सुविधा से स्थायी रूप से बाहर कर दिया गया है। सुविधा का मिलना इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क, मोबाइल की तकनीकी क्षमता और दूरसंचार कंपनी द्वारा किए गए कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा। कंपनियों के लिए अलग-अलग नेटवर्क पर सेवा को सुचारु रूप से उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण चुनौती है। 
साइबर ठगी रोकने में मददगार, लेकिन नाम दिखाई देना सुरक्षा की गारंटी नहीं
नई व्यवस्था लागू करने का प्रमुख उद्देश्य अनजान कॉल करने वालों की पहचान आसान बनाना और अवांछित कॉल से होने वाली परेशानी कम करना है। देश में फर्जी बैंक अधिकारी, केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर ठगी करने वाले, ओटीपी मांगने वाले और डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर रकम वसूलने वाले साइबर अपराधियों की गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। सीएनएपी से उपभोक्ताओं को कॉल उठाने से पहले सामने वाले की पहचान का एक अतिरिक्त संकेत मिलेगा। हालांकि, केवल स्क्रीन पर नाम दिखाई देने से यह प्रमाणित नहीं हो जाता कि कॉल करने वाला व्यक्ति भरोसेमंद है। किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर प्राप्त सिम, गलत ग्राहक रिकॉर्ड या तकनीकी माध्यमों से कॉलिंग नंबर की पहचान में हेरफेर जैसी स्थितियों में धोखाधड़ी की आशंका बनी रह सकती है। इसलिए बैंक खाते, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान कॉल करने वाले को नहीं देनी चाहिए।
दो साल की तैयारी के बाद भी अधूरी व्यवस्था
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 23 फरवरी 2024 को सीएनएपी सेवा लागू करने की सिफारिश की थी। इसके बाद तकनीकी परीक्षण और विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श का सिलसिला चला। अक्टूबर 2025 में ट्राई ने दूरसंचार विभाग की ओर से मांगे गए पुनर्विचार पर भी अपना जवाब दिया। अंततः 13 अक्टूबर 2026 को सरकार ने सेवा शुरू करने का औपचारिक आदेश जारी किया। टेलीकॉम कंपनियों को कॉल करने वाले उपभोक्ताओं के नाम और फोन नंबर का सुरक्षित डेटाबेस तैयार करने तथा गलत नाम प्रदर्शित होने जैसी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामने आई शुरुआती समस्याएं बताती हैं कि आदेश जारी करना और करोड़ों मोबाइल कनेक्शनों पर तकनीक को सफलतापूर्वक लागू करना दो अलग चुनौतियां हैं। अब देखना होगा कि दूरसंचार कंपनियां कितनी जल्दी इन बाधाओं को दूर करती हैं और उपभोक्ताओं को यह सुविधा पूरी तरह उपलब्ध हो पाती है।


