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केजीएमयू धर्मांतरण केस में नए खुलासे, सांस्कृतिक कार्यक्रम से महिला डॉक्टरों को फंसाने का आरोप
KGMU Conversion Case: केजीएमयू धर्मांतरण केस की जांच में नए आरोप सामने आए हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिला डॉक्टरों से नजदीकी, नशीला पेय पिलाकर शोषण और ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच कई संस्थानों तक पहुंची।
फोटो-सोशल मीडिया
KGMU Conversion Case: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में महिला डॉक्टरों के कथित यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण के मामले में पुलिस के आरोपपत्र और एसटीएफ की जांच से नए आरोप सामने आए हैं। मुख्य आरोपी पूर्व रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन उर्फ रमीज मलिक पर विश्वविद्यालय के वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रेप्सोडी’ को महिला डॉक्टरों से नजदीकियां बढ़ाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप है। कुछ छात्राओं ने नशीला पेय पिलाकर यौन शोषण करने और निजी वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने की शिकायत की है। पुलिस के आरोपपत्र में रमीज के माता-पिता और उसके एक सहयोगी की कथित भूमिका भी शामिल है। दूसरी ओर, एसटीएफ की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ डॉक्टरों के अन्य मेडिकल संस्थानों और धार्मिक प्रचार से जुड़े व्यक्तियों के साथ संपर्कों की भी जांच हो रही है। शासन ने केजीएमयू प्रशासन को रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जांच रिपोर्ट में दर्ज सभी आरोप अभी न्यायिक रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं। 
रेप्सोडी की तैयारियों में मदद के बहाने बढ़ाता था नजदीकियां
केजीएमयू में दिसंबर के दौरान आयोजित होने वाला वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम रेप्सोडी तीन से चार दिन चलता है। इसमें नृत्य, संगीत, नाटक, कविता, फैशन शो और खेल प्रतियोगिताओं सहित लगभग 30 से 40 कार्यक्रम होते हैं। तैयारियां करीब डेढ़ महीने पहले शुरू हो जाती हैं। विश्वविद्यालय के कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों के अनुसार, रमीज कार्यक्रम के आयोजन, फंड जुटाने, सामान खरीदने और दूसरी व्यवस्थाओं में सहयोग करता था। आरोप है कि इसी दौरान वह नई महिला रेजिडेंट डॉक्टरों से परिचय बढ़ाता और बाद में देर रात तक चलने वाले आयोजनों में उनके करीब आने की कोशिश करता था। कुछ छात्राओं ने कार्यक्रमों के बाद यौन शोषण किए जाने के आरोप भी लगाए हैं। पिछले वर्ष के आयोजन में कई महिला डॉक्टरों के साथ दुष्कर्म होने का दावा भी सामने आया है, लेकिन इन कथित घटनाओं की संख्या, पीड़िताओं की पहचान और स्वतंत्र साक्ष्यों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 
नशीला पेय, निजी वीडियो और गर्भपात के आरोप
पुलिस के आरोपपत्र के अनुसार, आगरा में मेडिकल पढ़ाई के दौरान एक महिला से रमीज की नजदीकी हुई थी। महिला का आरोप है कि उसे नशीला पेय पिलाकर यौन हिंसा की गई और बाद में शादी का भरोसा देकर संबंध बनाए रखे गए। इस दौरान निजी तस्वीरें तथा वीडियो तैयार कर उन्हें ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया गया। महिला ने गर्भपात कराने, पढ़ाई छुड़वाने, परिवार से दूर करने और धर्म परिवर्तन का दबाव डालने की शिकायत भी की है। जांच में एक अन्य महिला डॉक्टर का बयान सामने आया, जिसने इसी तरह की प्रताड़ना का आरोप लगाया। दोनों महिलाओं ने मानसिक उत्पीड़न और धमकियों की बात कही है। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच में शामिल किए हैं। चौक पुलिस ने फरवरी 2026 में करीब 250 पृष्ठों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। 
माता-पिता और निकाह के गवाह की भूमिका पर भी आरोप
मामले में रमीज के पिता सलीमुद्दीन, मां खतीजा और निकाह के कथित गवाह शारिक खान को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों की कथित भूमिका महिला डॉक्टरों पर दबाव बनाने, धर्मांतरण और निकाह से संबंधित प्रक्रियाओं में सहायता करने की रही है। एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसे धार्मिक त्योहार मनाने से रोका गया, घरेलू काम करने के लिए मजबूर किया गया और विरोध करने पर शारीरिक यातनाएं दी गईं। पिता पर बोतल फेंककर मारने तथा मां पर गर्म प्रेस से जलाने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोपपत्र में दोनों पीड़िताओं को गंभीर मानसिक प्रताड़ना दिए जाने का उल्लेख है। पुलिस ने संबंधित मोबाइल और लैपटॉप से मिले साक्ष्यों को मुकदमे का हिस्सा बनाया है। इन आरोपों की अंतिम सत्यता अदालत में निर्धारित होगी। 
दो डॉक्टरों के जाकिर नाईक से संपर्क का दावा, दूसरे संस्थान भी जांच के दायरे में
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी में केजीएमयू से जुड़े दो चिकित्सकों के विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाईक के सीधे संपर्क में होने का दावा किया गया है। आरोप है कि कुछ सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से उनके भाषण और धार्मिक विचारों से जुड़ी सामग्री साझा की जाती थी। इन समूहों से नए विद्यार्थियों को जोड़ने तथा कुछ स्थानों पर धार्मिक सभाएं आयोजित करने की जानकारी भी सामने आई है। जांच का दायरा संजय गांधी पीजीआई और अन्य मेडिकल संस्थानों से जुड़े कुछ लोगों तक बढ़ने की बात कही गई है। हालांकि, सीधे संपर्क, किसी अवैध गतिविधि में भागीदारी और धर्मांतरण की कथित साजिश के बीच संबंध अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है। केवल धार्मिक विचार साझा करना या किसी समूह की सदस्यता अपने आप आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। 
एटीएस के आरोपी से कथित संपर्क और बैंक खातों की जांच
इस मामले में रमीज के संपर्कों को लेकर आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के एक अन्य मामले में गिरफ्तार मोहम्मद रजा का नाम भी सामने आया है। रजा पर धार्मिक नेताओं की हत्या की साजिश तथा अन्य गंभीर गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। जांच एजेंसियां दोनों के बीच संभावित संपर्क, यात्रा विवरण और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। रमीज के पिता के बैंक खातों में कथित संदिग्ध लेनदेन की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, दोनों आरोपियों के बीच किसी संगठित आपराधिक साजिश, धन के आदान-प्रदान या संयुक्त गतिविधि का निर्णायक प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए संपर्क की जांच को अपराध में साझेदारी का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन पर सवाल
केजीएमयू के यूनिवर्सिटी एनवायरनमेंट विभाग में आउटसोर्सिंग से नियुक्त 37 सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें 21 मुस्लिम कर्मचारी हैं और 15 कर्मचारी असम के निवासी बताए गए हैं। इनके दस्तावेजों में एक ही जिले का पता होने की बात सामने आई है। जांच का विषय यह होना चाहिए कि भर्ती निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं, कर्मचारियों का पहचान सत्यापन किया गया था या नहीं और किसी अधिकारी ने नियुक्ति प्रक्रिया को अनुचित तरीके से प्रभावित किया था या नहीं। केवल किसी कर्मचारी का धर्म, मूल राज्य या एक ही जिले का निवासी होना अनियमित नियुक्ति अथवा अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है।
छुट्टियों और शिकायतों में भेदभाव के आरोप
एसटीएफ रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों के प्रशासनिक व्यवहार पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टियां मंजूर करने में धार्मिक आधार पर भेदभाव किया जाता था। एक रेजिडेंट डॉक्टर ने परिवार में मृत्यु होने पर छुट्टी मांगने के दौरान अपमानजनक टिप्पणी किए जाने की शिकायत की है। पैथोलॉजी विभाग से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. सुरेश बाबू पर भी कथित रूप से आरोपी रमीज का पक्ष लेने, पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेने और समझौते का दबाव बनाने के आरोप हैं। हालांकि, संबंधित चिकित्सक की विभागीय जवाबदेही तय करने से पहले उनके स्पष्टीकरण, शिकायतों के रिकॉर्ड और संबंधित गवाहों के बयानों की जांच आवश्यक होगी।
छह नवंबर की बैठक में तय होगी विभागीय कार्रवाई की दिशा
एसटीएफ ने 25 अगस्त 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। इसके आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 30 अक्टूबर को केजीएमयू प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट में करीब एक दर्जन चिकित्सकों और कर्मचारियों की प्रत्यक्ष अथवा कथित संरक्षण संबंधी भूमिका का उल्लेख है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने छह नवंबर को कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलाई है। इसमें अनुशासनात्मक जांच समितियों के गठन और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने पर निर्णय किया जाना है। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, रिपोर्ट में उल्लिखित सभी आरोपों की नियमानुसार जांच की जाएगी। 
इस प्रकरण में दो स्तरों पर कार्रवाई की आवश्यकता सामने आई है। पहला, महिला डॉक्टरों के कथित यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण से जुड़े आपराधिक आरोपों की न्यायिक जांच। दूसरा, विश्वविद्यालय में शिकायतों के निस्तारण, विद्यार्थियों की सुरक्षा, नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा। छह नवंबर की कार्यपरिषद बैठक से स्पष्ट होगा कि एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर किन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध औपचारिक विभागीय जांच आगे बढ़ती है।


