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लखनऊ: शिक्षा मंत्री आवास पर शिक्षक अभ्यर्थियों ने किया सुंदरकांड पाठ, पुलिस से तीखी झड़प
Lucknow News: लखनऊ में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर सुंदरकांड पाठ किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प हुई।
इमेज क्रेडिट-आशुतोष त्रिपाठी
Lucknow News: एक तरफ जहां पूरा प्रदेश महानवमी के पावन पर्व पर पूजन-अर्चन में लीन है, वहीं लखनऊ की सड़कों पर वर्षों से हक की बाट जोह रहे शिक्षक अभ्यर्थियों का आक्रोश फूट पड़ा। सोमवार को 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। शासन-प्रशासन की ‘सद्बुद्धि’ के लिए अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास के बाहर ही बैठकर सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को जबरन हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।
सुंदरकांड पाठ कर मांगी 'सद्बुद्धि', गूंजे आरक्षण विरोधी नारे
मंत्री आवास के बाहर डेरा जमाए अभ्यर्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर "ऐसी क्या मजबूरी है—आरक्षण की चोरी है" और "पिछड़ा आयोग ने माना है—आरक्षण घोटाला है" जैसे नारे लगाते हुए विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे आठ साल से भटक रहे हैं, इसलिए अब वे ईश्वर से सरकार और आला अधिकारियों की सद्बुद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं ताकि उन्हें उनका जायज हक और नियुक्ति मिल सके।
पुलिस पर अभद्रता और कपड़े फाड़ने के गंभीर आरोप
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और अभ्यर्थियों को हटाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिसकर्मियों और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बर्बरता दिखाते हुए उनके साथ बदसलूकी की, कपड़े फाड़ दिए और कई अभ्यर्थियों को घसीटते हुए गाड़ियों में भरकर जबरन इको गार्डन धरना स्थल भेज दिया।
मंत्री और अधिकारी भी मान चुके हैं घोटाला
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के साथ आला अधिकारियों की मौजूदगी में उनकी बैठक हुई थी। तूफान सिंह का आरोप है, "उस बैठक में दोनों मंत्रियों और विभाग के बड़े अधिकारियों ने खुद माना था कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और घोटाला हुआ है। जब राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी आरक्षण में धांधली की बात स्वीकार कर नियमों के पालन का आदेश दिया है, तो फिर सरकार रोजगार देने से क्यों बच रही है?
8 साल से चप्पल घिस रहे हैं, त्योहार के दिन सड़क पर बैठना दुर्भाग्यपूर्ण
प्रदर्शनकारी आशुतोष वर्मा ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वर्ष 2018 में यह भर्ती निकली थी, तभी फॉर्म भरा था। तब से लेकर आज तक 8 साल बीत गए, लेकिन सिर्फ नौकरी की उम्मीद में चप्पलें घिस रहे हैं। आशुतोष ने भावुक होते हुए कहा, "आज नवमी के दिन लोग अपने परिवारों के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं, लेकिन हम सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं। हमें यहां से उठाकर इको गार्डन में बंद कर दिया जाएगा और हमारा पूरा पवित्र दिन वहीं बीत जाएगा। त्योहार के दिन ऐसा प्रदर्शन करना बेहद दुखद है, लेकिन व्यवस्था ने हमें मजबूर कर दिया है।" अभ्यर्थियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए उन्हें न्यायसंगत नियुक्ति नहीं मिल जाती, उनका आंदोलन थमेगा नहीं।


