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दिवाली पर बाजारों में रौनक, महंगाई के बावजूद लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और पटाखों की जमकर खरीदारी
Lucknow News: लखनऊ में दिवाली पर बाजारों में रौनक रही। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, दीयों और ग्रीन पटाखों की जमकर खरीदारी हुई। पिछले साल के मुकाबले पटाखे 15 से 25 फीसदी तक महंगे रहे।
दिवाली पर बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ (इमेज क्रेडिट-आशुतोष त्रिपाठी)
Lucknow News: रोशनी और उल्लास के महापर्व दिवाली पर इस साल बाजारों में खरीदारी का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। धनतेरस के बाद से शुरू हुआ खरीदारी का सिलसिला छोटी दिवाली और मुख्य पर्व तक चरम पर पहुंच गया। घरों में समृद्धि और शांति की कामना के लिए जहां श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियों व पूजन सामग्री की खूब खरीदारी की, वहीं शाम होते-होते पटाखा बाजारों में आतिशबाजी के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मिट्टी व इको-फ्रेंडली मूर्तियों की रही भारी मांग
बाजारों में सुबह से ही लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की दुकानों पर खरीदारों का तांता लगा रहा। इस बार पारंपरिक मिट्टी की कलात्मक मूर्तियों के अलावा टेराकोटा और इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की सर्वाधिक मांग रही। पूजा के लिए खील-बताशे, मिट्टी के दीये, वंदनवार और सजावटी सामानों की भी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई।
फुलझड़ी से लेकर स्काईशॉट तक की रही बहार
सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण नियमों के तहत इस साल बाजारों में प्रमाणित ग्रीन पटाखों की विभिन्न किस्में उपलब्ध रहीं। आतिशबाजी के शौकीनों ने अपनी पसंद के अनुसार जमकर खरीदारी की। बच्चों और परिवारों की पहली पसंद पारंपरिक फुलझड़ी, जमीन पर घूमने वाली चकरी, विभिन्न ऊँचाइयों तक फव्वारा छोड़ने वाले अनार की भारी मांग थी
एरियल व फैंसी आतिशबाजी
आसमान में जाकर बहुरंगी रोशनी बिखेरने वाले मल्टी-कलर स्काईशॉट की जबरदस्त मांग रही। इसके अलावा पैराशूट क्रैकर्स, म्यूजिकल रॉकेट्स और कलर-स्मोक फाउंटेन युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहे। ध्वनि प्रदूषण से बचाव के लिए लोगों ने तेज धमाके वाले पटाखों की जगह रोशनी और चमक पैदा करने वाले पटाखों को प्राथमिकता दी।
पिछले साल की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक महंगे हुए पटाखे
इस बार त्योहार पर महंगाई का असर पटाखा बाजार पर साफ देखने को मिला। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल पटाखों के दामों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दुकानदारों के अनुसार, पटाखों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की बढ़ती लागत, परिवहन खर्च में वृद्धि और सख्त पर्यावरण मानकों के कारण निर्माण लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ा। उदाहरण के तौर पर, जो स्काईशॉट का बॉक्स पिछले साल 500 से 600 रुपये में मिल रहा था, वह इस बार 700 से 800 रुपये तक बिका। इसी तरह सामान्य अनार और फुलझड़ी के पैकेट पर भी 20 से 40 रुपये तक का इजाफा देखा गया।
महंगाई पर भारी पड़ा त्योहार का उल्लास
कीमतों में उछाल के बावजूद खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। ग्राहकों का कहना था कि दिवाली साल में एक बार आती है, इसलिए बजट थोड़ा बढ़ाकर ही सही, परंपरा और बच्चों की खुशी के लिए खरीदारी जरूर की गई। देर रात तक बाजारों में रौनक बनी रही और व्यापारियों के चेहरे भी अच्छी बिक्री से खिल उठे।


