करवा चौथ पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का संयोग, जानें कब निकलेगा चांद?

Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को करवा चौथ पर लक्ष्मी नारायण राजयोग और परिघ योग का संयोग रहेगा। लखनऊ में शाम 5:26 से 6:43 बजे तक पूजा मुहूर्त और रात 8:06 बजे चंद्रोदय होगा।

Newstrack Network
Published on: 28 Oct 2026 11:11 PM IST
करवा चौथ पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का संयोग, जानें कब निकलेगा चांद?
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फोटो-सोशल मीडिया

Karwa Chauth 2026: पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिनें गुरुवार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखेंगी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व की तैयारियों से राजधानी के बाजारों और घरों में उत्सव का माहौल है। कहीं महिलाएं सोलह श्रृंगार के लिए साड़ियां, चूड़ियां और गहने खरीद रही हैं तो कहीं मेहंदी लगवाने और सामूहिक पूजा की तैयारियां चल रही हैं। इस बार करवा चौथ पर ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार लक्ष्मी नारायण राजयोग और परिघ योग का संयोग रहेगा। लखनऊ में शाम 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 43 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। रात 8 बजकर 6 मिनट पर चंद्रमा उदय होने का अनुमान है। महिलाएं दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भगवान गणेश, माता गौरी और करवा माता की विधि-विधान से पूजा करेंगी। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देंगी और परिवार की परंपरा के अनुसार पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलेंगी। 

रात 1:06 बजे शुरू होगी चतुर्थी, शाम को मिलेगा 77 मिनट का पूजा मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार वैदिक पंचांग की गणना में चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। करवा चौथ का व्रत चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि होने के आधार पर किया जाता है। इसीलिए गुरुवार को व्रत रखा जाएगा। लखनऊ में सूर्योदय सुबह लगभग 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। इस हिसाब से सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत की अवधि लगभग 13 घंटे 52 मिनट रहेगी। शाम 5:26 से 6:43 बजे के बीच पूजा के लिए 77 मिनट का शुभ समय मिलेगा। इस दौरान महिलाएं पूजा की थाली सजाकर करवा चौथ की कथा सुनेंगी और भगवान गणेश, माता गौरी तथा करवा माता की आराधना करेंगी। 

इस वर्ष करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र सुबह लगभग 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष में शुक्र को वैवाहिक सुख, सौंदर्य और समृद्धि तथा बुध को बुद्धि और संवाद से जोड़ा जाता है। हालांकि ग्रहों और योगों से मिलने वाले फल ज्योतिषीय आस्था तथा परंपरागत व्याख्या का विषय हैं। पंचांग में परिघ योग का उल्लेख है, जिसे विभिन्न ज्योतिषीय परंपराओं में अलग-अलग दृष्टि से देखा जाता है। 

रात 8:06 बजे निकलेगा चांद, दर्शन के बाद खुलेगा व्रत

करवा चौथ पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा को शीतलता, मन और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। व्रती महिलाएं शाम को पूजा करने के बाद चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्रमा दिखाई देने पर छलनी से उसके दर्शन करने, जल से अर्घ्य देने और उसके बाद पति का चेहरा देखने की परंपरा अनेक परिवारों में प्रचलित है। इसके पश्चात पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत समाप्त किया जाता है। कुछ घरों में व्रत खोलने के बाद विशेष भोजन तैयार किया जाता है, जबकि कुछ परिवारों में सास को बायना देने तथा बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की परंपरा भी है।

लखनऊ में गुरुवार को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:06 बजे है। हालांकि चंद्रमा के उदय होने और उसके प्रत्यक्ष दिखाई देने में मौसम, बादलों तथा आसपास की ऊंची इमारतों के कारण कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए महिलाएं चंद्र दर्शन के लिए स्थानीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखेंगी। यह समय लखनऊ के लिए है। प्रदेश के अन्य शहरों में चंद्रोदय का समय अलग हो सकता है। 

पहला करवा चौथ, शादी के लहंगे और चुनरी में सजेंगी डॉ. सूर्याशी

करवा चौथ को लेकर नवविवाहिताओं में विशेष उत्साह है। इंदिरानगर निवासी डॉ. सूर्याशी शर्मा की शादी इसी वर्ष जुलाई में हुई थी। गुरुवार को वह पहली बार करवा चौथ का व्रत रखेंगी। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए उन्होंने शादी का लहंगा और चुनरी पहनने की तैयारी की है। उनका कहना है कि विवाह के बाद पहला करवा चौथ होने के कारण इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह है। वह मेहंदी लगवाएंगी और शाम को परंपरागत विधि से पूजा करेंगी। साथ ही पति की ओर से मिलने वाले सरप्राइज उपहार का भी उन्हें इंतजार है। डॉ. सूर्याशी की तरह राजधानी में अनेक नवविवाहिताएं पहले करवा चौथ को लेकर उत्साहित हैं। कोई अपनी शादी की साड़ी निकाल रही है तो कोई परिवार की बुजुर्ग महिलाओं से व्रत और पूजा की विधि समझ रही है।

जन्मदिन पर मिले सोने के ईयररिंग, अब उपहार से अधिक साथ रहने की खुशी

करवा चौथ को लेकर महिलाओं की तैयारियां और अपेक्षाएं अलग-अलग हैं। स्मिता अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में उनके जन्मदिन पर पति ने सोने के ईयररिंग उपहार में दिए थे। इसलिए इस बार करवा चौथ पर अलग से किसी उपहार की विशेष उम्मीद नहीं है। उनके लिए परिवार के साथ पर्व मनाना और परंपराओं को निभाना अधिक महत्वपूर्ण है। करवा चौथ पर उपहार देने की परंपरा ने भी पिछले कुछ वर्षों में नया रूप लिया है। साड़ी, गहने और श्रृंगार सामग्री के साथ अब महिलाएं और उनके पति अपनी पसंद के अनुसार उपहार चुनते हैं। हालांकि अनेक परिवारों में करवा चौथ की असली पहचान आज भी पूजा, व्रत, कथा और पारिवारिक परंपराओं से ही जुड़ी हुई है।

किसी घर में कढ़ी-चावल, किसी में शादी की चुनरी ओढ़कर पूजा

इंदिरानगर के ए-ब्लॉक में रहने वाली मीना सोप्सी और अनीता गर्ग करवा चौथ पर अपने परिवार के साथ पूजा करेंगी। उन्होंने घरों में पूजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीना त्यागी ने बताया कि उनके परिवार में करवा चौथ के अवसर पर कढ़ी-चावल बनाने की परंपरा है। इसके साथ महिलाएं शादी की चुनरी ओढ़कर पूजा करती हैं। ऐसी पारिवारिक परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही हैं। कहीं करवा चौथ की कथा सुनने के लिए महिलाएं एक स्थान पर एकत्र होती हैं तो कहीं घर की वरिष्ठ महिला पूजन कराती हैं। कई परिवारों में विवाह के समय मिले श्रृंगार के सामान का उपयोग किया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए परिवार के सदस्यों द्वारा की जाने वाली तैयारियां भी पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

बादशाहनगर में सामूहिक पूजा, पति बनाते हैं सभी महिलाओं के लिए चाय

बादशाहनगर निवासी नीलम प्रकाश के परिवार में करवा चौथ मनाने की एक विशेष परंपरा है। उन्होंने बताया कि मोहल्ले की महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं। इसके बाद उनके पति सभी महिलाओं के लिए चाय बनाते हैं। व्रत खोलने के बाद महिलाएं एक साथ चाट-बताशों का आनंद लेने जाती हैं। इस आयोजन में पूजा के साथ मेलजोल और उत्सव का भाव भी जुड़ा रहता है। नीलम के अनुसार करवा चौथ का यह आयोजन वर्षों से परिवार और आसपास की महिलाओं के लिए खास अवसर बना हुआ है। ऐसे सामूहिक आयोजनों के कारण करवा चौथ केवल व्यक्तिगत व्रत नहीं रहता, बल्कि पड़ोस और परिवारों को एक साथ लाने वाला पर्व भी बन जाता है।

बाजारों में साड़ी, चूड़ी, करवा और मेहंदी की खरीदारी

करवा चौथ की पूर्व संध्या पर राजधानी के बाजारों में महिलाओं की खरीदारी का उत्साह है। साड़ी और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर महिलाएं अपनी पसंद के परिधान और आभूषण चुन रही हैं। मिट्टी के करवे, छलनी, दीपक, पूजा की थाली और अन्य सामग्री की बिक्री भी हो रही है। मेहंदी लगाने वालों और ब्यूटी पार्लरों में पर्व को लेकर विशेष तैयारियां हैं। बाजारों में पारंपरिक पूजा सामग्री के साथ सजावटी करवे और तैयार पूजा थालियां भी उपलब्ध हैं। नवविवाहिताओं में इस अवसर पर विशेष श्रृंगार करने का उत्साह अधिक दिखाई देता है। कई परिवारों में महिलाएं पहले ही अपनी पूजा सामग्री तैयार करके रख रही हैं, ताकि गुरुवार को दिनभर की व्यस्तता के बीच शाम की पूजा समय पर पूरी हो सके।

करवा चौथ की परंपरा में समर्पण, विश्वास और पारिवारिक संबंधों का महत्व

करवा चौथ उत्तर भारत के प्रमुख पारंपरिक पर्वों में शामिल है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सहित अनेक क्षेत्रों में विवाहित महिलाएं इसे श्रद्धा और उत्साह से मनाती हैं। करवा चौथ की पूजा में भगवान गणेश और माता गौरी के साथ करवा माता की आराधना की जाती है। कई परिवारों में वीरवती की कथा सुनाई जाती है। इस कथा में व्रत, विश्वास और वैवाहिक जीवन से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का वर्णन मिलता है। समय के साथ पर्व मनाने की परंपराओं में बदलाव भी आया है। कुछ परिवारों में पति भी पत्नी के साथ उपवास रखते हैं, जबकि कई महिलाएं इसे पारस्परिक प्रेम और साथ के उत्सव के रूप में मनाती हैं।

हालांकि निर्जला उपवास हर व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं होता। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह या गुर्दे की बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों और नियमित दवा लेने वालों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्रत की विधि निर्धारित करना महत्वपूर्ण है।

राजधानी में गुरुवार को करवा चौथ का उत्सव सुबह से शुरू होगा। परंपरा का पालन करने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करेंगी। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा होगी। इसके बाद रात 8:06 बजे चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा रहेगी। कहीं नवविवाहिताओं के पहले करवा चौथ की खुशियां होंगी, तो कहीं वर्षों पुरानी पारिवारिक परंपराओं के बीच यह पर्व मनाया जाएगा।

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