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अंग प्रत्यारोपण के विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करेगा एसजीपीजीआई, शुरू होंगे डीएम कोर्स
Lucknow News: एसजीपीजीआई लखनऊ अंग प्रत्यारोपण और क्रिटिकल केयर में डीएम कोर्स शुरू करेगा। इससे ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया के विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी।
फोटो-सोशल मीडिया
Lucknow News: देश में किडनी, लिवर और हृदय प्रत्यारोपण की सुविधाएं बढ़ रही हैं, लेकिन इन जटिल ऑपरेशनों के दौरान मरीजों की जिंदगी सुरक्षित रखने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। विशेष रूप से ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया में प्रशिक्षित डॉक्टर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। इस कमी को दूर करने के लिए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) ने ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन और क्रिटिकल केयर में डीएम पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है। संस्थान में ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया की चार फेलोशिप सीटें पहले से उपलब्ध हैं। नए सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम शुरू होने से अंग प्रत्यारोपण के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
देश में ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया की सिर्फ पांच डीएम सीटें
एसजीपीजीआई के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की ओर से 31 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम और ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया मीट में विशेषज्ञों ने बताया कि देश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया की डीएम की महज पांच सीटें हैं। जबकि विभिन्न अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि विशेषज्ञों की उपलब्धता प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार की गति के अनुरूप नहीं बढ़ पाई है। सम्मेलन में देशभर के 15 से अधिक विशेषज्ञों और लगभग 60 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। इसमें अंगदाता की देखभाल से लेकर प्रत्यारोपण के बाद मरीज की स्थिति संभालने तक की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा हुई।
सर्जरी के दौरान कई अंगों की कार्यप्रणाली पर रखनी होती है नजर
वरिष्ठ एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. संदीप साहू के अनुसार, अंग प्रत्यारोपण की सफलता केवल सर्जन के कौशल पर निर्भर नहीं करती। मरीज के हृदय की गति, रक्तचाप, रक्तस्राव, खून के थक्के बनने की प्रक्रिया और प्रत्यारोपित अंग में पर्याप्त रक्त प्रवाह बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेष रूप से लिवर और हृदय प्रत्यारोपण में मरीज की शारीरिक स्थिति तेजी से बदल सकती है। ऐसे में प्रशिक्षित एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ की भूमिका निर्णायक हो जाती है। ऑपरेशन के बाद भी संक्रमण, प्रत्यारोपित अंग की कार्यक्षमता और अन्य जटिलताओं की गहन निगरानी आवश्यक होती है।
दूसरे मेडिकल संस्थानों को भी प्रशिक्षण दे रहा पीजीआई
एसजीपीजीआई की यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया टीम एम्स जोधपुर, एम्स बठिंडा, एम्स रायपुर, केजीएमयू और आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम विकसित करने में तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग दे चुकी है। संस्थान में जीवित एवं मृतक अंगदाताओं से प्रत्यारोपण की सुविधाएं उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण भी यहीं किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि नए डीएम पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से छोटे तथा उभरते प्रत्यारोपण केंद्रों को भी कुशल चिकित्सक उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।


