साइकिल पर 191 देश और 2 लाख किमी का सफर: लखनऊ पहुंचे सोमेन देबनाथ, CM योगी से मिलने की जताई इच्छा

Lucknow News: 191 देशों में 2 लाख किमी साइकिल चला चुके सोमेन देबनाथ लखनऊ पहुंचे। अब वे CM योगी से मिलकर पर्यावरण संरक्षण, खेल और HIV/AIDS जागरूकता पर चर्चा करना चाहते हैं।

Ashutosh Tripathi
Published on: 29 Oct 2026 6:06 PM IST (Updated on: 29 Oct 2026 6:08 PM IST)
साइकिल पर 191 देश और 2 लाख किमी का सफर: लखनऊ पहुंचे सोमेन देबनाथ, CM योगी से मिलने की जताई इच्छा
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191 देशों की यात्रा कर लखनऊ पहुंचे सोमेन देबनाथ (फोटो-आशुतोष त्रिपाठी)

​Lucknow News: दुनिया के 7 महाद्वीपों और 191 देशों की सीमाओं को नापते हुए 2 लाख किलोमीटर का सफर साइकिल से पूरा करने वाले प्रख्यात भारतीय साइकिल यात्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमेन देबनाथ गुरुवार को लखनऊ पहुंचे। अपने वैश्विक अभियान के बाद अब वे भारत के 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में 'रीयूनियन भारत: वन ट्री–वन लाइफ, इंडियन यूथ एंड स्पोर्ट्स' अभियान चला रहे हैं।


​लखनऊ आगमन पर सोमेन देबनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा जताई है। वे मुख्यमंत्री से मिलकर अपने दो दशक लंबे अनुभवों, वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार और युवाओं के बीच पर्यावरण व एचआईवी/एड्स जागरूकता को लेकर अपनी कार्ययोजना साझा करना चाहते हैं।

​14 साल की उम्र में मिली प्रेरणा, 2004 से लगातार जारी है सफर

​सुंदरवन पश्चिम बंगाल के रहने वाले सोमेन देबनाथ ने कोलकाता विश्वविद्यालय से जूलॉजी में स्नातक और फाइन आर्ट्स में विशारद की डिग्री हासिल की है। जब वे 14 वर्ष के थे, तब कोलकाता मेडिकल कॉलेज के बाहर एक लावारिस एड्स पीड़ित की मौत से जुड़ी खबर ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। इस बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने के लिए उन्होंने पहले डब्ल्यूबीएसएसीएस से विशेष प्रशिक्षण लिया और फिर 27 मई 2004 को अपनी साइकिल उठाई। तब से लेकर अब तक वे रुके नहीं हैं। उन्होंने साइकिल को इसलिए चुना क्योंकि यह आम लोगों तक पहुंचने का सबसे सरल माध्यम है, पर्यावरण के अनुकूल है और इसे वे शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने वाला उत्कृष्ट योग मानते हैं।


तालिबान की कैद से लेकर -45°C की ठंड तक रोंगटे खड़े करने वाले अनुभव

​19 वर्षों की इस यात्रा में सोमेन देबनाथ का सामना मौत से कई बार हुआ 24 दिन अफगानिस्तान में तालिबान ने उन्हें 24 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। दुनिया भर में उनके साथ 28 बार लूटपाट हुई और 18 बार वे नस्लीय हमलों का शिकार बने।


उन्होंने पूर्व सोवियत संघ के इलाकों में -35°C और उत्तरी ध्रुव पर -45°C की कड़ाके की ठंड में साइकिल चलाई। इसके अलावा वे अंटार्कटिका और दक्षिणी ध्रुव की यात्रा भी पूरी कर चुके हैं। अफ्रीका के जंगलों में चीते, गैंडे, शेर और हाथियों के बीच से गुजरे। उन्होंने अंडमान में जारवा जनजाति के साथ 20 दिन बिताए और ग्रीनलैंड के एस्किमो समाज के बीच रहकर जीवन को करीब से समझा।


​2 करोड़ लोगों तक पहुंच और वैश्विक नेताओं से संवाद

सोमेन देबनाथ अब तक अपनी यात्रा के दौरान 36 देशों के राष्ट्रपतियों, 72 प्रधानमंत्रियों, 120 भारतीय राजदूतों और 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। वे दुनिया भर के स्कूलों, कॉलेजों, रेड-लाइट इलाकों और सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में सेमिनार आयोजित कर लगभग 2 करोड़ लोगों तक अपना संदेश पहुंचा चुके हैं। उनका कहना है कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि अगर दुनिया देखनी है, तो पहले भारत को जानो। मैंने दुनिया के कोने-कोने में देखा कि कहीं न कहीं हर संस्कृति और समाज में भारत की मानवीयता और जुड़ाव मौजूद है। इस समय वो लोगों को जागरूक करने के लिए कश्मीर से कन्या कुमारी की यात्रा पर हैं। जहां वे युवाओं को खेल, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का काम जारी रखेंगे।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

Chief Photojournalist Mail ID - tripathiashutosh88@gmail.comtripathiashutosh88@gmail.com

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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