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Lucknow: 90 साल पुराने स्कूल पर ताला, धरने पर 250 छात्राएं, फर्जी रजिस्ट्री से जमीन हड़पने का आरोप
Lucknow: 90 साल पुराने स्कूल पर प्रशासन का हथौड़ा, सड़क पर बैठे 250 बच्चे और शिक्षक, बच्चों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
School Bachao Dharna Narhi Lucknow (Photo Ashutosh Tripathi).jpg
Lucknow News: हजरतगंज के नरही इलाके में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब एडीएम पूर्वी के आदेश पर 90 साल पुराने सहायता प्राप्त विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल को अचानक खाली कराकर वहां ताला जड़ दिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में स्कूल के गेट पर बड़ी संख्या में छात्राएं, उनके अभिभावक और शिक्षक सड़क पर उतर आए और तीखा प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा भी प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने मौके पर पहुंचे।
बिना नोटिस और बिना सुनवाई के हुई कार्रवाई
स्कूल के प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग एक सदी पहले यह भूमि केवल शिक्षा के उद्देश्य से दान में दी गई थी। भूमिदाता के निधन के बाद कुछ लोग कथित रूप से फर्जी रजिस्ट्री तैयार कर इस बेशकीमती संपत्ति को हड़पना चाहते हैं।
प्रबंधक का दावा है कि एडीएम कोर्ट के आदेश के संबंध में स्कूल प्रबंधन को कोई विधिवत कानूनी नोटिस नहीं दिया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक समेत शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को पहले ही दी गई थी, लेकिन विभाग ने स्कूल और बच्चों के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
बारिश में भीगे नौनिहालों के भविष्य के दस्तावेज
कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका रश्मि ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि 4 जून को पुलिस बल और वकीलों के साथ कुछ लोग अचानक स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्टाफ को बिना संभलने का मौका दिए तुरंत बाहर निकाल दिया। यही नहीं स्कूल का बोर्ड जबरन उतार दिया गया। शिक्षकों और वर्तमान बच्चों के जरूरी कागजात को बोरों में भरकर बाहर फेंक दिया गया। इसके बाद हुई तेज बारिश में वे सारे दस्तावेज भीगकर बर्बाद हो गए।
250 छात्राओं के भविष्य पर मंडराया संकट
साल 1936 में स्थापित हुए इस ऐतिहासिक स्कूल में वर्तमान में 250 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए 6 सरकारी और 4 निजी शिक्षक तैनात हैं। प्रधानाध्यापिका का कहना है कि किराए को लेकर पुराना विवाद जरूर था, लेकिन इस तरह तानाशाही रवैये से सीधे बाहर निकाल देना नियमों के खिलाफ है। स्कूल पर ताला लगने के बाद से शिक्षक और अभिभावक बेहद परेशान हैं और बच्चों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।


