कौन हैं मायावती के 'वन मैन आर्मी' उर्फ़ BSP के इकलौते MLA उमाशंकर सिंह... जिनपर टिकी हैं सबकी नजरे?

Uma Shankar Singh: MLA उमाशंकर सिंह की जीत ने जहां पार्टी की साख को पूरी तरह खत्म होने से बचाया, वहीं यह भी दिखा दिया कि राजनीति में जमीनी जुड़ाव और निरंतर सक्रियता का कोई विकल्प नहीं होता।

Priya Singh Bisen
Published on: 25 Feb 2026 1:39 PM IST (Updated on: 25 Feb 2026 1:43 PM IST)
Uma Shankar Singh
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Uma Shankar Singh (photo: social media)

Uma Shankar Singh: उत्तर प्रदेश की सियासत इस वक़्त बड़ी हलचल मची हुई है। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान के दौरे पर हैं, तो वहीं BSP के एकमात्र MLA उमाशंकर सिंह के घर पर इनकम टैक्स ने छापा मारा है।


अब इसे लेकर प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा हो गयी है... इसे लेकर अब हर कोई निगाहें इस बात पर टिकाये बैठा है कि अब आगे क्या होगा? इससे पहले हम नज़र डालेंगे कि आखिर कौन हैं उमाशंकर सिंह और इनका यूपी की राजनीति क्या योगदान रहा है।

उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2022 का विधानसभा चुनाव कई बड़े राजनीतिक उलटफेर लेकर आया। कभी पूर्ण बहुमत के साथ यूपी की 'सत्ता' पर राज करने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) इस चुनाव में सिमटकर सिर्फ एक सीट पर आ गई। साल 2007 में लगभग 206 सीटें जीतकर अपने दम पर सरकार बनाने वाली पार्टी की यह गिरावट आज राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बेहद हैरान करने वाली रही। अब राजनीतिक परिदृश्य के अलावा एक नाम लगातार चर्चा में बना रहा - उमाशंकर सिंह।

रसड़ा से तीसरी बार जीत

उमाशंकर सिंह ने बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचा। इससे पहले वे साल 2012 और 2017 में भी इसी सीट से विधायक चुने गए थे। उसके बाद साल 2022 के चुनाव में उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के महेंद्र को 6583 वोटों से हराया। जब पूरा प्रदेश BSP के लिए प्रतिकूल परिणाम दे रहा था, तब रसड़ा की जनता ने एक बार फिर उमाशंकर सिंह पर विश्वास जताया।

"रॉबिनहुड" की छवि और ज़मीनी पकड़

रसड़ा क्षेत्र में उमाशंकर सिंह की पहचान एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में है। स्थानीय लोगों के बीच उन्हें "रॉबिनहुड" जैसी छवि वाला नेता कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक, वे पेशे से एक कॉन्ट्रैक्टर भी रहे चुके हैं और कहा जाता है कि चाहे प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार रही हो या नहीं, उन्होंने अपने क्षेत्र में विकास कार्य रुकने नहीं दिए। यही सबसे बड़ी वजह है कि पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद उनकी व्यक्तिगत पकड़ मजबूत बनी रही।

अयोग्यता से SC तक का सफर ...

उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर पूरी तरह सरल नहीं रहा। अपने पहले कार्यकाल में उन्हें तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक द्वारा रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन के आरोप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। मामले कको लेकर उन पर आरोप था कि विधायक रहते हुए उन्होंने सड़क निर्माण का टेंडर लिया था, जो नियमों के खिलाफ था। हालांकि, उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अदालत से उन्हें राहत मिली। इसके बाद उन्होंने फिर से चुनाव लड़ा और अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की।

विधायक दल के नेता बने

BSP सुप्रीमो मायावती ने नवंबर 2021 में उमाशंकर सिंह को विधायक दल का नेता नियुक्त किया था। साल 2022 के चुनाव में जब पार्टी को केवल एक सीट मिली, तब वे स्वाभाविक रूप से विधानसभा में BSP का एकमात्र चेहरा बनकर उभरे। चुनाव के नतीजों के सामने आने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि पार्टी आत्ममंथन करेगी और भविष्य की रणनीति पर गंभीरता से विचार करेगी।

BSP का गिरता ग्राफ

उत्तर प्रदेश की राजनीति में BSP का ग्राफ तेजी से गिरा है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर 22% था, जो साल 2022 में कम होकर मात्र 12.8% रह गया। सीटों की संख्या भी लगातार कम होती गई। साल 2007 में 206 सीटें, 2012 में 80, 2017 में 19 और 2022 में मात्र 1 सीट और यह गिरावट दलित राजनीति की बदलती दिशा की तरफ इशारा करती है।

इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BSP का पारंपरिक दलित वोट बैंक इस बार बड़े पैमाने पर भाजपा की तरफ शिफ्ट हुआ। आपको बता दे, भाजपा का वोट शेयर साल 2017 के 39.7% से बढ़कर 2022 में 42% तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा ने सामाजिक समीकरणों में बढ़त बनाई।

मायावती का बयान

चुनाव में ज़बरदस्त हार के बाद मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निराश न होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परिणाम उम्मीद के विपरीत अवश्य हैं, लेकिन घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवादी मीडिया और प्रायोजित सर्वे के माध्यम से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया गया और मुस्लिम तथा भाजपा विरोधी वोटरों को भ्रमित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि BSP को भाजपा की "बी टीम" बताने का दुष्प्रचार किया गया।

पंजाब में भी सीमित प्रभाव

BSP ने पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन किया था, लेकिन वहां भी उसे केवल एक सीट मिली और वोट शेयर 1.7% रहा। यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में दलित आबादी का प्रतिशत देश में सबसे अधिक है। इसके बावजूद BSP का प्रदर्शन सीमित रहा।

कांग्रेस की भी कमजोर स्थिति

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा। पार्टी को केवल 2 सीटों पर जीत मिली। रामपुर खास से अराधना मिश्रा मोना और फरेंदा से वीरेंद्र चौधरी ने जीत दर्ज की। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू तमकुही राज सीट से तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस का वोट शेयर भी 2.33% पर सिमट गया।

अब आगे भविष्य की राह?

उमाशंकर सिंह की जीत इस बात का संकेत है कि व्यक्तिगत लोकप्रियता और क्षेत्रीय पकड़ आज भी राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है। हालांकि, BSP के लिए चुनौती बड़ी है, उसे अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से जोड़ना होगा और नए सामाजिक समीकरण गढ़ने होंगे।

इसे लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि BSP को फिर से मजबूत बनना है तो उसे संगठनात्मक ढांचे में परिवर्तन, जमीनी स्तर पर सक्रियता और नए नेतृत्व को आगे लाने की बेहद आवश्यकता होगी। फिलहाल, उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा की आवाज़ के रूप में केवल एक नाम है - उमाशंकर सिंह।

उनकी जीत ने जहां पार्टी की साख को पूरी तरह खत्म होने से बचाया, वहीं यह भी दिखा दिया कि राजनीति में जमीनी जुड़ाव और निरंतर सक्रियता का कोई विकल्प नहीं होता।

लखनऊ आवास पर इनकम टैक्स का छापा

राजधानी लखनऊ में मंगलवार को BSP विधायक उमाशंकर सिंह के घर इनकम टैक्स की टीम ने छापा मारा। उमाशंकर सिंह BSP के इकलौते विधायक हैं। इस वक़्त वह जैसी बड़ी बिमारी से जूझ रहे हैं। दो बार उनका ऑपरेशन हो चुका है। फिलहाल 50 से ज्यादा अफसर पुलिस के साथ जांच कर रहे हैं। अब यह मामला कितना तूल पकड़ता है, ये आगामी कुछ वक़्त में पता चलेगा।

Priya Singh Bisen

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