TRENDING TAGS :
Mainpuri News: मैनपुरी में 950 शिक्षा प्रेरकों के बकाया मानदेय का मुद्दा गरमाया, भुगतान की मांग
Mainpuri News: मैनपुरी में साक्षर भारत मिशन के तहत तैनात रहे 950 से अधिक शिक्षा प्रेरकों के करीब 40 माह के बकाया मानदेय का मामला फिर गरमा गया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष पवन कठेरिया ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर जल्द भुगतान की मांग की।
Mainpuri News
Mainpuri News: मैनपुरी में साक्षर भारत मिशन योजना के तहत जिले में तैनात रहे 950 से अधिक शिक्षा प्रेरकों के करीब 40 माह के बकाया मानदेय का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बुधवार को दोपहर करीब 3:30 बजे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रभावित शिक्षा प्रेरकों का बकाया मानदेय जल्द दिलाने की मांग उठाई। पार्टी के जिलाध्यक्ष पवन कठेरिया ने जिलाधिकारी को संबोधित पत्र सौंपकर प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पार्टी की ओर से दिए गए पत्र में बताया गया कि वर्ष 2009-10 में साक्षर भारत मिशन योजना के तहत मैनपुरी जिले में 950 से अधिक शिक्षा प्रेरकों की नियुक्ति की गई थी। इन शिक्षा प्रेरकों को प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय दिया जाता था। आरोप है कि मार्च 2018 में बिना किसी नोटिस के उनकी संविदा समाप्त कर दी गई। इसके साथ ही करीब 40 माह का मानदेय बकाया रह गया, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है।जिलाध्यक्ष पवन कठेरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश के क्रम में करीब छह माह पहले सभी प्रभावित शिक्षा प्रेरकों से उनके बैंक खातों का विवरण भी जमा कराया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक किसी भी शिक्षा प्रेरक को बकाया मानदेय नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे पूर्व शिक्षा प्रेरकों को इससे निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
पार्टी ने सवाल उठाया कि जब संबंधित शिक्षा प्रेरकों के बैंक खातों का विवरण पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है, तो भुगतान की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हुई। पत्र के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई कि मामले की जांच कर आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए और पात्र शिक्षा प्रेरकों को उनकी बकाया राशि दिलाई जाए।लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रेरकों के भुगतान का मामला लंबे समय से लंबित है और इसका जल्द निस्तारण होना चाहिए। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो पार्टी शिक्षा प्रेरकों के अधिकारों के लिए संवैधानिक दायरे में रहकर संघर्ष करेगी। अब प्रभावित शिक्षा प्रेरकों को प्रशासन की कार्रवाई और बकाया मानदेय के भुगतान का इंतजार है।


