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Mathura News: भाद्रपद मास: सनातन संस्कृति में विशेष महत्व और गणेश चतुर्थी उत्सव
Mathura News: मथुरा में गणपति बाप्पा का स्वागत, मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब
Ganesh Chaturthi in Mathura
Mathura News: भाद्रपद मास सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मास में असंख्य हिंदुओं के आराध्य भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) मनाया जाता है। साथ ही उनके अग्रज भगवान बलराम तथा जगत आराध्या श्री राधा रानी का भी प्राकट्य उत्सव इसी पावन माह में मनाया जाता है।
भाद्रपद मास में ही सर्वप्रथम पूज्य देवता भगवान गणेश का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन चुका है।
गणेशोत्सव: गुलाम भारत में मिली नई पहचान
गणेश चतुर्थी को ब्रिटिश शासन काल में एक नया सामाजिक स्वरूप मिला, जब अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के मेल-जोल और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई थी। उस समय महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक (न कि गोपाल कृष्ण गोखले) ने इस पर्व को सार्वजनिक रूप में मनाने की परंपरा शुरू की। इससे भारतीयों को एकजुटता का नया माध्यम मिला, जो स्वतंत्रता संग्राम में सहायक सिद्ध हुआ।
आज भी यह पर्व महाराष्ट्र, विशेष रूप से मुंबई, में अत्यंत भव्यता के साथ मनाया जाता है। जानकारों के अनुसार, मुंबई में हजारों करोड़ रुपये तक का खर्च भक्तजन अपने आराध्य गणपति बाप्पा की स्थापना, पूजा और विसर्जन में करते हैं।
मथुरा में भी गणेशोत्सव की धूम
मथुरा, जो श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है, वहां भी गणेश चतुर्थी का उत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। शहर के दो प्रमुख प्राचीन मंदिर – वृंदावन मार्ग स्थित गणेश टीला मंदिर और दशभुजी गणेश मंदिर (जो मथुरा की घनी आबादी के बीच स्थित है) – में इस पर्व पर विशेष आयोजन होते हैं।
प्रातःकाल से ही भक्तों की भारी भीड़ मंदिरों में दर्शन और पूजन के लिए उमड़ पड़ती है। भगवान गणेश के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक कर, वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच विशेष स्नान कराया जाता है। विभिन्न प्रकार के इत्रों से भगवान का श्रृंगार कर, पंचामृत का वितरण भक्तों में किया जाता है।


