Mathura News: 7 जून को दिल्ली में धर्म संसद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंथन

Mathura News: नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 7 जून को अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद होगी, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि, सनातन संस्कृति और धार्मिक विरासत पर चर्चा होगी।

Amit Sharma
Published on: 1 Jun 2026 9:24 AM IST
Manthan at Dharma Sansad, Srikrishna Janmabhoomi in Delhi on June 7
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7 जून को दिल्ली में धर्म संसद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंथन (Photo- Newstrack)

Mathura News: नई दिल्ली के ऐतिहासिक तालकटोरा स्टेडियम में 7 जून 2026 को मथुरा अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। आयोजकों के अनुसार, देश और विदेश से बड़ी संख्या में संत, धर्माचार्य, महामंडलेश्वर, विद्वान और श्रीकृष्ण भक्त इसमें भाग लेंगे। धर्म संसद का मुख्य विषय मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और इस विषय पर संत समाज तथा श्रद्धालुओं की राय को एक मंच पर लाना है। कार्यक्रम में सनातन धर्म की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

वहीं इस मामले में आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक सभा नहीं बल्कि जनजागरण का अभियान भी है। इसके माध्यम से समाज को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। विभिन्न संत और वक्ता अपने विचार रखेंगे तथा वर्तमान समय में सनातन संस्कृति के सामने मौजूद चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे।-



धर्म संसद में शामिल होने वाले संत समाज का मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए इस विषय पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से समाज की भावनाओं को सामने लाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान कई प्रस्तावों और सुझावों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

वहीं देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों में रहने वाले सनातन धर्म के अनुयायियों की भी इस आयोजन पर नजर रहेगी। आयोजकों का दावा है कि धर्म संसद से निकले संदेश को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों पर संवाद को बढ़ावा मिलेगा। वहीं मथुरा अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह कार्यक्रम सनातन संस्कृति, धार्मिक चेतना और सामाजिक एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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