श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की लीला ने मोहा मन

Mathura News: मथुरा में श्रीराम द्वारा शिव धनुष खंडन और परशुराम-लक्ष्मण संवाद के सजीव मंचन से गूंजे जय श्रीराम के जयकारे।

Amit Sharma
Published on: 11 Oct 2026 11:46 AM IST
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की लीला ने मोहा मन
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Mathura News: धर्मनगरी मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आयोजित भव्य रामलीला में धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की लीला का शानदार मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने, माता सीता के जयमाला पहनाने और भगवान परशुराम के क्रोधित होकर सभा में पहुंचने के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरी रामलीला के दौरान परिसर भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा।

धनुष यज्ञ की लीला में देश-विदेश से आए राजा-महाराजाओं ने भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने का प्रयास किया। सभी राजाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम धनुष के पास पहुंचे। उन्होंने सहजता से शिव धनुष को उठा लिया। जैसे ही प्रभु श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, वह टूट गया। धनुष टूटने की आवाज के साथ ही सभा स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर इस प्रसंग का स्वागत किया।

इसके बाद सीता स्वयंवर का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया गया। माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में जयमाला पहनाई और उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया। इस दृश्य को देखकर रामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कलाकारों की प्रस्तुति और मंच पर सजे भव्य दृश्य ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

शिव धनुष टूटने की सूचना मिलने पर भगवान परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर सभा में पहुंचे। यहां भगवान परशुराम और लक्ष्मण जी के बीच तीखा संवाद हुआ। दोनों के बीच हुए सवाल-जवाब ने दर्शकों को बांधे रखा। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय और संवाद अदायगी से इस प्रसंग को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने भी पूरे उत्साह के साथ लीला का आनंद लिया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के रंगमंच पर की गई आकर्षक सजावट, कलाकारों की वेशभूषा और शानदार अभिनय ने रामलीला को यादगार बना दिया। लीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म के महत्व को भी दर्शाया गया।

धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की लीला श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुई। अंत तक परिसर में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बने।

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