‘BJP आपकी पार्टी को खा रही है’,...मऊ विधायक ने राजभर को क्यों दी यह नसीहत

Abbas Ansari on Om Prakash Rajbhar: अब्बास अंसारी ने ओम प्रकाश राजभर को आगाह करते हुए कहा कि BJP उनकी पार्टी को कमजोर कर रही है। जानिए आरक्षण, संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी पर उन्होंने क्या कहा।

Shalni Kumari
Published on: 24 Oct 2026 5:44 PM IST
Om Prakash Rajbhar
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 Abbas Ansari Statement

Abbas Ansari on Om Prakash Rajbhar: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में गठबंधन की कुर्सी पर बैठना आसान है, लेकिन अपनी पार्टी के मुद्दों को बचाकर रखना कितना मुश्किल है, इस पर अब बहस छिड़ गई है। मऊ (Mau) से विधायक अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) को आगाह करते हुए ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। अब्बास ने कहा, “मैं चाचा को यही कहूंगा कि भाजपा भारतीय समाज पार्टी को खा रही है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जिस आरक्षण (Reservation) और सामाजिक अधिकार (Social Rights) की लड़ाई के नाम पर पार्टी खड़ी हुई, सत्ता में आने के बाद भी अगर उसी समाज को न्याय नहीं मिल रहा, तो फिर सत्ता में हिस्सेदारी का फायदा क्या हुआ? मऊ स्थित समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता (Press Conference) के दौरान अब्बास ने संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी को लेकर भी बड़ा दावा किया।

‘जिस आरक्षण के लिए पार्टी बनी, उसी पर साफ बात नहीं’

अब्बास अंसारी ने ओम प्रकाश राजभर को संबोधित करते हुए कहा कि जिस मुद्दे को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठन हुआ था, वही मुद्दा आज पीछे छूटता नजर आ रहा है। उनके मुताबिक, राजभर समाज (Rajbhar Community) के लोगों ने अपने अधिकार और आरक्षण की मांग को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व को चुना था, लेकिन सरकार में शामिल होने के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

अब्बास ने अपने बयान में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) धीरे-धीरे राजभर की पार्टी को कमजोर कर रही है। उनका आरोप है कि सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी अपने समर्थकों को वह न्याय नहीं दिला पा रही, जिसकी उम्मीद लेकर लोगों ने उसे आगे बढ़ाया था।

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर प्रदेश में सहयोगी दलों की भूमिका, सामाजिक समीकरण (Social Equations) और आरक्षण की मांग को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी पर भी किया दावा

अब्बास अंसारी ने अपने बयान में निषाद पार्टी (Nishad Party) के प्रमुख संजय निषाद (Sanjay Nishad), अपना दल (सोनेलाल) की नेता अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) और राष्ट्रीय लोक दल (Rashtriya Lok Dal) के प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “संजय निषाद जैसे लोग भी कहने को मजबूर हैं कि आरक्षण पर साफ बात नहीं होगी तो कुछ करना पड़ेगा। यह ओम प्रकाश चाचा के दिल में भी है। अनुप्रिया पटेल जी के भी दिल में है और जयंत चौधरी जी के भी दिल में है, सब समय का इंतजार कर रहे हैं।”

अब्बास के इस बयान को बीजेपी के सहयोगी दलों के बीच आरक्षण और सामाजिक अधिकारों को लेकर संभावित असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, इन नेताओं के मन में क्या है या वे भविष्य में क्या कदम उठाएंगे, इस बारे में अब्बास ने अपना राजनीतिक आकलन पेश किया है। इसे उनकी ओर से किए गए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बीजेपी सरकार पर मदद और रोजगार के मुद्दे पर निशाना

प्रेस वार्ता में अब्बास अंसारी ने बीजेपी सरकार (BJP Government) पर आम लोगों तक पर्याप्त सरकारी सहायता (Government Assistance) नहीं पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि लोगों को जरूरी संसाधन (Essential Resources), रोजगार के अवसर (Employment Opportunities) और रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही हैं।

अब्बास के मुताबिक, इन समस्याओं के कारण जनता में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अब सांप्रदायिकता की राजनीति (Communal Politics) के सहारे जनता के असल मुद्दों से ध्यान नहीं हटाया जा सकता।

उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली और चुनावी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। अब्बास ने सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) जैसी सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती का जिक्र किया और आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में सरकारी तंत्र (Government Machinery) का इस्तेमाल हो रहा है।

उनके बयान में बाहुबल (Muscle Power), धनबल (Money Power), दबाव की राजनीति (Pressure Politics) और मतदाता सूची (Voter List) में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई गई। हालांकि, ये आरोप अब्बास अंसारी की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

MLC चुनाव में जीत का भरोसा, निष्पक्षता पर उठाए सवाल

विधान परिषद (Legislative Council) के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (Graduate and Teachers' Constituencies) के चुनावों पर बात करते हुए अब्बास अंसारी ने जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में प्रबुद्ध वर्ग (Educated and Informed Voters) के लोग मतदान करते हैं, जो मुद्दों को समझकर अपना फैसला लेते हैं।

अब्बास ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि यह चुनाव प्रबुद्ध वर्ग का है। ऐसे लोग जो चीजों को गहराई से समझते हैं और जिनमें अच्छी समझ है। ये वे लोग हैं जो दूसरों के भविष्य को रोशन करते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि वे समझदार हैं और सोच-समझकर अपना वोट डालेंगे।”

हालांकि, उन्होंने साफ किया कि चुनाव में असली मुद्दा निष्पक्षता (Fairness) का है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहुबल, धनबल और दबाव की राजनीति के अलावा मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों (Incorrect Entries) को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब्बास के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सरकारी तंत्र के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

आरक्षण और गठबंधन की राजनीति पर बढ़ सकती है बहस

अब्बास अंसारी के बयान ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन की राजनीति (Coalition Politics) और आरक्षण के मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बीजेपी के सहयोगी दलों की राजनीति काफी हद तक उनके सामाजिक आधार और समर्थक वर्गों से जुड़े मुद्दों पर निर्भर करती है। ऐसे में आरक्षण को लेकर असहमति या सवाल राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

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