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'यादव सिर्फ 7%, फिर अखिलेश CM क्यों?', चुनाव से पहले मौलाना ने बढ़ाई सपा चीफ की टेंशन, दे दिया 30 दिनों का अल्टिमेटम
2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मौलाना शहाबुद्दीन ने अखिलेश यादव से मुस्लिम मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग की है।
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। इसी बीच मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ा दी है। उन्होंने ऐसी मांग कर दी है, जिसका जवाब शायद अखिलेश के पास हो भी नहीं। और तो और उन्होंने इसके लिए सपा चीफ को अल्टीमेटम भी दे दिया है। उन्होंने मांग की है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को मुस्लिम मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना चाहिए।
मौलाना शहाबुद्दीन ने एक वीडियो जारी कर सवाल किया कि जब उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी यादव आबादी से ज्यादा है, तो समाजवादी पार्टी लगातार अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर क्यों पेश करती है। उन्होंने कहा, 'मुसलमान 22 प्रतिशत, यादव सिर्फ 7 प्रतिशत, फिर अखिलेश को मुख्यमंत्री क्यों?' शहाबुद्दीन ने इसी के साथ समाजवादी पार्टी में मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी सवाल उठाए।
अखिलेश यादव से मांगा जवाब
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि अखिलेश यादव अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवालों के जवाब मांगते हैं, लेकिन जब उनसे सवाल किए जाते हैं तो वह उनका जवाब नहीं देते। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव से यह भी पूछा गया है कि क्या समाजवादी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम चेहरे को आगे करेगी। शहाबुद्दीन का दावा है कि इस सवाल पर अब तक अखिलेश यादव की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
वक्फ संपत्तियों को लेकर भी उठाए सवाल
मौलाना शहाबुद्दीन ने वक्फ संपत्तियों को लेकर भी अखिलेश यादव से सवाल किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं और वक्फ संपत्तियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव से जवाब मांगा। शहाबुद्दीन का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर भी समाजवादी पार्टी के प्रमुख से सवाल किए गए हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
150 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की मांग
मौलाना शहाबुद्दीन ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों को लेकर भी एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य की करीब 150 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम समुदाय का प्रभाव ज्यादा है। इसी आधार पर उन्होंने समाजवादी पार्टी से इन 150 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की मांग की है।
उन्होंने अखिलेश यादव को 30 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है। शहाबुद्दीन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज की ओर से अखिलेश यादव के खिलाफ अभियान शुरू किया जाएगा। उनके ये बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और उसके मुस्लिम समर्थन आधार को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आए हैं।
मायावती भी साध चुकी हैं समाजवादी पार्टी पर निशाना
इससे पहले 21 सितंबर को बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने भी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में मुस्लिम वोटों को लेकर समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाए।
मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय ने पिछले चुनावों में बड़े पैमाने पर समाजवादी पार्टी का समर्थन किया था, लेकिन अब उनका समर्थन तेजी से BSP की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने इस बदलाव की तुलना ऊंची जातियों, खासकर ब्राह्मणों के बीच BSP के समर्थन को लेकर अपने दावे से की।
PDA रथ के रंग को लेकर भी अखिलेश पर तंज
मायावती ने समाजवादी पार्टी के 'PDA Rath' को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस रथ में समाजवादी पार्टी के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में RSS और BJP से जुड़े भगवा रंग का इस्तेमाल ज्यादा दिखाई दे रहा है।
मायावती ने सवाल किया कि क्या यह वोटों के लिए समाजवादी पार्टी की रणनीति में बदलाव का संकेत है या फिर अखिलेश यादव को मुस्लिम वोट मिलने का भरोसा कम हो गया है।
इस तरह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम समर्थन, मुख्यमंत्री चेहरे और PDA की राजनीति को लेकर अलग-अलग राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं। मौलाना शहाबुद्दीन की मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की मांग ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया है।


