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एक हफ्ते में मायावती ने फिर बदला फैसला! आकाश-दीपिका के लिए दरवाजे बंद, सिर्फ ईशान पर जताया भरोसा
Mayawati's Big Decision: मायावती ने आकाश आनंद और दीपिका आनंद को बसपा से दूर रखने का फैसला किया है। अब ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने का संकेत दिया है। 23 सितंबर को अहम बैठक होगी।
Image Source- Social Media
Mayawati's Big Decision: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने अपने परिवार और पार्टी में जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। करीब एक हफ्ते पहले जिस छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी में किसी भी तरह की जिम्मेदारी देने से इनकार कर दिया था, अब उसी ईशान के लिए बसपा के दरवाजे खोल दिए गए हैं। मायावती ने साफ संकेत दिया है कि ईशान आनंद को जल्द ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी।
इसके साथ ही मायावती ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बड़े भतीजे आकाश आनंद की बसपा में अब कभी वापसी नहीं होगी। इतना ही नहीं, जिस भतीजी दीपिका आनंद को कुछ दिन पहले उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार की मदद के लिए पार्टी में आगे आने का विकल्प दिया था, अब वह ऑफर भी वापस ले लिया गया है।
मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अपने इस फैसले की वजह बताई। उन्होंने कहा कि अब आनंद कुमार के परिवार में से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईशान ने भी पार्टी विरोधी कोई गंभीर काम किया तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा।
एक हफ्ते में फिर बदल गया फैसला
करीब एक हफ्ते पहले मायावती ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा था कि उनके दोनों भतीजों आकाश आनंद और ईशान आनंद को बसपा में कोई छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार की इकलौती बेटी दीपिका आनंद पर भरोसा जताया था।
मायावती ने कहा था कि अगर आगे चलकर आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए परिवार के किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। उस समय मायावती ने दीपिका की ईमानदारी, निष्ठा और काम करने की क्षमता के आधार पर उन्हें जिम्मेदारी देने की बात कही थी।
दीपिका आनंद उस समय लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही थीं। लेकिन अब मायावती ने अपना फैसला बदलते हुए साफ कर दिया है कि दीपिका को भी पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उनकी जगह अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे बढ़ाया जाएगा।
ऑफर वापस लेने की वजह क्या बताई?
मायावती ने दीपिका आनंद से ऑफर वापस लेने की वजह भी अपनी पोस्ट में बताई है। उन्होंने कहा कि एक लड़की होने की वजह से उन्हें मजबूरी में अपने किसी न किसी भाई-बहन को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा।
इसी वजह से उनका छोटा भाई आनंद कुमार पिछले काफी वर्षों से उनकी सेवा में कार्यरत है। मायावती के मुताबिक आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे करना पड़ा।
मायावती ने कहा कि शादी के बाद आकाश आनंद का कदम-कदम पर ऐसा रवैया और गतिविधियां रही हैं, जिसकी वजह से कुछ दिन पहले उन्हें फिर पार्टी से अलग करना पड़ा। इसी अनुभव को देखते हुए उन्होंने दीपिका के मामले में भी सावधानी बरतने का फैसला किया है।
मायावती ने कहा कि अगर शादी के बाद दीपिका का मामला भी आकाश आनंद की तरह निकल गया तो यह पार्टी के हित में नहीं होगा। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने फैसला किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को पार्टी में कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी और दोनों को पार्टी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में अब कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।
किसे आगे करूं, इसी को लेकर थी दुविधा
मायावती ने अपनी पोस्ट में पहली बार यह भी बताया कि आनंद कुमार के परिवार में से किसे राजनीति में आगे किया जाए, इसे लेकर वह पिछले कुछ समय से दुविधा में थीं।
उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करें और किसको नहीं, इसे लेकर काफी समय से उनके मन में दुविधा बनी हुई थी। अब उन्होंने हर पहलू पर गंभीरता से सोच-विचार करने के बाद इस पर विराम लगाने का फैसला किया है।
मायावती के मुताबिक अब आनंद कुमार के परिवार में से ऐसे सदस्य को आगे किया जाएगा, जो आकाश आनंद के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी न चले। इसी आधार पर उन्होंने ईशान आनंद को आगे करने का फैसला लिया है।
उन्होंने कहा कि अब आकाश आनंद और दीपिका आनंद की जगह केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा।
मायावती ने ईशान को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि अभी तक ऐसा ही लग रहा है कि उनके साथ आकाश आनंद और दीपिका आनंद जैसी कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे क्या होगा, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
आकाश पर फिर साधा निशाना
मायावती ने अपनी पोस्ट में एक बार फिर आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अब अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में हैं।
मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें आकाश आनंद को राजनीति में आगे करना पड़ा था। लेकिन शादी के बाद आकाश आनंद के रवैये और गतिविधियों में लगातार ऐसी बातें सामने आईं, जिनकी वजह से उन्हें फिर पार्टी से अलग करना पड़ा।
मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अब अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह फंस चुके हैं। उनके मुताबिक ऐसे व्यक्ति को पार्टी में वापस लेना बसपा के लिए बड़ा विश्वासघात होगा और वह पार्टी विरोधी ऐसा कोई गलत काम नहीं कर सकतीं।
ईशान को भी मिली साफ चेतावनी
मायावती ने ईशान आनंद को पार्टी में आगे बढ़ाने का संकेत तो दिया, लेकिन साथ ही उन्हें चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईशान आनंद ने भी पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया तो उन्हें भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इसके बाद आनंद कुमार के परिवार के किसी दूसरे सदस्य को पार्टी में छोटी या बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति आने पर परिवार के किसी सदस्य के बजाय पार्टी में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे किया जाएगा।
यानी ईशान के लिए पार्टी में रास्ता खुला है, लेकिन मायावती ने यह भी साफ कर दिया है कि उनके लिए यह आखिरी मौका जैसा होगा। अगर ईशान ने भी पार्टी के हित के खिलाफ काम किया तो परिवार के किसी और सदस्य के लिए रास्ता बंद कर दिया जाएगा।
'राजनीति में कामयाब होना है तो छोड़ना होगा मोह'
मायावती ने अपनी लंबी पोस्ट की शुरुआत ही एक नसीहत से की। उन्होंने पार्टी के लोगों से कहा कि अगर उन्हें राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए काम करना है तो उन्हें अपने भाई-बहनों और करीबी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना होगा।
मायावती ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के बाद कांशीराम ने अपने करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूरी बनाए रखी।
उनके मुताबिक कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को केवल निस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में काम करने की इजाजत दी। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपनी पूरी जिंदगी अपना परिवार बनाए बिना बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए समर्पित कर दी।
मायावती ने कहा कि कांशीराम से प्रेरित होकर उन्होंने भी अपनी पूरी जिंदगी बहुजन समाज के लिए समर्पित करने का फैसला लिया। लेकिन एक लड़की होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने किसी न किसी भाई-बहन को अपने साथ रखना पड़ा। इसी वजह से उनका छोटा भाई आनंद कुमार पिछले कई वर्षों से उनकी सेवा में कार्यरत है।
बाबा साहेब के पत्र का भी दिया हवाला
मायावती ने अपने फैसले को समझाने के लिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के एक पुराने पत्र का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 23 फरवरी 1956 को बाबा साहेब ने दिल्ली से मुंबई में अपने बेटे यशवंत बी आंबेडकर को एक पत्र लिखा था। मायावती के मुताबिक इस पत्र में बाबा साहेब ने बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को लेकर अपने बेटे को स्पष्ट निर्देश दिए थे।
मायावती ने पत्र के हवाले से कहा कि बाबा साहेब ने साफ किया था कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है, न कि उनके बेटे की और न ही उनकी अपनी। उन्होंने सार्वजनिक खाते में किसी भी तरह की अनियमितता को स्वीकार नहीं करने की बात कही थी।
मायावती के मुताबिक बाबा साहेब ने अपने बेटे के आचरण को उचित नहीं बताया था और चेतावनी दी थी कि अगर उनके अंतिम निर्देश की अनदेखी की गई तो उन्हें प्रेस से बाहर कर दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाएगा।
‘बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार’
बाबा साहेब के इस पत्र का हवाला देते हुए मायावती ने कहा कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उन्होंने कहा कि सत्ता की मास्टर चाबी के जरिए बहुजन समाज को शोषित से शासक वर्ग बनाकर उनके हित और कल्याण को सुनिश्चित करना ही उनका मिशनरी लक्ष्य और प्रतिज्ञा है।
मायावती ने कहा कि इस लक्ष्य के लिए वह अपने भाई-बहनों के खिलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जैसा उदाहरण बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने पेश किया था, वही उनका भी संकल्प है।
यानी मायावती ने अपने ताजा फैसले को सिर्फ परिवार में बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित से जोड़कर पेश किया है।
23 सितंबर को होगी बसपा की अहम बैठक
मायावती ने यह भी बताया कि 23 सितंबर को बसपा की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में देश और जनहित से जुड़े जरूरी मुद्दों के साथ परिवार और पार्टी से जुड़ा यह मामला भी रखा जाएगा। मायावती ने कहा कि बैठक का उद्देश्य यह भी है कि इसके बाद पार्टी के लोग पूरे जी-जान से अपने संगठन और पार्टी के काम में जुट जाएं।
अब इस बैठक पर भी नजर रहेगी, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों को लेकर लगातार कई बड़े फैसले लिए हैं। पहले आकाश आनंद को जिम्मेदारियों से अलग किया गया, फिर ईशान आनंद को जिम्मेदारी देने से इनकार किया गया, इसके बाद दीपिका आनंद को आगे बढ़ाने का विकल्प सामने आया और अब एक बार फिर फैसला बदलते हुए ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने का संकेत दिया गया है।
मायावती ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि परिवार को लेकर पार्टी और आंदोलन के हित में लिया गया यह फैसला कांशीराम से प्रेरित है और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के लिखे पत्र से प्रभावित है। उन्होंने साफ किया कि उनके लिए बहुजन समाज ही असली परिवार है और अपने मिशन के लिए वह अपने करीबी रिश्तेदारों के खिलाफ भी फैसला लेने से पीछे नहीं हटेंगी।


