मायावती के ‘चार आनंद’ का चक्रव्यूह! आकाश से ईशान और अब दीपिका...BSP में आखिर हो क्या रहा है?

BSP Mayawati-Anand Family Controversy: बसपा में मायावती के भतीजे आकाश आनंद, ईशान आनंद और भतीजी दीपिका आनंद को लेकर सियासी हलचल तेज है। आकाश के निष्कासन से लेकर ईशान की एंट्री और दीपिका को लेकर मायावती के संकेत तक, जानिए BSP में आखिर क्या चल रहा है और 2027 यूपी चुनाव से पहले इसके क्या मायने हैं।

Harsh Srivastava
Published on: 14 Sept 2026 8:56 AM IST
मायावती के ‘चार आनंद’ का चक्रव्यूह! आकाश से ईशान और अब दीपिका...BSP में आखिर हो क्या रहा है?
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BSP Mayawati-Anand Family Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर इन दिनों जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह किसी सस्पेंस और ड्रामा से भरी थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसा नजर आता है। पार्टी के भीतर इस समय बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद, ईशान आनंद और भतीजी कुमारी दीपिका आनंद को लेकर जबरदस्त गहमागहमी और चर्चाओं का बाजार गर्म है। ये तीनों मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद कुमार की संतानें हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो मायावती किसी एक 'आनंद' से नहीं, बल्कि एक साथ 'चार-चार आनंद' के राजनीतिक चक्रव्यूह में बुरी तरह उलझकर रह गई हैं। हाल के दिनों में जिस तरह से पार्टी में फैसले लिए गए हैं, उसने बीएसपी के अंदरूनी संगठन और उसके राजनीतिक भविष्य पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

आकाश, ईशान और अब दीपिका की म्यूजिकल चेयर

बीएसपी के भीतर पिछले कुछ दिनों में जो फैसलों की झड़ी देखने को मिली है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। सबसे पहले मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अचानक पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके ठीक बाद उन्होंने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में लाकर एंट्री दी, लेकिन महज कुछ ही घंटों के भीतर ईशान को भी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। इसी दौरान मायावती ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर अपनी भतीजी कुमारी दीपिका आनंद को भविष्य में बीएसपी में लाने का संकेत दिया। इस तरह एक ही परिवार के सदस्यों के बीच जिम्मेदारियां बांटने और छीनने का खेल लगातार चलता रहा।

शनिवार का X पोस्ट और रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा सच

शनिवार को सोशल मीडिया पर लंबे-चौड़े स्पष्टीकरण जारी करने के बाद रविवार को मायावती अचानक मीडिया के सामने पेश हुईं। जब मायावती मीडिया के समक्ष आईं, तो हर किसी को उम्मीद थी कि वे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कोई बड़ा रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करेंगी। लेकिन उनके संबोधन का सबसे बड़ा हिस्सा अपने पूर्व-उत्तराधिकारी आकाश आनंद और बीएसपी की अंदरूनी खींचतान पर ही केंद्रित रहा। मायावती ने खुद खुलासा किया कि शनिवार रात उनके सचिव आलोक कुमार के पास आकाश आनंद का फोन आया था, जिसमें उन्होंने पूछा था कि 'क्या बहनजी बीमार हैं?' मायावती ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि आकाश आनंद अभी भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं और अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में हैं।

पार्टी पर कमजोर होती पकड़ और बगावत का खौफ?

मायावती द्वारा एक फोन कॉल को राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाकर खारिज करने का यह कदम बीएसपी के भीतर चल रही असहजता को साफ दर्शाता है। एक पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक के फोन को लेकर सुप्रीम लीडर को खुद आकर सफाई देनी पड़े, तो यह संकेत देता है कि अंदरूनी अफवाहों ने शीर्ष नेतृत्व को कितना विचलित कर दिया है। ऐसे समय में जब विरोधी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरकर बूथ मैनेजमेंट मजबूत कर रहे हैं, बीएसपी का शीर्ष नेतृत्व इस बात की सफाई देने में उलझा हुआ है कि 'बहनजी' का स्वास्थ्य ठीक है या नहीं। यह स्थिति पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी विपरीत असर डाल रही है।

कांशीराम के सिद्धांत बनाम मायावती का 'आनंद मोह'

मायावती बार-बार यह दावा करती हैं कि वे बीएसपी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम जी के बताए सिद्धांतों पर चल रही हैं और उन्होंने कभी अपने सगे-संबंधियों को सांसद, विधायक या मंत्री पदों का लाभ नहीं दिया। हालांकि, धरातल पर जब कड़े फैसले लेने का समय आता है, तो सत्ता की मास्टर चाबी उसी एक परिवार की अगली पीढ़ी के आसपास घूमती दिखाई देती है। कांशीराम ने अपने पूरे जीवन में परिवार के किसी भी सदस्य को बहुजन आंदोलन के आसपास नहीं फटकने दिया था। लेकिन मायावती का तर्क रहता है कि अपनी देखभाल और सुरक्षा के लिए उन्हें अपने भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या मायावती जाने-अनजाने 'आनंद मोह' के दलदल में फंसती जा रही हैं?

2027 के चुनाव की तैयारी या पारिवारिक विरासत की जंग?

मायावती भले ही पार्टी में 50 प्रतिशत युवाओं (Gen-Z) को भागीदार बनाने का दावा कर रही हों, लेकिन कैडर के बीच यह संदेश जा रहा है कि पार्टी केवल एक परिवार के आंतरिक विवादों को सुलझाने में लगी है। बीएसपी का आम कार्यकर्ता यह सोचने पर मजबूर है कि 2027 की तैयारी किसी कैडर आधारित आंदोलन की तरह हो रही है या उत्तराधिकार के ड्रामे को सुलझाने के लिए। जानकारों का मानना है कि यदि बीएसपी को 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में मुख्य मुकाबले में बने रहना है, तो मायावती को इस पारिवारिक खिंचाव से बाहर निकलना होगा।

कुल मिलाकर, मायावती आज अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही हैं। यदि वे इस पारिवारिक उलझन से बाहर निकलकर किसी निष्ठावान और गैर-पारिवारिक कैडर को आगे बढ़ाने का साहस नहीं दिखाती हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि बहुजन आंदोलन अब अपनी मूल विचारधारा से भटककर महज एक पारिवारिक विरासत की जंग में तब्दील हो चुका है।

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Harsh Srivastava

Former Content Writer Mail ID - newstrack@gmail.comharshsri764@gmail.com

Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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