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अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के पीछे कौन? मायावती का बड़ा खुलासा- पूरी रात चलता रहा सियासी खेल!
Mayawati on Ashok Siddharth Retirement: मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि ऐलान रोकने के लिए पूरी रात सियासी दांव-पेच चलते रहे। साथ ही कांग्रेस, सपा और PDA पर भी निशाना साधा।
Mayawati on Ashok Siddharth Retirement: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी की सर्वोच्च नेता मायावती के एक ताजा बयान ने जबरदस्त सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पार्टी से बाहर किए गए वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ को लेकर मायावती ने जो खुलासे किए हैं, उसने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। मायावती ने न केवल विपक्षी दलों पर निशाना साधा, बल्कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के पीछे की पूरी कहानी बयां करते हुए बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मायावती के इस बयान के बाद अब हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर वह कौन सी पर्दे के पीछे की ताकतें थीं जो पूरी रात अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान को रोकने में जुटी हुई थीं?
रातभर चलता रहा सियासी दांव-पेच
मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए खुलासा करते हुए बताया कि जिस दिन बहुजन समाज पार्टी की ओर से अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने का परामर्श दिया गया था, उस दिन उन्होंने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया। उन पर पार्टी का भारी दबाव होने के बावजूद वे निर्णय लेने से बचते रहे। मायावती के मुताबिक, पूरी रात पर्दे के पीछे किस्म-किस्म के हथकंडे अपनाए जाते रहे और संन्यास की घोषणा को रुकवाने के लिए भरसक प्रयास किए गए। जब पूरी रात की रस्साकशी के बावजूद बात नहीं बनी और कोई रास्ता नहीं निकला, तब जाकर मजबूरी में अगले दिन तड़के लगभग साढ़े छह बजे संन्यास की घोषणा की गई। मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि यह घोषणा भी 'किंतु-परंतु' से भरी हुई थी ताकि अधिक देरी होने पर होने वाले किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। उन्होंने वादा किया कि सही समय आने पर पार्टी कार्यकर्ताओं को इस पूरी साजिश के बारे में और भी विस्तृत जानकारियां दी जाएंगी।
नीला रंग अपनाने पर समाजवादी पार्टी पर दागे तीर
विपक्षी पार्टियों, विशेषकर समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज पार्टी के पारंपरिक नीले रंग का प्रयोग किए जाने पर मायावती ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी दलों के नेताओं द्वारा नीला गमछा पहनने या मंचों पर नीले कपड़े का इस्तेमाल करने मात्र से उनकी संकीर्ण और सामंतवादी मानसिकता नहीं बदल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों का इतिहास हमेशा से गरीबों, दलितों, पिछड़ों और उपेक्षित वर्गों के प्रति जातिवादी रहा है। सपा के 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले पर हमला बोलते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि इनका चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से बेईमान और दोहरा रहा है। केवल नीले रंग का आवरण ओढ़ लेने से कोई नेता या पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की सच्ची अनुयायी नहीं बन जाती।
निष्कासित नेताओं और स्वार्थी राजनीति पर मायावती की नसीहत
बसपा से बाहर किए गए नेताओं के दूसरी पार्टियों में जाने और छोटे-छोटे संगठन बनाने की प्रवृत्ति पर भी मायावती ने करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से निकाले गए लोग पूरी तरह से अवसरवादी और स्वार्थी होते हैं। ऐसे लोग किसी भी दल के वफादार नहीं हो सकते और विरोधी पार्टियों के हाथों की कठपुतली बनकर केवल अपनी सियासी दुकान चलाते हैं। इनसे बहुजन समाज का कोई भला नहीं होने वाला है, क्योंकि ये बिना बैसाखी या गठबंधन के चुनाव लड़ने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते।
डूबता हुआ जहाज है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी द्वारा बसपा के बागी और निष्कासित नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिशों पर कटाक्ष करते हुए मायावती ने उसे 'डूबता हुआ जहाज' करार दिया। उन्होंने कहा कि जो पार्टी खुद अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है, उसमें शामिल होकर कोई भी समझदार व्यक्ति अपने राजनीतिक भविष्य को अंधेरे में नहीं धकेलेगा। मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए याद दिलाया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने जीवनकाल में ही बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस जैसी पार्टियों की नीयतों से सतर्क रहने और उनसे दूरी बनाए रखने की सख्त सलाह दी थी। आज के माहौल में पार्टी और मिशन के हित के लिए कार्यकर्ताओं को यह पूरा घटनाक्रम गहराई से समझना होगा।


