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आकाश के बाद ईशान पर भी गिरी मायावती की गाज, बोलीं- मोह में पड़कर पार्टी का नुकसान नहीं होने दूंगी
मायावती ने आकाश आनंद के बाद छोटे भतीजे ईशान आनंद से भी पार्टी की जिम्मेदारी छीन ली है। उन्होंने आनंद कुमार के बेटों को भविष्य में बसपा में राजनीतिक पद नहीं देने का ऐलान किया।
Mayawati BSP: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने अपने परिवार को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के बाद अब उन्होंने छोटे भतीजे ईशान आनंद से भी पार्टी की जिम्मेदारी वापस ले ली है। खास बात यह है कि ईशान को महज छह दिन पहले ही मुख्य सेक्टर कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई थी।
मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने फैसले की वजह बताते हुए कहा कि बसपा के मिशन की सफलता में किसी को भी रोड़ा बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने साफ किया कि वह किसी तरह के मोह में पड़कर पार्टी और बहुजन आंदोलन का नुकसान नहीं होने देंगी।
मायावती ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल ‘बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण और उसे अपने पैरों पर खड़ा करने की है। उन्होंने पार्टी संस्थापक कांशीराम की कार्यशैली का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अपने सगे भाई-बहनों, उनके परिवार के युवाओं और करीबी रिश्तेदारों को पार्टी के काम तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या किसी अन्य राजनीतिक लाभ के पद से दूर रखा।
आनंद कुमार के बेटों को अब पार्टी में पद नहीं
मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के कारण उन्हें अपने छोटे भाई को साथ रखने की जरूरत पड़ी। आनंद कुमार उनकी देखभाल करने के साथ उनकी निगरानी में पार्टी की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
हालांकि, मायावती ने कहा कि इसका लाभ अब उनके परिवार के अन्य सदस्यों को मिले, यह पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में उचित नहीं होगा। उन्होंने इसे अपना अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा बताते हुए कहा कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे या बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
आकाश आनंद को पहले ही पार्टी से कर चुकी हैं बाहर
इससे पहले 3 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर के पद से हटाने के बाद उन्हें पार्टी से भी बाहर कर दिया था। आकाश को लेकर मायावती ने पहले सोशल मीडिया पर कहा था कि उन्हें पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी तभी दी जा सकती है, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें।
मायावती के इस रुख के बाद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान किया था। इसके बावजूद मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को देर से उठाया गया लेकिन सही कदम बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर यह फैसला पहले लिया गया होता तो बसपा, बहुजन समाज और बहुजन आंदोलन के साथ-साथ आकाश आनंद को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
अब ईशान आनंद से भी जिम्मेदारी वापस लेने और आनंद कुमार के किसी बेटे को भविष्य में पार्टी में राजनीतिक पद नहीं देने की घोषणा से साफ है कि मायावती बसपा में परिवार की राजनीतिक भूमिका को सीमित करने के अपने फैसले को और सख्त कर रही हैं।


