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Meerut News: मानसून की राह देख रहे किसान, धान की रोपाई और सिंचाई को लेकर बढ़ी चिंता
Meerut News: किसान मानसून का इंतजार कर रहे हैं। धान रोपाई, सिंचाई, नहरों की सफाई, खाद-बीज उपलब्धता और बढ़ती लागत चिंता का कारण बनी है।
Meerut Farmers Await Monsoon (Social Media).jpg
Meerut News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन मेरठ जिले के किसानों की निगाहें अभी भी आसमान पर टिकी हैं। खेतों में धान की नर्सरी तैयार है, ट्रैक्टर जुताई कर चुके हैं, लेकिन समय पर मानसून पहुंचेगा या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि अगले 10-15 दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई प्रभावित हो सकती है और सिंचाई लागत बढ़ जाएगी।
मौसम विभाग और विभिन्न एजेंसियों की ओर से इस वर्ष मानसून की रफ्तार सामान्य से कुछ धीमी रहने तथा कई क्षेत्रों में वर्षा कम रहने की आशंका जताई गई है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
मेरठ के जानी क्षेत्र के किसान राजवीर सिंह कहते हैं, "धान की पौध तैयार हो चुकी है। अब रोपाई का समय नजदीक है। अगर मानसून समय से नहीं आया तो हमें ट्यूबवेल चलाने पड़ेंगे। इससे डीजल और बिजली दोनों का खर्च बढ़ेगा।"
धान की रोपाई के लिए पानी सबसे बड़ी चिंता
मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में धान खरीफ की प्रमुख फसल है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी का कहना है कि धान की रोपाई के समय खेतों में पर्याप्त नमी और पानी जरूरी होता है। इस बार जून के मध्य तक बारिश सीमित रहने के कारण कई गांवों में किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हैं।
दौराला क्षेत्र के किसान सुनील चौधरी बताते हैं, "नर्सरी तो तैयार है, लेकिन खेतों में रोपाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। यदि बारिश नहीं हुई तो डीजल इंजन और ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ेगा। इससे लागत काफी बढ़ जाएगी।"
किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में सिंचाई के लिए बार-बार ट्यूबवेल चलाना छोटे और मध्यम किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
नहरों की सफाई पर उठ रहे सवाल
किसानों की दूसरी बड़ी चिंता सिंचाई विभाग की नहरों और रजवाहों की स्थिति को लेकर है। कई गांवों के किसानों का आरोप है कि कागजों में सफाई दिखा दी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर नहरों में घास-फूस और गाद भरी हुई है।
सरूरपुर क्षेत्र के किसान राजीव त्यागी कहते हैं, "हर साल नहर सफाई का दावा किया जाता है, लेकिन कई जगह पानी टेल तक नहीं पहुंचता। अगर मानसून कमजोर रहा तो नहरों का पानी ही किसानों का सहारा बनेगा। इसलिए समय रहते सफाई और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।"
रोहटा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जिन गांवों के पास नहर सुविधा है, वहां भी अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने में दिक्कत आती है। किसानों का मानना है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले नहरों की विशेष निगरानी होनी चाहिए।
खाद की उपलब्धता को लेकर आशंका
खाद की उपलब्धता और संभावित कालाबाजारी भी किसानों की चिंता में शामिल है। किसानों का कहना है कि धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के समय डीएपी और यूरिया की मांग अचानक बढ़ जाती है।
किसान नेता हरेंद्र मलिक कहते हैं, "फिलहाल बाजार में खाद उपलब्ध है, लेकिन जैसे-जैसे बुवाई बढ़ेगी, मांग भी बढ़ेगी। प्रशासन को अभी से निगरानी करनी चाहिए ताकि किसानों को निर्धारित दरों पर खाद मिल सके।"
किसानों का अनुभव है कि सीजन के चरम समय में कई बार दुकानों पर लंबी कतारें लग जाती हैं और कुछ स्थानों पर किसानों को आवश्यकता से कम खाद मिल पाती है।
बीज की गुणवत्ता पर भी नजर
मेरठ के कई किसानों ने धान, बाजरा और मक्का के बीज खरीद लिए हैं। हालांकि किसान इस बार बीज की गुणवत्ता को लेकर अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
मवाना क्षेत्र के किसान अमित कुमार बताते हैं, "बाजार में कई तरह के बीज उपलब्ध हैं। किसान अब प्रमाणित बीज खरीदने पर जोर दे रहे हैं क्योंकि खराब गुणवत्ता वाला बीज पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है।"
कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को प्रमाणित स्रोतों से बीज खरीदने और बिल सुरक्षित रखने की सलाह दे रहे हैं।
डीजल खर्च बढ़ने से लागत पर दबाव
किसानों का कहना है कि यदि बारिश में देरी हुई तो सबसे बड़ा असर खेती की लागत पर पड़ेगा। खेत की तैयारी, सिंचाई और रोपाई में डीजल की खपत बढ़ जाएगी।
किसान धर्मपाल सिंह कहते हैं, "एक तरफ फसल का दाम निश्चित नहीं है और दूसरी तरफ लागत लगातार बढ़ रही है। अगर बारिश समय पर हो जाए तो सिंचाई का खर्च काफी कम हो जाता है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष देश के कई हिस्सों में मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई गई है, इसलिए सिंचाई संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
किसानों की उम्मीदें अब बादलों से
गांवों की चौपालों से लेकर खेतों की मेड़ों तक एक ही चर्चा सुनाई दे रही है—मानसून कब आएगा? किसानों का मानना है कि अच्छी और समय पर बारिश ही खरीफ सीजन की सफलता तय करेगी।
मेरठ जिले के अधिकांश किसानों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। नर्सरी तैयार है, खेत तैयार हैं और बीज-खाद की व्यवस्था भी लगभग हो चुकी है। अब उन्हें इंतजार है तो केवल आसमान से बरसने वाली उस बारिश का, जो धान की रोपाई को गति दे सके और खेती की बढ़ती लागत को कुछ हद तक कम कर सके।
कुल मिलाकर, इस समय मेरठ के किसानों की प्रमुख चिंताएं समय पर मानसून का आगमन, धान रोपाई के लिए पर्याप्त पानी, नहरों की सफाई, डीजल की बढ़ती लागत तथा खाद और बीज की निर्बाध उपलब्धता हैं। आने वाले दो से तीन सप्ताह किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।


