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Meerut News: युवाओं को भा रही मशरूम की खेती, मेरठ में 7 नई यूनिटों की मांग
Meerut News: मेरठ में कम लागत और सरकारी सब्सिडी के चलते युवाओं का रुझान मशरूम की खेती की ओर बढ़ रहा है। उद्यान विभाग ने 7 नई मशरूम उत्पादन इकाइयों के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं।
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Meerut News: खेती को रोजगार और कारोबार का नया जरिया बनाने की चाह रखने वाले मेरठ के युवाओं को मशरूम की खेती खूब भा रही है। कम जगह में उत्पादन, सीमित लागत और सरकार की सब्सिडी ने युवाओं का रुझान मशरूम उत्पादन की ओर बढ़ा दिया है। यही वजह है कि जिला उद्यान विभाग ने युवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए मेरठ में सात नई मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं।राष्ट्रीय एकीकृत बागवानी मिशन के तहत सरकार मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों और युवाओं को अनुदान दे रही है। छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए लो कॉस्ट मशरूम प्रोडक्शन यूनिट और बड़े स्तर पर कारोबार करने वालों के लिए मशरूम कल्टीवेशन हाईटेक यूनिट योजना संचालित की जा रही है।
200 वर्ग फीट में शुरू हो सकता है काम
मशरूम उत्पादन की शुरुआत के लिए बड़े खेत या भारी-भरकम जगह की जरूरत नहीं है। लो कॉस्ट मशरूम प्रोडक्शन यूनिट महज 200 वर्ग फीट यानी 20 गुणा 10 फीट जगह में स्थापित की जा सकती है। सरकार ने इसकी परियोजना लागत दो लाख रुपये तय की है, जिस पर 50 प्रतिशत यानी एक लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।कम जगह और कम निवेश में शुरुआत होने के कारण यह योजना खासतौर पर खेती के साथ अपना कारोबार शुरू करने की सोच रहे युवाओं को आकर्षित कर रही है।
हाईटेक यूनिट लगाने पर 12 लाख तक अनुदान
बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन करने वालों के लिए हाईटेक यूनिट का विकल्प भी उपलब्ध है। मेरठ में इस समय पांच हाईटेक मशरूम इकाइयां संचालित हो रही हैं। शासन ने हाल ही में हाईटेक मशरूम यूनिट की परियोजना लागत सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी है।इस परियोजना पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही अधिकतम सब्सिडी की सीमा आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है। इससे मशरूम उत्पादन को बड़े स्तर पर कारोबार के रूप में शुरू करने वाले युवाओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
सितंबर से मार्च तक उत्पादन का अच्छा समय
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन के लिए करीब 30 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। सितंबर से 15 मार्च तक का समय इसके लिए अनुकूल माना जाता है।उन्होंने बताया कि इस वर्ष शासन की ओर से मेरठ को तीन लो कॉस्ट मशरूम यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य दिया गया था। हालांकि, युवाओं की बढ़ती रुचि और मांग को देखते हुए विभाग ने तीन अतिरिक्त लो कॉस्ट मशरूम यूनिट और चार हाईटेक मशरूम यूनिट के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं।प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद मेरठ में मशरूम उत्पादन का दायरा बढ़ेगा। साथ ही खेती से जुड़े युवाओं के लिए कम लागत में स्वरोजगार और कारोबार शुरू करने का एक नया विकल्प भी तैयार होगा।


