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Meerut News: नीले ड्रम केस में फांसी की सजा के बाद कचहरी में बंटे लड्डू, महाभारत का दिया हवाला
Meerut News: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत द्वारा दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद कचहरी में बंटे लड्डू, महाभारत के प्रसंग का किया गया हवाला।
Meerut Neel Drum Murder Case
Meerut News: नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद बुधवार को मेरठ कचहरी में फैसले से ज्यादा उसकी टिप्पणी की चर्चा रही। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने सजा सुनाते समय महाभारत का हवाला दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे के मुताबिक, अदालत ने कहा कि समाज में गंभीर और जघन्य अपराध करने वालों को दंडित करना भी धर्म है। न्यायपालिका का दायित्व है कि अपराध के अनुरूप उचित दंड दिया जाए।
फैसले के बाद कचहरी में अधिवक्ताओं ने मिठाइयां बांटीं। अदालत परिसर में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगे। सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी ने फैसले पर संतोष जताया, लेकिन कहा कि परिवार को असली खुशी उस दिन होगी, जब दोनों को फांसी देने की तारीख तय होगी। उधर, पुलिस ने इसे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देने की घोषणा की।
मेरठ में पहली बार किसी महिला को मृत्युदंड
डीजीसी केके चौबे ने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार, मेरठ में किसी पुरुष को मृत्युदंड सुनाए जाने का यह तीसरा मामला है, जबकि किसी महिला को पहली बार मृत्युदंड दिया गया है। उन्होंने कहा कि अपनी याद में उन्होंने पहली बार किसी फैसले के बाद मेरठ कचहरी में लोगों के बीच इस तरह का उत्साह देखा है।
चौबे के मुताबिक, अदालत ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गंभीर अपराधों के दोषियों को उचित दंड देना धर्म का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह बेहद क्रूर और गंभीर अपराध था। ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर दंड जरूरी है। अदालत ने सभी पक्षों, साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद फैसला सुनाया।
चौबे ने कहा कि फैसले के बाद कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने न्यायाधीश के निर्णय की सराहना की। कचहरी में मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं। उन्होंने फैसले को समाज के लिए संदेश बताते हुए कहा कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोर दंड भुगतना पड़ेगा।
‘फांसी की तारीख तय होगी, तब होगी असली खुशी’
सौरभ की मां रेनू देवी ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, ‘हम कोर्ट के फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं। आज कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है, लेकिन जब उनकी फांसी की तारीख मुकर्रर हो जाएगी, वह हमारी खुशी का असली दिन होगा।’
सौरभ के भाई राहुल ने भी कहा कि परिवार अदालत से दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग कर रहा था। अदालत ने उनकी मांग स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा, ‘हमें न्याय मिल गया है। हम कोर्ट के फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं।’
परिवार के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आया है। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया कानून के मुताबिक जारी रह सकती है।
भारी भीड़ के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए दोषी
डीजीसी चौबे ने बताया कि अदालत में भारी भीड़ को देखते हुए मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों को अदालत में बुलाने पर किसी अप्रिय घटना की आशंका हो सकती थी, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विकल्प अपनाया गया।
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगे। अधिवक्ताओं ने मिठाई बांटकर निर्णय पर खुशी जताई। चौबे के मुताबिक, कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने न्यायाधीश को फैसले के लिए धन्यवाद दिया।
पुलिसकर्मियों को मिलेगा नकद पुरस्कार
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इस चर्चित हत्याकांड में पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा हुई है। उन्होंने मामले में योगदान देने वाले पुलिसकर्मियों और अभियोजन से जुड़े अधिकारियों की सराहना करते हुए प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देने की घोषणा की।
पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत मामले की प्रभावी पैरवी की गई। गवाहों को समय से अदालत में पेश कराने और अभियोजन को मजबूती देने में ब्रह्मपुरी थाना पुलिस, मॉनिटरिंग सेल तथा कोर्ट स्टाफ की भूमिका रही। इनमें थानाध्यक्ष राजेश काम्बोज, डीजीसी केके चौबे, कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल दिलशाद अहमद और कोर्ट मोहर्रिर कांस्टेबल प्रशांत कुमार शामिल हैं।
मार्च 2025 में हुई थी सौरभ की हत्या
मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या का मामला 18 मार्च 2025 को ब्रह्मपुरी थाने में दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, आरोप था कि मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की और शव के टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में सीमेंट के भीतर छिपा दिया। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर शव बरामद किया था।
विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। बुधवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया। हत्या के तरीके और शव को छिपाने की घटना के कारण यह मामला देशभर में चर्चा में रहा था।


